भारतीय संसद द्वारा प्रदान सुचना के अधिकार (आर टी आई) की बदती दुरुपयोगिता सरकारी कार्यालयों के लिए मुसीबत बन चुकी है | दिन प्रतिदिन हजारो अर्ज़िया सरकारी रेकार्डो को जानने के लिए दर्ज हो रही है| यह एक हद तक सही भी है की हर एक भारतीय नागरिक को आधिकार है की सरकारी कार्यालयों मे क्या काम चल रहा है| परन्तु बढते महत्व के कारण अब कुछ नागरिक इस अधिकार का दुरुपयोग करने लगे है| अब बहुत सी आर्ज़ियो मे अनावश्यक और अनुपयोगिक प्रश्न पूछे जा रहे है जिसके कारण सरकारी कार्यालयों की कम करने की गति पर असर पड़ सकता है | सुचना का अधिकार हर एक भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है जो की भारतीय संविधान द्वारा अनुच्धेद 19 मे प्रदान किया गया है| इस सुचना के अधिकार का मुख्य उददेश भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है परन्तु इसकी बदती दुरुपयोगिता इस अधिकार के उददेश पर प्रश्न चिन्ह लगा सकती है|
भारतीय मुख्य न्यायाधीश एस| एच| कपाडिया कहते है ” सुचना के अधिकार की दुरुपयोगिता इसके महत्व को घटा कम कर सकती है| इसके द्वारा पूछे जाने वाले अनावश्यक प्रश्नों की संख्या लगातार बढ रही है|” श्री कपाडिया ने उदाहरण देते हुआ कहा की एक अर्जी मे उनसे पूछा गया की “आप नानी पालखीवाला व्याख्यान मे क्यों गए ? आपने दोपहर के खाने मे क्या खाया? आप वहा से कितने बजे निकले? आदि|
सुचना का अधिकार भारतीय कार्यप्रणाली मे पारदर्शिता लाने के लिए उपयुक्त कानून है परन्तु यह तभी संभव है जब इस अधिकार का उपयोग अनावश्यक प्रश्न पूछ कर भारतीय कार्यप्रणाली का समय बर्बाद होने से बचाया जा सके| वही दूसरी तरफ कुछ आर टी आई कार्यकर्ताओ का कहना है की “यदि किसी व्यक्ति के घर मे बिजली नहीं आ रही है और वह व्यक्ति इसका कारण जानना चाहता है ” यह प्रश्न बिजली विभाग अधिकारियो के लिए अनावश्यक हो सकता है परन्तु उस व्यक्ति के लिए नहीं| आर टी आई कार्यकर्ताओ का कहना है की नहीं कुछ तो भारतीय नागरिक अवगत तो है उनके इस मौलिक आधिकार के बारे मे और वह जानते तो है इसका उपयोग करना| अंत मे यह निष्कर्ष निकला जा सकता है की सुचना का अधिकार भारतीय जनता के हित के लिए बनाया गया है न की प्रतिहित के लिए, इसीलिए भारतीय नागरिको से भी यही आपेक्षा की जाती है की वह इस अधिकार का महत्व समझे और उसके अनुसार उपयोग करे | जय हिंद जय भारत|







