“कोई भी कानून हिन्दुओं को अधिक बच्चे पैदा करने से नहीं रोकता”: मोहन भागवत

Posted on August 22, 2016 in Hindi, News

सिद्धार्थ भट्ट:

21 अगस्त को आगरा में हुए एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयमसेवक संघ (आर.एस.एस.) के सरसंघचालक मोहन भागवत नें, भारत में जनसंख्या वृद्धि पर एक पॉवर-पॉइंट प्रेजेंटेशन पेश की। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार भागवत आगरा में संघ के कुटुंब प्रबोधन कार्यक्रम द्वारा आयोजित युवा दंपत्ति सम्मलेन में करीब 2000 हिन्दू युवा जोड़ों को संबोधित कर रहे थे। ध्यान देने वाली बात है कि इसी वक़्त करीब 2 किलोमीटर दूर, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती, संघ प्रमुख भागवत के हिन्दुओं द्वारा अधिक बच्चे पैदा किये जाने को लेकर कही बातों की कड़ी आलोचना कर रही थी।

भागवत की इस प्रेजेंटेशन के अनुसार, जहाँ हिन्दू समुदाय की प्रजनन दर 2.1% है, वहीं “अन्य समुदायों” की प्रजनन दर 8% से भी अधिक है। इस सम्मलेन के अंत में यह निष्कर्ष निकला, कि अगर यह दर ऐसी ही बनी रही तो 2025 तक हिन्दू उनके ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे, और हिन्दुओं के अस्तित्व को ही खतरा हो सकता है।

एक तरफ मायावती की रैली में आए करीब एक लाख से भी ज्यादा लोगों में करीब 90% दलित और मुस्लिम थे, वहीं संघ के इस कार्यक्रम में शामिल लोगों में से अधिकाँश ऊंची जातियों से थे। मायावती की रैली में आए लोगों के पास दलितों का हिन्दू होना गुनाह है और ईविल्स ऑफ़ ब्रह्मिनिस्म जैसी किताबें थी, तो संघ के कार्यक्रम में हिन्दू धर्म का गुणगान करने वाली किताबें बेचीं जा रही थी।

शनिवार को भागवत ने आगरा में कहा था कि, “कोई भी कानून हिन्दुओं को अधिक बच्चे पैदा करने से नहीं रोकता।” यह कार्यक्रम संघ के पिछले साल अक्टूबर में समान जनसँख्या नीति के तहत शुरू किये गए कार्यकम, जिसे (मुस्लिम और इसाई समुदाय की बढती आबादी के कारण) “जनसँख्या के बिगड़ते संतुलन” पर नज़र रखने के लिए शुरू किया गया था, का ही एक हिस्सा था।

भगवत की इस प्रेजेंटेशन में दिखाया गया कि, फ़्रांस और रूस जैसे देशों में एक ख़ास (हरे झंडे के ऊपर चाँद और तारे से खुद को व्यक्त करने वाले) समुदाय के कारण वहां के मूल धर्म के लोग अल्पसंख्यक हो गए हैं। इसमें यह भी दिखाया गया कि, “यूरोप में 5 करोड़ मुस्लिम हैं और कुछ ही दशकों में यह एक मुस्लिम महाद्वीप बन जाएगा।“ प्रेजेंटेशन की इस स्लाइड के साथ लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की तस्वीर लगाई गयी थी। इस पेज की तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रही और इसकी “बिना आधार की जानकारी” के कारण काफी आलोचना भी की गई।

संघ के एक स्वयंसेवक ने युवा जोड़ों से देश और संकृति बचाने के लिए अधिक बच्चे पैदा करने की अपील की और उन्हें हिन्दू धर्म की मूल शिक्षाएं देने की बात कही। वहीं दूसरी तरफ इस कार्यक्रम में आई एक महिला ने भागवत से पूछा कि हिन्दुओं और मुस्लिमों के अधिक बच्चे पैदा करने से क्या जनसँख्या विस्फोट का खतरा नहीं है। इस महिला ने इसी कड़ी में आगे पूछा कि, “इन बच्चों के लिए खाना, रोजगार और अन्य बुनियादी जरूरतों का इंतजाम कौन करेगा?”

पिछले साल अक्टूबर में मोहन भागवत नें संघ के 90 साल पूरे होने के बाद विजयदशमी पर उनके सालाना संबोधन में, 2001 और 2011 की जनगणना का का हवाला देते हुए, मुस्लिमों की बढती आबादी पर अपनी “चिंता” जाहिर की थी। साथ ही उन्होंने देश की जनसँख्या में बढ़ते “असंतुलन” पर भी ध्यान दिए जाने की बात कही थी। हालांकि जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि 2001 और 2011 के बीच मुस्लिम समुदाय की जनसँख्या में 0.8% की ही वृद्धि हुई है, जो पिछले दशक के मुकाबले 1.73% कम है। भागवत पहले भी आरक्षण को लेकर उनके बयान और पूर्व में कई मौकों पर दिए गए उनके विवादस्पद बयानों को लेकर समय-समय पर चर्चा में रहे हैं।

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