अगरतला में दो समुदायों के बीच झड़पों में 20 लोग हुए घायल, शहर में तनाव के बाद लगा कर्फ्यू

Posted on August 24, 2016 in Hindi, News

सिद्धार्थ भट्ट:

उत्तरपूर्व के राज्य त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में मंगलवार 23 अगस्त को इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा (आइ.पी.एफ.टी.)  के समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़पों में करीब 20 लोग घायल हो गए। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार आइ.पी.एफ.टी. और राज्य के सत्ताधारी वामपंथी (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) के बीच पिछले काफी समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी। पुलिस के अनुसार इसी तनाव के कारण दोनों दलों के लोगों के बीच हिंसक झड़पें हुई।

सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.एम.) नें, इस घटना के लिए भाजपा और आइ.पी.एफ.टी. को जिम्मेदार ठहराया और आइ.पी.एफ.टी. तथा भाजपा के खिलाफ कारवाही की मांग की। इस घटनाक्रम की शुरुवात आइ.पी.एफ.टी. के अगरतला के अस्तबल मैदान में आयोजित एक रैली से हुई, जहाँ पार्टी प्रमुख एन.सी. देबबर्मा ने “मूलनिवासी आदिवासियों के लिए अलग देश की मांग” पर बने रहने की बात कही।

पुलिस के अनुसार अगरतला में रैली के दौरान वहां से गुजर रही एक महिला और उसके बच्चे के साथ मार-पीट किये जाने के बाद हिंसा शुरू हुई। कांग्रेस भवन के पास दो बंगाली युवाओं के साथ भी आइ.पी.एफ.टी. के कार्यकर्ताओं नें मार-पीट की, वहीं एक और घटना में स्कूटर पर जा रहे दो व्यक्तियों के साथ सूर्य चोमुहानी इलाके में मारपीट किये जाने के बाद स्कूटर में आग लगा दी गयी।

इन घटनाओं के बाद लेफ्ट के कार्यकर्ता भी हिंसक हो गए और अगरतला के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं दर्ज की गयी।

यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरपूर्वी राज्य त्रिपुरा बांग्लादेश के साथ काफी बड़ी सीमा साझा करता है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में क्षेत्र के मूल आदिवासी समुदाय (त्रिपुरी) के लोगों की संख्या, कुल जनसँख्या का करीब 32% है। 1901 की जनगणना में यह आंकड़ा 50% से भी अधिक था। आजादी और विभाजन के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारी संख्या में बंगाली हिन्दू त्रिपुरा में विस्थापित हुए। यहीं से स्थानीय त्रिपुरी आदिवासियों और बंगाली हिन्दुओं के बीच तनाव की शुरुवात हुई।

मंगलवार 23 अगस्त हुई हिंसा की इस घटना के बाद अगरतला में किसी भी तरह की अन्य हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है, और बड़ी संख्या में त्रिपुरा स्टेट रायफल्स और पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए हैं।

वर्तमान में राजधानी अगरतला में करीब 96% आबादी बंगाली समुदाय की है। भारत के इस तीसरे सबसे छोटे राज्य में पिछले कुछ वर्षों से हिंसा के लम्बे दौर के बाद शांति बनी हुई थी। 70 के दशक से त्रिपुरा राज्य में हिंसक घटनाओं की शुरूवात हुई, जो 80 के दशक में चरम पर पहुँच चुकी थी। 8 जून 1980 को अगरतला के पास मंडई गाँव में अलगाववादियों ने अधिकारिक रूप से करीब 255 बंगाली हिन्दुओं की हत्या कर दी। 1990 से 1994 के बीच राज्य में उग्रवाद में थोड़ा कमी आई, लेकिन फिर अगले 10 सालों तक राज्य में हिंसा चरम पर रही। 2004 के बाद से राज्य में शान्ति का माहौल बनने लगा। सन 2011 में उग्रवाद के कारण केवल एक ही मौत दर्ज की गयी, वहीं 2010 में यह आंकड़ा तीन और 2000 में 514 का था।

मंगलवार 23 अगस्त हुई हिंसा की इस घटना के बाद अगरतला में किसी भी तरह की अन्य हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है, और बड़ी संख्या में त्रिपुरा स्टेट रायफल्स और पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए हैं।

 

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