35 दिनों से चल रहे कश्मीर तनाव में शुक्रवार को हुए 100 लोग घायल, पेलेट गन पर कोई रोक नहीं

Posted on August 13, 2016 in Hindi, News

सिद्धार्थ भट्ट:

हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वनी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी में पैदा हुई तनाव की स्थिति पिछले दो महीनों से बनी हुई है। जहाँ जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने विवादास्पद पैलेट गन के प्रयोग को जायज़ ठहराते हुए इसका प्रयोग केवल चरम स्थितियों में करने की बात कही, वहीं इस हफ्ते जुम्मे की नमाज़ के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में 100 से भी ज्यादा लोगों के घायल होने की ख़बरें आई हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की संभावनाओं को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हालात बेकाबू होने पर ही इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

सिंह ने कहा कि जिन युवाओं की मौतें हुई हैं, वो बेहद कम दूरी से पैलेट गन चलाए जाने के कारण हुई हैं। विरोध कर रहे लोगों के सुरक्षा बालों और पुलिस के बेहद करीब आ जाने और उग्र व हिंसक हो जाने की वजह से उन्हें भी पैलेट गन का इस्तेमाल करना पड़ता है। पैलेट गन का उपयोग 2008 और 2010 के हिंसक प्रदर्शनों के बाद एक सुरक्षित विकल्प के रूप में शुरू किया गया था। लेकिन अब इसके इस्तेमाल पर सभी जगह चर्चा हो रही है, तो हम भी अन्य विकल्प तलाशने की कोशिश करेंगे।

कश्मीर में शांति की प्रक्रिया पर बातचीत को लेकर उन्होंने कहा कि इस विषय पर पी.डी.पी. के साथ हुए गठबंधन के अजेंडे में यह बात पहले से ही कही गयी है, और उसी के अनुसार वाजिब कदम भी उठाए जाएंगे।

इंडियन एक्सप्रेस के एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर घाटी में इस शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद हुए प्रदर्शनों में करीब 100 लोग घायल हो गए। पुलिस के कर्फ्यू लगाए जाने के बाद भी घाटी में अलग-अलग जगह पथराव और प्रदर्शनों की 36 घटनाएं दर्ज की गयी हैं।

कश्मीर घाटी में प्रदर्शनकरिओं और पुलिस व सुरक्षाबलों के बीच सोपोर, लान्ग्टे, बेरवाह, बडगाम, पुलवामा, पट्टन, और अनंतनाग से झड़पों की खबरे आयी हैं।

अलगाववादी लीडरों के द्वारा शुक्रवार को पूरी घाटी में प्रदर्शनों का आवाहन किए जाने के बाद से ही प्रशासन ने बी.एस.एन.एल. को छोड़कर सभी मोबाइल सेवाओं पर रोक लगा दी थी। साथ ही निजी इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भी मंगलवार तक सेवाएँ बंद करने का निर्देश दिया गया था।

राजधानी श्रीनगर में जामिया मस्जिद में जुम्मे की नमाज नहीं हो पाई क्यूंकि वहां जाने के सभी रास्ते सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा सील कर दिए गए थे।

एक अन्य घटना में एक 55 साल की महिला की दिल का दौरा पड़ने से तब मौत हो गयी जब कथित रूप से एक सी.आर.पी.एफ. जवान ने उस पर बन्दूक तान दी। मृतक महिला जमीला के पति अब्दुल रशीद खान ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, उनके घर के बाहर सी.आर.पी.एफ. के कुछ जवान कुछ युवाओं का पीछा कर रहे थे। आवाजें सुनकर जब जमीला ने खिड़की से बाहर देखा तभी एक जवान ने बन्दूक जमीला के तरफ तान दी जिसे देखते कि जमीला वहीं पर बेहोश हो गयी। इसके बाद जब उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो उन्हें वहां मृत घोषित कर दिया गया।

सी.आर.पी.एफ के प्रवक्ता ने बताया कि जहाँ इस महिला की मौत हुई थी, उस क्षेत्र में पथराव हो रहा था। इस महिला की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है, उन्होंने कहा कि, “अब लोगों के लिए सी.आरपी.एफ. को हर चीज के लिए जिम्मेदार ठेहराया जाना फैशन बनता जा रहा है।”

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