जीवन तुम रचती…

Posted on March 12, 2012 in Hindi, Society

कुंदन पांडे: 

अपनों में सिमटी
ममता में लिपटी
खुद में खपती
जीवन तुम रचती

काया में ढलती
प्रेम में पिघलती
सतत तुम जलती
प्राथना में रमती
जीवन तुम रचती

मोह तुम करती
माया में फसती
निर्माण करती
वंश चलाती
जीवन तुम रचती

अपनों में सिमटी
ममता में लिपटी
खुद में खपती
जीवन तुम रचती

आशा तुम जगाती
निराशा भगाती
सृजन तुम करती
उथान करती
जीवन तुम रचती

प्रज्ञा बढाती
गौरव तुम लाती
रेगिस्तानी जड़ता मिटाती
हरियाली सजाती
जीवन तुम रचती…

जीवन तुम रचती…

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