कैसे अब भी उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में कायम है दलितों के साथ छुआछूत की परंपरा

Posted on August 2, 2016 in Specials

सिद्धार्थ भट्ट:

हाल ही में गुजरात के ऊना शहर में कुछ दलित युवकों को मरी हुई गाय की खाल उतारने के लिए, तथाकथित गौरक्षकों द्वारा बेरहमी से अधनंगा कर मारने का एक विडियो सामने आया। इस विडियो के बाद देशभर में दलितों पर होने वाले अत्याचारों और भेदभाव पर एक तीखी बहस छिड़ गयी है। इस विडियो को देखने से एक बात तो साफ़ हो जाती है कि गौरक्षा के नाम पर कुछ विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में ऐसी काफी सारी घटनाएं सामने आयी हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Union Ministry of Social Justice and Empowerment) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में  2013  के मुकाबले  दलितों पर होने वाले अत्याचार के अधिकारिक रूप से दर्ज हुए मामलों में 19% की बढौतरी हुई और आदिवासियों के मामले में यह आकड़ा 68% का है। इन ‘सरकारी आंकड़ों’ से पता चलता है कि तमाम कानूनों के बाद अब भी भारत में जाति व्यवस्था और जातिगत भेदभाव चिंताजनक रूप से मौजूद है। खबर लहरिया का यह विडियो बांदा जिले में चमड़े का काम करने वाले दलित समुदाय के लोगों के अनुभवों को और  जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव के एक और पहलू को सामने लेकर आता है।

Video Courtesy : Khabar Lahariya.

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