ना पहने स्कर्ट और ना घूमें रात को अकेले- पर्यटन मंत्री की विदेशी पर्यटकों को सलाह

Posted on August 29, 2016 in Hindi, News, Society

सिद्धार्थ भट्ट:

केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा नें विदेशी महिला पर्यटकों को स्कर्ट ना पहनने और छोटे शहरों में देर रात को अकेले ना घूमने की सलाह दी। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार महेश शर्मा नें, पर्यटकों की सुरक्षा पर आगरा में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बात कही। इसी कड़ी में उन्होंने पत्रकरों को बताया कि विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एअरपोर्ट पर उन्हें एक बुकलेट दी जा रही है, जिसमें क्या करें और क्या ना करें जैसी चीजों का वर्णन किया गया है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 के मुकाबले 10.21% की बढ़त दर्ज की गयी। पिछले पांच सालों के आंकड़ों की बात की जाए तो इस संख्या में लगातार बढौतरी हो रही है। वहीं विदेशी पर्यटकों के खिलाफ होने वाले अपराधों की बात करें तो महिलाओं पर होने वाले हमले दूसरे और बलात्कार तीसरे सबसे अधिक होने वाले अपराध हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री जी का चिंतित होना लाजमी भी है। लेकिन अपराधियों को पकड़ने के और अपराध रोकने के कारगर तरीके खोजने की बजाए, क्या पहनना चहिये, और किस समय पर घूमना चाहिए जैसे सुझाव सामने आने के बाद महिलाओं के प्रति आम सोच एक बार फिर सामने आती है।

महिलाओं के प्रति इस तरह का नजरिया जिसे मोरल पोलिसिंग भी कहा जाता है, के कई किस्से समय-समय पर सुनने में आते रहते हैं। महिलाओं पर होने वाले हमले और यौन अपराधों को कपड़ों, खान-पान की आदतों और रोजमर्रा की कई चीजों से जोड़कर देखे जाने के किस्से भी आम हैं। कभी कहा जाता है कि जींस पहनने से बलात्कार होने की संभावना बढ़ जाती है, तो कभी चाउमिन खाने को इसका कारण बताया जाता है और तो और मोबाइल के प्रयोग को भी यौन हिंसा का कारण बता दिया जाता है। यह केवल विदेशी महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि किसी भी महिला की बात है।

नैतिकता यानि कि मोरालिटी के नाम पर महिलाओं पर बनी-बनाई सोच थोपे जाने के कई किस्से सामने आते रहे हैं। 2009 में श्री राम सेना के सदस्यों ने मेंगलोर के एक रेस्तरां पर हमला कर वहां मौजूद युवाओं के साथ मारपीट की क्यूंकि “महिलाओं को सार्वजानिक स्थानों पर शराब का सेवन नहीं करना चाहिये।“ कश्मीर में एक लड़कियों के म्यूजिक बैंड पर संस्कृति के नाम पर फतवा जारी कर दिया जाता है, टेनिस स्टार सानिया मिर्जा पर भी खेल की पोशाक को लेकर फतवा जारी किया जाता है, तो पश्चिम बंगाल के मालदा में मुस्लिम संगठनों के लड़कियों के फुटबॉल मैच पर ऐतराज़ होने के कारण उसे रद्द कर दिया जाता है। इस तरह के अनगिनत किस्से बड़ी आसानी से गिनाए जा सकते हैं।

एन.सी.आर.बी. की एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ होने वाले सबसे अधिक (36% से भी ज्यादा) अपराध पति और ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा किए जाते है।महिलाओं को “क्या नहीं करना चाहिए” यह बताने के बजाए, दोषियों और अपराधियों पर सख्त और जल्द कारवाही कर उदहारण प्रस्तुत किए जाने चाहिए। इंडियास्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार 2011, 2012, और 2013 में भारत में कोर्ट में चल रहे बलात्कार के मामलों में क्रमानुसार 26.4%, 24.2% और 27.1% मामलों में ही, अपराधी को सजा हो पायी। ऐसी स्थिति में कानून का सख्ती से पालन करने के साथ-साथ पुलिस और अन्य प्रशासनिक सेवाओं में काम करने वाले लोगों का भी इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील होना भी बेहद जरुरी है।                                                                      

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