एम.पी. में टाइगर रिज़र्व को नुकसान पहुंचाने वाला, रिओ टिंटो का माइनिंग प्रोजेक्ट हुआ बंद

Posted on August 20, 2016 in Hindi, News

सिद्धार्थ भट्ट:

खनन(माइनिंग) की जानी मानी कंपनी रिओ टिंटो नें, मध्य प्रदेश में 2200 करोड़ रूपए के हीरों की खान के एक प्रोजेक्ट को बंद कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय द्वारा केन-बेतवा नदियों को जोड़ने का प्रोजेक्ट पूरा होने तक ज़मीन के नीचे खनन की संभावनाएं तलाशने के लिए कहे जाने के बाद, कंपनी नें शुक्रवार 19 अगस्त को इस प्रोजेक्ट को बंद करने का निर्णय लिया।

रिओ टिंटो एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए बयान के अनुआर, “शेयरधारकों की निधि (वैल्यू) को बढ़ाने के लिए लागत घटाने और अन्य प्रयास किए जाने के बाद, रिओ टिंटो ने भारत में बुंदैर प्रोजेक्ट को बंद करने का निर्णय लिया है। 2016 के अंत तक इसे पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।”

मध्य प्रदेश सरकार के लिए कंपनी का यह निर्णय एक निराशाजनक कदम है, क्यूंकि खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस प्रोजेक्ट के लिए जरुरी कानूनी मंजूरी के लिए प्रयासरत थे। इस हीरे की खान में खनन शुरू होने के बाद से करीब 2058 करोड़ रूपए की आमदनी का अनुमान लगाया गया था और रोयल्टी और टैक्स के रूप में राज्य सरकार को 208 करोड़ रुपए मिलने थे।

कंपनी के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर करीब 400 करोड़ रूपए लगाए जा चुके थे और प्रोजेक्ट साईट पर काम करने के लिए करीब 300 लोगों को लिया गया था। देश में पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे हीरों की खान के इस प्रोजेक्ट में, पन्ना टाइगर रिज़र्व और नवरदेहि वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के बीच के वाइल्डलाइफ कोरिडोर में पर्यावरण के नियमों को अनदेखा करने की बात सामने आई थी। नेशनल टाइगर कंज़रवेशन अथॉरिटी की जुलाई में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, “पन्ना क्षेत्र में बाघों की जनसँख्या और उनका फलना-फूलना, इस प्रोजेक्ट से प्रभावित होने की प्रबल संभावनाएं हैं।”

पर्यावरण मंत्रालय ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित 971 हेक्टेयर क्षेत्र में से केवल 76.43 हेक्टेयर के लिए ही स्वीकृति दी थी। राज्य सरकार को भेजे गए एक पत्र में पर्यावरण मंत्रालय ने जमीन के ऊपर खनन से बहुमूल्य वन सम्पदा के हमेशा के लिए नष्ट हो जाने की बात कही, और भूमिगत खनन की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस क्षेत्र में करीब 34.2 मिलियन कैरट हीरों का भण्डार होने की संभावना है। शिवराज सरकार ने 2010 में रिओ टिंटो कंपनी के साथ पहला करार किया था, और 2012 में 30 सालों के लिए कंपनी को यह क्षेत्र लीज़ पर देने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 2013 में यह प्रोजेक्ट ब्यूरो ऑफ़ माइंस से पास होने के बाद 2014 से वन विभाग से मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा में था।

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