मुलायम यादव के तीसरे मोर्चे के हसीन सपने

Posted on October 9, 2013 in Politics

By Sagar Vishnoi:

ख़ैर मनाये मोदी की रैलीयों में ताली बजाने वाले, उन्हें क्या पता की एक उम्मीदवार और है जो प्रधानमंत्री बनने के सपने अभी भी बुन रहा है. ना ना,वो बीजेपी के पितामाह आडवाणी नहीं, सपा के महामहीम, राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हैं. जी हाँ, पिछली दो बार 2004 और 2009 की तरह इस बार भी सपा प्रमुख तीसरे मोर्चे के सपने देख रहे हैं.

Mulayam Singh

वैसे मुलायम सिंह का इस बार हक़ भी बनता है ये सपने देखने का, आखिर इतने सारे निर्दलीय जो साथ आने की जुगात में हैं उनके. उन्होंने हाल ही में कहा की कांग्रेस या बीजेपी दोनों में से किसी को भी बहुमत मिलने की आशंका कम है. उनकी सी.पी.एम. के प्रकाश करात और सी.पी.आई के ऐ.बी बर्धन के साथ चर्चा चल रही है और चुनाव के बाद तीसरे मोर्चे की सरकार केंद्र में आएगी. वैसे सही बात है मुलायम जी, उत्तर प्रदेश की जनता आप ही को तो वोट देगी, आखिर आपने कितना कुछ दिया है प्रदेश को, छात्रवृत्ति, लैपटॉप और शायद मुजफ्फरनगर दंगे भी? अरे माफ़ी, वो तो एक छोटी सी सांप्रदायिक भिड़न्त थी.

आपकी पार्टी के भी क्या कहने, ऐसी क्षेत्रीय पार्टी जिसमे सबसे ज्यादा दागी नेता हैं. अब आप कहेंगे की मैडम की पार्टी में कम हैं दागी? जी बिलकुल सही फ़रमाया, वहां भी हैं, लेकिन माया मैडम ने आपकी तरह दागी नेता के अध्यादेश के निरस्त हो जाने पर रोष नहीं जताया. ख़ैर, अब आप सपना देखिये प्रधानमंत्री बनने का और आजम खान को गृह मंत्री बनाने का. देश की एक नई विकास गाथा लिखी जाएगी. केजरीवाल वगैरह कहाँ लोकपाल, सच्चाई का चोला ओढ़ आपके सामने टिकने वाले हैं. देहाती औरत, पप्पू या किसी फेकू का कहाँ आप से कोई मुकाबला. लेकिन आप आरजेडी और बाकी पार्टियों से सांठ-गाँठ करने में जुटिये. अपने कार्यकार्ताओं को सोशल मीडिया पे दूसरी पार्टी के कार्यकर्ताओं को गाली लिखने के लिए बैठाइए. लेकिन आप Twitter पे ट्रेंड क्या करायेंगे? #परिवारवाद, #यादवपावर या #यूपीमेंजुर्म?

नेता जी, आप शायद अंदाजा भी नहीं लगा सकते जनता के आक्रोश का. प्रशासन के सड़ जाने से लोगों में गुस्सा है. युवा बेरोजगार है. महिलाओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं रोज़ बढ़ रही हैं. भ्रष्टाचार सपा सरकार का दूसरा नाम बन चुका है. उत्तर प्रदेश-उत्तम प्रदेश हमारे कानों में 10-12 साल पहले सुनाई दिया था और हमें आज भी ये पंक्ति राहुल गाँधी के प्रधानमंत्री बनने जैसा दिखता है. शायद प्रदेश का युवा अपने सपने पूरा कर ले, लेकिन प्रदेश का विकास होगा, इसकी उम्मीद कब का छोड़ चुका है. लोगों में हताशा है और आपकी पार्टी का नारा है उम्मीद की साइकिल! वाह!

नेता जी ,लेकिन 2014 के चुनाव केवल 6 महीने दूर हैं, बदलाव को आपकी साइकिल भी नहीं रोक सकती इस बार!

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