मीडिया: लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ?

Posted on March 26, 2012 in Media and Culture

राहुल यादुका:

मीडिया (लोकतंत्र का तथाकथित चौथा स्तंभ) गैर-जिम्मेदार है,यह एक स्थापित तथ्य है पर मीडिया संवेदनहीन है, इसमें मुझे शक था| मीडिया की पढाई देश के बेहतरीन संस्थाओं में होती है| क्या मीडिया सिर्फ लेखन शैली को योग्यता मानती है? क्या इसमें ज्ञान और दर्शन की कोई भूमिका नहीं? ऐसे में तो हर अच्छे भाषाविद को पत्रकार बन जाना चाहिए|

हमारे शहर सहरसा में नो-एंट्री के समय एक ८ चक्के वाली ट्रक ने शहर के व्यस्ततम इलाके में ११वी कक्षा के एक छात्र को सुबह ९ बजे कुचलकर मार डाला| आदतन, शहर के “वरिष्ठ” नागरिकों ने बंद का आयोजन किया और प्रशासन की निंदा की| इस उहापोह का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा की और शहर में अव्यवस्था का माहौल बना दिया| दंगों को रोकने के लिए मुख्यालय से ९ एस.पी. और ३ आई.जी. को शहर में तैनात किया गया|पुलिस ने स्तिथि पर काबू पा लिया|

अगले दिन मैं बड़ी बेचैनी से अखबार का इंतज़ार कर रहा था|सारे अख़बारों में कम से कम ३ पृष्ठ इस घटना को समर्पित थे| ट्रक चालक की पिटाई, बंद, मृत की अलग-अलग कोनों से ली गयी तसवीरें,शहर में पसरा सन्नाटा-मीडिया ने सब कुछ लिखा था,पर मेरी आखें कुछ और तलाश रही थी| मैं एक तकनीकि संस्था का विद्यार्थी हूँ इसलिए मैंने अपने तराजू पर घटना को तौला तो पाया की “नो-एंट्री” में गाड़ी चलाना ही घटना का मुख्य कारण था|

पर आश्चर्य, किसी भी अखबार ने इस मुद्दे पर कलम नहीं चलाया|बड़ी सुनियोजित रणनीति से इस बात से लोगों का ध्यान हटाकर असामाजिक तत्वों द्वारा भड़काई गयी हिंसा की ओर खींच लिया गया| मृत्यु के उपरांत हुई घटना केंद्र में आ गयी और स्वयं घटना दरकिनार हो गयी|

अब मुझे एहसास हुआ की वाकई में पत्रकार बनने के लिए बहुत योग्यता चाहिए| सिर्फ लेखन कला से काम नहीं चलता| आपको संवेदनहीन बनना पड़ेगा, तर्क को अनदेखा करना होगा, अपने अखबार की ब्रांडिंग देखनी होगी, हाकिमों को खुश रखना होगा, आखिर धंधा भी तो चलाना है! इतनी ज़िम्मेदारी भला कोई आम आदमी संभाल सकता है!

इस घटना के बाद मेरा मीडिया के प्रति आदर और बढ़ गया|लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मज़बूत होता देखकर मन खुश हो जाता है!

Youth Ki Awaaz

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Garima Rani

मुझे ये नही समाज आया कि इसमें पत्रकारों की किस बात की तारीफ की जा रही है – उनका घटना के कारन को न छापने के लिए या फिर कुछ और |

indiavikash

good…..

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