दंतेवाड़ा में मुठभेड़ में मारे गए 3 नक्सलवादी, बस्तर में पुलिस पर झूठे एनकाउंटर का आरोप

Posted on August 18, 2016 in Hindi, News

सिद्धार्थ भट्ट:

शुक्रवार 12 अगस्त की सुबह छत्तीसगढ़ के दंतेवाडा जिले में पुलिस और नक्सलवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में 3 नक्सलवादी मारे गए। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मुठभेड़ के बाद एक नक्सलवादी जिसके ऊपर एक लाख रूपए का इनाम था, को गिरफ्तार कर लिया गया।

डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व ग्रुप (डी.आर.जी.), स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एस.टी.एफ.) और सी.आर.पी.एफ. की संयुक्त टीम के हथियारबंद नक्सलियों के साथ हुई इस मुठभेड़ में मारे गए तीन लोगों में से एक महिला भी थी। दंतेवाड़ा के एस.पी. कमलोचन कश्यप ने पी.टी.आइ. को बताया कि, यह मुठभेड़ शुक्रवार सुबह दंतेवाड़ा के कछेघाट के जंगलों में हुई, जब डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व फ़ोर्स की एक टीम नक्सलवादियों के खिलाफ अभियान चला रही थी। डी.आर.जी. की टीम ने जानकारी मिलने के बाद से ही दंतेवाड़ा-बीजापुर के 450 किलोमीटर के सीमावर्ती इलाके में नक्सलवादियों के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ था।

मृत नक्सलवादियों के पास से दो .303 रायफल, तीन .315 रायफल, एक .315 कट्टा (देसी तमंचा), एक 12 बोर का कट्टा, एक .303 मसकट गन, डेटोनेटर, हैण्ड ग्रेनेड और आइ.ई.डी. (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) पिन बरामद की गयी। पुलिस द्वारा इस इलाके की सघन तलाश जारी है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को पुलिस द्वारा बस्तर जिले की दर्भा तहसील के चंदामेटा इलाके में एक माओवादी को मुठभेड़ में मार गिराने पर संदेह जताया जा रहा है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि, छत्तीसगढ़-ओडिशा के सीमावर्ती गाँव चंदामेटा में इलाके के “जन मिलिशिया कमांडर” अर्जुन कश्यप की एक पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। हालांकि जगदलपुर लीगल ऐड ग्रुप के वकीलों ने कहा कि अर्जुन मई 2015 में गिरफ्तार होने के बाद दिसंबर से जमानत पर बाहर था, और जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष नियमित रूप से सुनवाई के लिए जा रहा था।

मंगलवार को एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि चंदामेटा गाँव में डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व ग्रुप और स्पेशल टास्क फ़ोर्स की एक संयुक्त टीम और माओवादियों के बीच हुई गोलीबारी के बाद उन्हें भागने पर मजबूर होना पड़ा। मुठभेड़ के बाद एक लाश बरामद की गयी, जिसकी पहचान “जन मिलिशिया कमांडर” अर्जुन कश्यप के रूप में हुई।

वहीं जगदलपुर लीगल ऐड ग्रुप के अनुसार अर्जुन को मई 2015 में पकड़ा गया और झूठे मामले में फंसाया गया था। उसके वकील ने कहा कि, “मई 2015 को वो अपने घर से पशु बेचने के लिए बाज़ार गया था अगले दिन वहां से लौटते हुए उसे पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने अर्जुन की उम्र 30 साल बताई है, लेकिन हम साबित कर चुके हैं कि उसकी उम्र केवल 17 साल की थी।“

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