तवेष मिश्रा: अपने मित्र द्वारा लिखित एक ‘ब्लॉग पोस्ट’ को पढ़ कर मन में विचार उमड़ा की हम भी कुछ अपनी मातृ भाषा में लिखने का प्रयत्न करे। विचार भला था किन्तु कही से भी आसान नहीं, दरअसल भारतीय शिक्षा प्रणाली की खास बात यह है
आशीष पटेल: भारतीय संसद द्वारा प्रदान सुचना के अधिकार (आर टी आई) की बदती दुरुपयोगिता सरकारी कार्यालयों के लिए मुसीबत बन चुकी है | दिन प्रतिदिन हजारो अर्ज़िया सरकारी रेकार्डो को जानने के लिए दर्ज हो रही है| यह एक हद तक सही भी है
राहुल यादुका: जब दिल्ली में अन्ना जी का अनशन था..वहाँ हमने युवा शक्ति को पहली बार देखा था|बहुत से लोगों ने उस आंदोलन से प्रेरणा ली| सोचा की लगता है अब भारत जग गया है और अब भ्रष्टाचार की खैर नहीं|लेकिन जीवन इतना आसान नहीं है...
-कुंदन पांडे: ये कैसा उन्माद है इतना भीषण क्यूँ संग्राम है? कुछ ज़मीन के टुकड़ो में ऐसी क्या बात है? अंतहीन इस कोलाहल में किसकी जीत किसकी हार है? महाभारत है ये या महाभिशाप है 'सदा-इ-सरहद'* कुछ न कर पाया न कर सकी कुछ 'अमन की
-कुंदन पांडे: अपनों में सिमटी ममता में लिपटी खुद में खपती जीवन तुम रचती काया में ढलती प्रेम में पिघलती सतत तुम जलती प्राथना में रमती जीवन तुम रचती मोह तुम करती माया में फसती निर्माण करती वंश चलाती जीवन तुम रचती अपनों में सिमटी
- देविका मित्तल : कितने राजा आए , कितने शेहेनशाह गुज़रे, पर वह वही रहा | किले फ़तेह कर लिए जाए , या बनवा लिये जाए ताज कई, मरता वह ही है वह जिससे पूछा भी नहीं जाता की वह किसकी तरफ है, मरता वह ही है | किले
प्रशांत कुमार झा की रिपोर्ट: रविवार शाम को जो तबाही का मंज़र भूकंप ने पूरे उत्तर पूर्वी भारत और खासकर सिक्किम में बिखेरा था वो हर बितते दिन के साथ और दर्दनाक शक्ल अख्तियार करते जा रहा है| गौरतलब है की ६.९ की तीव्रता वाले