7 साल बाद जिगीशा बोस के 2 हत्यारों को दिल्ली सेशन कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा, 1 को उम्रकैद

Posted on August 23, 2016 in Hindi, News

सिद्धार्थ भट्ट:

Jigisha murder verdict Website - Thumbnailइंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार सोमवार 22 अगस्त को दिल्ली के एक सेशन कोर्ट नें सन 2009 में एक आइ.टी. कंपनी की कर्मचारी जिगीशा बोस के अपहरण और हत्या के केस के आरोपी तीन लोगों में से दो को मौत की और एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

18 मार्च 2009 की सुबह चार बजे तीन लोगों नें जिगीशा का वसंत विहार से तब अपहरण कर लिया जब वो अपनी शिफ्ट से घर वापस लौट रही थी। पुलिस ने 20 मार्च को सूरजकुंड के पास से जिगीशा की लाश बरामद की। 23 मार्च को इस क़त्ल के सिलसिले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों द्वारा जिगीशा के डेबिट कार्ड का प्रयोग किए जाने की बाद सी.सी.टी.वी. फुटेज की मदद से पुलिस आरोपियों को पकड़ने में कामयाब रही।

दिल्ली सेशन कोर्ट नें अपने फैसले में इसे “अमानवीय अपराध” करार देते हुए, हालिया समय में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताई, और आरोपियों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी बरतने से समाज को गलत सन्देश जाने की बात कही। कोर्ट नें कहा कि, “किसी भी तरह का मुआवजा जिगीशा के माता-पिता को हुए नुकसान और उनकी तकलीफ की भरपाई नहीं कर सकता” हालांकि कोर्ट ने सांकेतिक रूप में उन्हें 600000/- रूपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। पुलिस द्वारा इस मामले में पकड़े गए तीन आरोपियों में से रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत के सजा सुनाई और बलजीत मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी।

यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि जिगीशा की हत्या के इन तीनों आरोपियों पर, सितम्बर 2008 में टी.वी. जर्नलिस्ट सौम्या विश्वनाथन की हत्या करने का भी आरोप है। सौम्या की 30 सितम्बर 2008 को काम से घर लौटते वक़्त गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। सौम्या की हत्या के मामले में दो और आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है।

इससे पहले दिल्ली के एक फास्टट्रैक कोर्ट नें ‘निर्भया’ केस के आरोपियों को भी 13 सितम्बर 2013 को मौत की सजा सुनाई थी। दिसंबर 2012 में चलती बस में घर लौट रही फिजियोथेरेपी की छात्रा ज्योति सिंह के 6 लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना ने पुरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस केस की सुनवाई में 13 सितम्बर 2013 को दिल्ली की एक फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट नें सभी 5 जीवित आरोपियों (एक आरोपी नें पुलिस की हिरासत में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी) में से 4 को मौत की सजा सुनाई। इनमे से एक आरोपी के अपराध के समय नाबालिग होने के कारण उसे बाल सुधार गृह में अधिकतम तीन साल की सजा सुनाई गयी। निचली अदालत के इस फैसले को 13 मार्च 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट नें भी बहाल रखा। लेकिन मार्च 2014 में ही दो आरोपियों को अगली अदालत में अपील करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी, जून 2014 में सामान कारणों से अन्य दो आरोपियों की मौत की सजा पर भी रोक लगा दी गयी। सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में अभी तक कोई फैसला नहीं आया है।

‘निर्भया’ काण्ड के तीन साल से भी अधिक समय के बाद, और इस केस में आए दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के करीब दो से ज्यादा सालों के बाद अभी तक आरोपियों को सजा नहीं मिली है। जिगीशा की हत्या होने के कुछ ही दिनों के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद भी कोर्ट का फैसला आने में सात साल से भी अधिक का समय लग गया। इसके खिलाफ भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है, ऐसे में जिगीशा को और पिछले सात सालों से कोर्ट की लम्बी प्रक्रिया से जूझ रहे उसके माता-पिता को कब न्याय मिल पाएगा, ये सबसे बड़ा सवाल है।

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