“गाय हमारी माँ नहीं है, तुम्हारा भगवान हमारा नहीं है, हम आज़ाद हैं और हम बराबर हैं”

Posted on July 30, 2016 in Hindi, Society

भारत के बारे में सोचने पर तुम्हारे दिमाग में क्या आता है? अगर तुम्हे फ़िल्में, किताबें, तस्वीरें या पिछले 100 सालों में अंग्रेजी संस्कृति से प्रभावित होने वाले लोग पसंद हैं तो बेशक तुम भारत की एक खुशनुमा तस्वीर ही बनाओगे। तुम शायद यहाँ के गरीब लेकिन खुश रहने वाले लोगों, यहाँ के रंगों, खाने, वेश-भूषा, शोरगुल, नृत्य और संगीत, गर्मी और इस एक देश की संवेदनाओं का एक रंगीन चित्र बनाओ। लेकिन तुम्हारे चित्र में जो रंग नहीं है, वो है काला रंग, क्यूंकि यही वो रंग है जिसे भारत छुपाता आया है। यह वो रंग है जो भारत को अच्छा नहीं लगता, चाहे यह रंग शरीर का हो या उस गंदे नाले का जिसमें उतर कर इसे साफ करना होता है। एक ऐसा गर्त जिसका कोई अंत नहीं है, यहाँ तुम्हे भारत का असल रंग दिखता है।

Caste

तुम गन्दगी में जन्म लेते हो लेकिन यह गन्दगी शरीर पर लगी वो गन्दगी नहीं है, जिसके साथ एक नवजात बच्चा पैदा होता है। तुम जाति व्यवस्था की गन्दगी में जन्म लेते हो। इससे भी बढ़कर तुम जाति के साथ लिंगभेद जैसी व्यवस्था की गंदगी में जन्म लेते हो। पहले अल्ट्रासाउंड से तुम्हारे स्त्री होने का पता चलते ही तुम्हारे अस्तित्व को सड़ा हुआ मान कर नकार दिया जाता है। तुम्हारे पैदा होने के बारे में तब पता चलता है, जब इसकी इजाजत दी जाती है। ताकि तुम्हें जिंदगी के तोहफे के रूप में एक ऐसी गुलामी दी जा सके जिससे, हर रात एक-एक कर सीधे तुम्हारी आँखों में झांकते हुए ऊँची जाति के लोग तुम्हारा बलात्कार कर सकें। दिन के उजाले में तुम ऊँची जाति के लोगों की गन्दगी अपने हाथों से साफ़ करोगे, बिलकुल एक जीते जागते गंदे नाले की तरह उसे अपने सिर पर उठाकर। तुम वो हो जो इन ऊँची जाति के लोगों की, तुम्हारे शरीर के ऊपर और अन्दर से होकर गुजरती गन्दगी को हटाने का काम करते हो।

अगर तुम उस पहले अल्ट्रासाउंड से एक पुरुष होने के कारण बच निकलते हो, तो एक ऐसी दुनिया में पहुंचते हो जहाँ तुम्हारी हैसियत एक नीच इंसान की होती है। तुम्हारी जगह किसी भी जीवित प्राणी से नीचे होती है और खासकर पवित्र मानी जाने वाली गाय से। तुम कभी स्कूल का मुंह नहीं देख पाते और किसी तरह गलती से अगर वहां पहुँच भी गए तो तुम्हें सबसे अलग बिठाया जाता है। जो पानी सब पीते हैं वो तुम नहीं पी सकते। ऊँची जाति के स्कूल के साथियों को तुम छू भी नहीं सकते।

जाति के नाम पर होने वाला अपमान, तुम्हारे बचपन का एक हिस्सा है, जिसे तुम्हारे टीचर भी पूरी निष्ठा से मानते हैं और उसका अनुसरण भी करते हैं। तुम भारत माता की तारीफों से भरे हुए राष्ट्रगान को गाते हो, तुम तिरंगे झंडे को भी सलाम करते हो। लेकिन तुम्हें कभी बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता, तुम्हें कभी इंसान नहीं समझा जा सकता।

तुम्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है ताकि तुम भूख से तड़पते तुम्हारे परिवार के लिए खाना जुटा सको। तुम गाँव की बाहरी सीमा पर रहते हो। तुम्हें रोज पानी लेने के लिए मीलों चलकर जाना पड़ता है, क्यूंकि गाँव का कुआँ तुम्हारी जाति के लोगों के लिए नहीं है। तुम एक कचरे के ढेर पर रहते हो। तुम उस गंदे नाले की बदबू के बीचोंबीच रहते हो, जो तुम्हारे  घर से होकर गुजरता है। तुम अपने भाई-बहनों को हवा और पानी से होने वाली बीमारियों से मरते हुए देखते हो। काफी हद तक मुमकिन है कि तुम्हारे माता-पिता एच.आइ.वी. जैसी बीमारी के साथ जी रहे हों। तुम्हारी उम्र केवल 10 साल की है।

तुम एक ईंट के भट्टे पर काम करना शुरू करते हो। क्यूंकि तुम ठेला खींचने के लिए काफी छोटे हो तो तुम्हे सिर पर बोझा उठाकर ले जाना होता है। तुम भट्टे की तपिश में झुलसते हो और तुम 40 डिग्री की गर्मी में ईंटें उठाकर बेहोश होने के कगार पर हो। अब तुम एक वयस्क हो, तुम्हारे माँ-बाप की मौत हो चुकी है, तुम्हारी बहिन एक सेक्स वर्कर है और तुम्हारा भाई एक ऐसे अपराध के कारण जेल में सड़ रहा है जो शायद उसने किया भी ना हो। तुम गंभीर रूप से कुपोषित हो और भुखमरी का शिकार हो पर फिर भी तुम किसी तरह जिन्दा हो। तुम्हारी त्वचा उस हवा की तरह काली हो चुकी है जिसमें तुम सांस लेते हो लेकिन तुम्हारे अस्तित्व की तरह वो भी गायब होती जा रही है।

तुम्हारी जाति तुम्हें दुर्भाग्य के रूप में तुम्हारा पेशा देती है। तुम्हारी जाति के लोगों ने जीवन यापन के लिए हमेशा से ही मरी हुई गाय की खाल उतारने का काम किया है। ऊँची जाति के लोग हमेशा से ही तुम्हें इस काम के लिए चुनते आये हैं। उनके लिए ये उनकी मरी हुई माँ है। वो ख़ुशी ख़ुशी गाय का पेशाब पियेंगे, उसके गोबर से उनके घरों कि लिपाई करेंगे लेकिन उनके लिए तुम अछूत हो। केवल तुम जैसा ही कोई नीच उनकी मरी हुई इस माँ को ठिकाने लगा सकता है। तुम्हें लगता है कि तुम भाग्यशाली हो क्यूंकि अब महीनों बाद तुम्हें ढंग का खाना मिल पाएगा जिसके लिए तुम इस मरे हुए जानवर के शुक्रगुजार हो। तुम इस जानवर की खाल से चमड़ा बना सकते हो और शायद उसे कौड़ियों के दाम बेच भी दो। अब शायद तुम अपनी बहिन को इन ऊंची जाति के गिद्धों से बचा सको, शायद अब तुम अपने भाई की ज़मानत दे सको ताकि तुम उसे पागल होने से बचा सको।

लेकिन उनका धर्म तुम्हें छोटी-छोटी चीजों पर खुश होने की भी इजाजत नहीं देता। इनके धर्म के हिसाब से तुम एक नीच का जीवन जीने के लिए विवश हो और इनके धर्म को ये तुम्हें अपना धर्म कहने के लिए मजबूर करते हैं। लेकिन तुम्हें इनके मंदिरों में भी जाने की इजाजत नहीं है। तुम इनके, इनके देवताओं के, इनके धर्म के गुलाम हो, तुम इनके पुश्तैनी गुलाम हो। वो तब तक तुम्हारे अंतर्मन पर उनके कुकर्मों की मोहर लगाते रहते हैं जब तक कि तुम तुम्हारे घृणित जीवन, तुम्हारी बहन से होने वाले बलात्कार, तुम्हारे हाड़तोड़ परिश्रम, जाति के नाम पर होता अपमान, और तुम्हारी गुलामी को अनदेखा ना कर दो। वो तुम्हें त्यौहार देते हैं जिन्हें तुम उनसे दूर रहकर मना सको, वो तुम्हे अलग अलग रूपों में आने वाले अनेक देवता देते हैं, वो तुम्हे दिन के हर हिस्से में किये जाने वाले धार्मिक कर्मकांड देते हैं, वो जादू टोने जैसी बातों का ऐसे इस्तेमाल करते हैं कि तुम्हारी तार्किक सोच ख़त्म हो जाए, वो तुम पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए तुम्हे अंधविश्वासों का आदी बना देते हैं। वो तुम्हारे जीवन के काले गहरे गर्त से उनका रंगीन इन्द्रधनुष बनाते हैं।

तुम उनके लिए दिन रात काम करते हो, तुम उनका मल-मूत्र साफ़ करते हो, उनके मरे हुए जानवरों का निपटारा करते हो। तुम खून बहाते हो, पसीना बहाते हो, दुर्गन्ध से घिरे रहते हो, तुम गालियाँ देते हो। तुम इतने मैले और गंदे हो कि कोई भी नाई तुम्हारे बाल नहीं काटता, तुम्हारी दाढ़ी नहीं बनाता। क्यूंकि उसे डर है कि कहीं उसके औज़ार गंदे ना हो जाएं। तुम एक जानवर हो, बल्कि तुम एक जानवर से भी गए गुजरे हो और वो चाहते हैं कि तुम हमेशा ऐसे ही रहो। उठाओ उनके धर्म और उनके कर्मकांडों का आनंद, उन्हें भगवान के रूप या एक मसीहा की तरह पूजते रहो। उनके मंदिरों में जाओ और बाहर खड़े रहकर पूजा करते रहो, उनकी आलौकिक ताकतों से डरते रहो, और उनके अंधविश्वासों को मानते रहो। उसी गर्त में जीते रहो जिसमें तुम हज़ारों सालों से जीते आए हो। उन्हें पता है तुम्हे ऐसे ही रखने के लिए क्या करना है, और अब ये उनके लिए एक कला बन चुकी है।

फिर एक दिन जब तुम उनकी माँ एक मरी हुई गाय की खाल उतर रहे हो, तो वो तुम्हें मारने के लिए आते हैं। उन्हें पता है कि ये तुम्हारा काम है, जो उन्होंने ही तुम्हारे लिए तय किया है। उन्होंने ही तुम्हारी जाति को भी बनाया है, लेकिन आज उनका मन तुम्हें मारने का है। उनका तुम्हारी बहनों का बलात्कार करके भी मन नही भरा है, आज कीमत चुकाने की बारी तुम्हारी है। वो तुम पर उनकी माँ को मारने का आरोप लगाते हैं, जब कि तुम विनती कर रहे हो कि वो पहले से ही मरी हुई थी। वो तुम पर उनकी माँ की खाल उतारने का आरोप लगा रहे है, जब कि तुम चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हो कि ये नीच काम तुम्हारा है। लेकिन आज कितनी भी मिन्नतें कर लो, कुछ नहीं होगा। आज तो तुम्हें मरना ही होगा।

वो तुम्हें उनकी कार से बाँध देते हैं, तुम्हारे कपड़ें उतार कर तुम्हें लोगों के बीच खड़ा कर देते हैं। एक-एक कर के ये लोग लोहे के डंडे से तुम्हें पीटते हैं। भीड़ चिल्ला रही है और तुम्हारी सज़ा की खुशियाँ मना रही है। तुम इसी के लायक हो। लेकिन तुम हो कौन? तुम्हारी मौत से हमारा मन बहलता है, तुम्हारी ज़िन्दगी हमारी दया पर निर्भर करती है। तुम्हारा आत्मसम्मान हमारे जूतों के नीचे रहता है। लेकिन हमें तुम्हारी ज़रूरत है, हमारी गन्दगी साफ़ करने के लिए, हमारे मरे हुए जानवरों की सफाई के लिए इसलिए हम तुम्हें जिंदा छोड़ देते हैं। तुम जीते जी भी मरे हुए ही हो, लेकिन काश कि हम तुम्हे पूरी तरह से मार पाते। केवल इसलिए कि हम तुम्हारी मौत के तमाशे का अच्छे से मजा ले पाते।

तुम्हारी हालत सुधरने की धीमी और लम्बी प्रक्रिया के दौरान तुम मरने की इच्छा करते हो। तुम्हारे शरीर के घाव भरने लगते है लेकिन तुम्हारे मन के नहीं। उन्होंने तुम्हारे जीवन से सभी उजाले छीन लिए हैं, लेकिन तुम्हारे खालीपन की जगह सब लाल दिखाई देता है। ये उस खून की लाली है जो तुम्हारी आँखों में तैर रहा है, बदले की इच्छा आखिर आ चुकी है। ये केवल वो लोग नहीं हैं जिन्होंने तुम्हारे शरीर के हिस्सों को एक-एक करके तोड़ा है, ये केवल वो लोग नहीं हैं जिन्होंने तुम्हारे दर्द पर खुशियाँ मनाई हैं। ये वो भगवान है जिसने तुम्हारे भाग्य को देखा है। ये वो मंदिर है जिसने तुम्हारी दुर्दशा को देखा है। ये वो मंदिर का पुजारी, वो ब्राह्मण है जिसने तुम्हे अलग-थलग करने की बात कही है, जिसने तुम्हें ये सजा दी है।

तुम्हारी आँखों में तैरता खून वापस नहीं जा रहा है, वो अब भी वहीं है, और तुम अपने इस नरक की ओर देख रहे हो। एक ऐसा काला गहरा गर्त जिसका कोई अंत नहीं है, जो इन लोगों ने ख़ास तुम्हारे लिए ही बनाया है। इन लोगों ने इसे सालों पहले बनाया था, और तुम लोगों को कभी कुछ और नहीं मिला, कोई भी दूसरा रास्ता, या किसी भी किस्म की आज़ादी। ये लोग ही तुम्हारे दुश्मन हैं, तुम्हारा निशाना हैं। लेकिन तुम्हें नीले रंग की कुछ रौशनी दिखाई देती है, यह नीले रंग की रौशनी इसी काले गहरे गर्त से आ रही है। तुम्हारे लोग अब नीले झंडे लहरा रहे हैं, एक ऐसे इंसान के होने का जश्न मना रहे हैं जो बिलकुल भी तुम्हारी तरह नहीं दिखता। उसका चेहरा साफ़ है, उसने अच्छे कपडे पहने है और उसने हाथों में एक किताब है। कौन है ये? वो लोग इन्हें अम्बेडकर कहकर बुलाते हैं, और जो किताब उनके हाथ में है वो भारत का संविधान है जिसे उन्होंने लिखा है। वो कहते हैं ये भी इसी गर्त से, इसी नर्क से आया है। बिलकुल तुम्हारी ही तरह।

वो गा रहे हैं ख़ुशी से रो रहे हैं, तुम्हारे लोग एक दूसरे को गले लगा रहे हैं और आशाओं से भरी बातें कर रहे हैं। वो कह रहे हैं कि तुम्हारे ऊपर हुए जुल्मों की वजह से यह क्रांति आयी है। अब उन्हें उनके मालिकों से दया की भीख नहीं मांगनी होगी। उन्होंने मरी हुई गाय को फेंक दिया है, उनकी माँ को, उन शोषण करने वालों के घरों के सामने, उनके दफ्तरों के सामने। वो कह रहे हैं कि अगर तुम अपनी माँ से इतना ही प्यार करते हो तो उसकी लाश का निपटारा भी तुम्ही करो। गाय हमारी माँ नहीं है, तुम्हारा भगवान हमारा भगवान नहीं है, तुम्हारे मंदिर हमारे मंदिर नहीं हैं और तुम हमारे मालिक नहीं हो। हम आज़ाद हैं, हम निडर हैं और हम बराबर हैं।

मुझे लग रहा है कि मेरा उत्थान हो गया है, मुझे अब साफ़ महसूस हो रहा है, मुझे लग रहा है कि मुझे बचा लिया गया है। उस पुराने खालीपन ने मुझे निगल लिया था, उनके सारे रंगों ने मुझे अँधा कर दिया था, मैं उनके मिथकों और देवताओं के शोरगुल में खो गया था। मैं आज़ाद हूँ और मैंने उस नीले आकाश के नीचे एक नया जन्म लिया है जिसमें अम्बेडकर नाम का सूरज चमकता है। अब मैं मेरे उन लोगों को खींच कर बाहर ले आऊंगा जो अब भी उनके मालिकों के बनाए उसी गहरे, काले अंतहीन गर्त में फंसे हैं, और इस गर्त के बाहर नीली आभा में उनका स्वागत करूँगा। मेरी आँखों में अब भी एक लाली मौजूद है, और बदला अभी बाकी है। हालाँकि यह नीला रंग इस काले रंग को हटा कर फेंक सकता है, लेकिन लाल की एक बूंद के साथ सब चीजें बेहतर लगती हैं।

जय भीम।

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