कैसे महाराष्ट्र की इन सेक्स वर्कर्स ने सिर्फ 4 दिनों में चेन्नई के लिए ₹1 लाख इकठ्ठा किए

Posted on December 10, 2015 in Hindi

सुमन त्रिभुवन:

अहमदनगर में भगतगली नाम का पुराना रेडिलाईट एरिया है । एक हफ्ते पहले मैं अपनी सहेलियों से मिलने और स्नेहालय के एक कार्यक्रम के बारे में बात करने के लिए भगतगली गई। तब सभी औरतें एक टि.व्ही. न्युज चॅनल देख रही थी। उसमें बार-बार तमिलनाडू और चेन्नई में आई बारिश और तबाही को दिखाया जा रहा था। मेरी सहेली दीपा उसे देखकर रो रही थी। बाकी सभी महिलाएँ भी उन दृश्यों से बहुत दुखी थी। मीना पाठक ने बात छेड़ी। उसने कहा, “हमें कुछ करना चहिए। चेन्नई के लोग बहुत बुरे हाल में दिख रहे है।”

इस पर कमल ने कहा, “सरकार को मदद करना चहिए। मदद करना सरकार का काम है। अपने देश के अमीर लोग अवश्य मदद करेंगे। हमें चिंता करने की जरूरत नहीं है । हम बस ईश्वर से हालत सुधारने के लिए प्रार्थना करेंगे।”

इसर् बहस में गली की सारी औरतें शोमल हुई । हर कोई अपनी राय देने लगा। फिर हमने शेवगाँव फोन लगाया। वहाँ के रेडलाईट एरिया में काम करने वाली जया जोगदंड ने कहा कि वहाँ भी सभी औरते दो दिन से इस बरबादी के कारण दुखी है। सभी को लगता है कि कुछ करना चहिए। श्रीरामपुर में सुनिता उनवणे ने धनगरवस्ती रेडलाईट एरिया से बताया कि यहॉ की वैश्या महिलाँए कुछ चंदा जमा करने के काम में जुट गई हैं। कोपरगाँव में सुभाषनगर से संगीता शेलर ने बताया कि उसे महिलाओं ने 5 हजार रूपय दिए हैं। और तमिलनाडू भेजने के लिए कुछ रस्ता ढूंड रही है। यह सब सुनकर दीपा और मीना ने कहा, हमें भी कुछ करना चाहिए। सरकार या दूसरे लोग क्या कर रहे हैं, या फिर क्या करेंगे, इसके बारे में हमें नहीं सोचना चाहिए। हमें क्या कर सकते है, यह हमे देखना चाहिए। तमिलनाडू के लोग हमारे अपने भारतवासी हैं, अगर हमारे अपने भाई-बहनों पर कोई संकट आजाए, तो क्या हम सरकार का या दुसरे लोगों का इंतजार करेंगे? मैंने इसपर कहा, प्रभु रामचंद्र के श्रीलंका तक सेतू बनाने के काम में गिलहरी नें जो काम किया वह हमें करना चाहिए। क्योंकि हम लोग अपने अधिकारों की लढ़ाई स्नेहालय के माध्यम से लड़ते हैं, फिर जब अपने देशवासियों पर संकट आती है, तो हमें अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन भी करना चाहिए।

मैंने याद दिलाया कि इस से पहले 1993 में मुम्बई के बाम्ब विस्फोट के समय, गुजरात और महाराष्ट्र के भुकंम्प में, कारगिल युध्द में, सुनामी के दौर में, ओरिसा के चक्रवात में, एच.आय.व्ही. एड्स पीडितों के लिए आत्महत्या करनो वाले किसानों के परिवारो के लिए, 2013 में महाराष्ट्र के सुखाग्रस्त इलाके के लिए हम वैश्याओं ने अपना योगदान दिया था। पिछले साल कश्मीर में आई बाढ़ और उत्तराखंड के महाप्रलय के समय भी हमने साथ दिया था। जब हम थोड़ा सा देश के लिए देते हैं, तो लगता है कि हमें खुद को भारतीय कहने का अधिकार सचमुच हैं। एसे समय में अगर हम कुछ नहीं करते, तो हम अपनी निगाहों में गिर जाते हैं। समाज की नजरों में हम अपनी मजदूरी के कारण गिरे हुए हैं, पर उसका हमें कोई इल्म नहीं है । लेकिन हम खुदकी नजर में कभी गिरना नहीं चाहते।

फिर हम नें फैसला किया कि 4 दिन हम एक वक्त खाना खाएंगें, कोई भी औरत नशा नहीं करेगी, और जितने पैसे बचते हैं, वह हम तमिलनाडू के पीडितों को देंगे। हमनें पूरे अहमदनगर जिले के सभीं रेडिलाईट एरिया में शाम तक फोन किए। सभीं का मन पहले से ही कुछ करने के लिेए बना था। स्नेहालय के प्रवीण मुत्याल सर को यह बात हमनें बताई। उन्होंने कहा कि फिलहाल पंतप्रधान सहायता निधी को पैसे देना बहतर रहेगा।

DSCN0865रेशमा ने कहा कि वह भी पैसे देगी, लेकिन हमनें कह कि एच.आय.व्ही के कारण उसकी हालत बहुत खराब है, वह अब धंदा भी नहीं करती, महिलाओं के लिए खाना बनाना और उनके बच्चे संभालना ही उसका काम हैं। उसकी आमदनी पेशा करने वाली दुसरी महिलाओं स कम है, इलिए उसका पैसा हम नहीं लेंगे। उसने कहा कि एक ना एक दिन उसे मरना ही है, वह कुछ अच्छा काम कर के मरना चाहती है। फिर मैंने कहा, चलेगा, लेकिन उसे दोनो वक्त खाना खाना चाहिए और हमारी तरह एक वक्त का खाना नहीं छाड़ना चाहिए। उसे यह भी स्वीकार नही था। उसने कहॉं कि वह खाना खा ही नहीं सकती जब इतने लोग बाढ़ की तबाही की वजह से भुखें हैं। फिर सब जगह यह मिशन शुरू हुआ।

3500 में से लगभग 2000 महिलाओं ने अपनी कमाई ईमानदारी से, प्यार और समर्पण भाव से तमिलनाडू के लिए दी। मुझे लगता है कि इस में सराहने लायक कुछ भी नहीं हैं। हमारे 1 लाख रूपय हमने जिलाधिकारी अनिल कवडे को दे दिये। अब सभी की इच्छा है कि और 4 लाख रूपय अगले 2 महीनों में इकट्ठा करके देंगे। स्नेहालय ने बताया कि गूंज नामक दिल्ली की संस्था इस काम में दिर्घकालीन कार्य करती हैं। उसे ही हम अपना सहयोग देंगे। कुछ महिलाओं की ईच्छा हैं कि प्रत्यक्ष रूप में चेन्नई जा कर लोंगों की सहायता करे। अवसर मिले तो यह भी होगा।

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