प्रशांत कुमार झा की रिपोर्ट:
रविवार शाम को जो तबाही का मंज़र भूकंप ने पूरे उत्तर पूर्वी भारत और खासकर सिक्किम में बिखेरा था वो हर बितते दिन के साथ और दर्दनाक शक्ल अख्तियार करते जा रहा है|
गौरतलब है की ६.९ की तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र सिक्किम की राजधानी गंगटोक से ६४ किलोमीतरे की दूरी पर बताया गया है| इस भूकंप ने बिहार झारखण्ड उत्तरप्रदेश पश्चिम बंगाल और राजस्थान को भी अपने चपेट में लिया. दिल्ली में भी भूकंप के हलके झटके महसूस किये गए|

सभी प्रभावीत इलाको में भारी नुक्सान की खबरे सामने आई है| सबसे ज्यादा तबाही सिक्किम के मंगन और सिंघतम इलाके में हुई| मरने वालो की संख्या बढ़कर ११२ से अधिक हो गयी है जिसमे सिक्किम में ७३ पश्चिम बंगाल में १२ बिहार में ९ नेपाल में ११ और तिब्बत में ७ मौते हुई हैं| अधिकारीयों की माने तोह ये संख्या अभी आगे आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है| राहत और बचाव कार्य व्यापाक रूप से सभी प्रभावित इलाको में चलाया जा रहा है| करीबन ५५०० सेना के जवान और ७०० इंडो तिब्बतियन बोर्डर पुलिस के जवान स्थिति सामान्य करने में जुटे हैं. हेलीकाप्टर के माध्यम से दूरस्थ इलाको वाले क्षेत्रो में खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जा रही है|
भूकंप के बाद हुए भूस्खलन और भारी बारिश के कारण सरको पे जमा भरी मिटटी और मलवे के वजह से सुरक्षा कर्मियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है| प्रभावित इलाको के हवाई निरिक्षण के बाद सभी जगहों पे बिजली व्यवस्था पूर्ववत कर दी गयी है| राज्य विज्ञप्ति विभाग के अनुसार कम से कम २००० घर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं जिनमे से कई सरकारी आवास भी हैं|
आज सुबह सेना के जवानों ने विदेशी सैलानियों समेत मलबे में फसे ४५ लोगों को लाचुंग से सकुशल सुरक्षित स्थानों तक पहुचाया| अभी भी सुरक्षा और बचाव दल को भूस्खलन से प्रभावित ३० से ४० प्रमुख सड़को को साफ़ करना होगा ताकि वो बाकी 1५ दूरस्थ गावों तक पहुच पाए और वहां भी बचाव कार्य सुचारू रूप से चलाई जा सके|
इस प्राकृतिक त्रासदी से सिक्किम को करीबन १ लाख करोड़ रूपये की बड़ी क्षति पहुची है स्थानीय निवासी भी काफी सदमे में हैं इस दुर्घटना के बाद| स्तिथि सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है|





