बिहार भारत का अंग है काट्जू साहब, साबुन-शैम्पू का कॉम्बो ऑफर नहीं कि किसी को मुफ्त दे दें

Posted on September 29, 2016 in Hindi, Society

दीपक भास्कर:

हम भारत के उस समय में रह रहे हैं, जो जुमलों और मज़ाक का दौर है। एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री के वादे, महज़ जुमले बना दिए जाते हैं तो दूसरी तरफ कोई मार्कंडेय काटजू मज़ाक पर मज़ाक कर जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के पूर्व-अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि, “पाकिस्तान के लिए ऑफर है, उसे अगर कश्मीर चाहिए तो बिहार भी साथ लेना होगा।” फज़ीहत होने के बाद, उन्होंने इसे मज़ाक कह दिया। बहरहाल, ये कौन लोग हैं जो मज़ाक-मज़ाक में इस देश के एक राज्य को दूसरे देश को गिफ्ट कर देते हैं।

क्या आपने कभी मज़ाक-मज़ाक में देश का कोई राज्य दूसरे देश को गिफ्ट किया है? मार्कंडेय काटजू जैसे लोग वो लोग हैं जो डायनिंग टेबल पर बैठकर प्रतिदिन इस देश का नया नक्शा तैयार करते हैं। ये नक़्शे ज़मीन के टुकड़े भर होते हैं और उसमे लोग कहीं भी नहीं होते। हम लोग तो बस सरकार चुनते हैं वो भी मात्र पांच साल के लिए, लेकिन इस देश का सभ्रांत वर्ग (जिसे अंग्रेज़ी में एलीट क्लास कहते हैं) तो देश को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं। ये वो लोग हैं जिनके बच्चे, अगर इनके दिए हुए गिफ्ट से खुश नहीं हों तो ये उन्हें भारत के एक-दो राज्य गिफ्ट देकर खुश कर सकते हैं। हम सब ‘अबकी बार ये सरकार’ और ‘अगली बार वो सरकार’ चुनकर खुश हो जाते हैं, लेकिन असली सत्ता तो इन्हीं के पास होती है।

मार्कंडेय काटजू को शायद यह समझ नहीं आता कि बिहार, भारत का एक राज्य भर नहीं बल्कि भारत का इतिहास, वर्तमान और भविष्य भी है। अगर बिहार पाकिस्तान को गिफ्ट करेंगे तो फिर उस स्वर्णिम इतिहास का क्या होगा जिसके नाम पर ये देश इतराता है। बिहार अगर पाकिस्तान में जाएगा तो महावीर, महात्मा बुद्ध, चाणक्य, सम्राट चन्द्रगुप्त, चक्रवर्ती अशोक, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, गुरु गोविन्द सिंह, चंपारण, जयप्रकाश नारायण, रामशरण शर्मा, रामधारी सिंह दिनकर और भी कई अनगिनत नाम उनका क्या होगा। पाकिस्तान या फिर किसी भी देश के लिए इससे बेहतर ऑफर नहीं हो सकता, जिसमें उसे पूरी की पूरी सांस्कृतिक विरासत मुफ्त में मिल जाए। आज भी अगर दुनिया भर में हमें बुद्ध या आर्यभट्ट जैसे बिहारियों का नाम लेना ही पड़ता है तो काटजू साहब! बिहार पाकिस्तान को देंगे तो ज़ीरो का सिद्धांत भी देना पड़ेगा।

मार्कंडेय काटजू को शायद यह समझ नहीं आता कि बिहार भारत का वर्तमान है। बिहार के कर्मठ लोगों का भारतीय अर्थव्यवस्था को चलने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बिहार के मज़दूरों की वजह से ही हरित क्रांति का सपना पूरा हो पाया। भारत आज अगर कहीं भी चमक रहा है तो उसमें बिहारियों का अहम योगदान रहा है। लेकिन इस देश के एलीट लोगों की समस्या यह है कि इन्हें अपने ही ड्राईवर के शरीर से दुर्गन्ध आती है। आज भारत में किसी भी क्षेत्र में बिहारी अपना परचम लहरा रहे हैं। आई.टी. सेक्टर से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में बिहार का दबदबा कायम है। बिहार के युवा सीमित संसाधनों के बावजूद, कड़ी मेहनत कर देश में अपनी जगह बना रहे हैं। काटजू को असली समस्या मेहनतकश लोगों से है।

मार्कंडेय काटजू को शायद यह समझ नहीं आता है कि, बिहार भारत का भविष्य भी है। अगर किसी मिट्टी ने भारत का स्वर्णिम समय देखा है तो वो बिहार है। बिहारी, भारत के उसी स्वर्णिम भविष्य की कल्पना लिए जी रहे हैं, कठिन परिश्रम कर रहे हैं। भारत को फिर से वही स्वर्णिम दौर देना चाहते हैं, जिसे हर भारतीय सिर्फ कहानी में नहीं सुनना चाहता है। जब भी भारत अपने मूल्यों से भटका है, तब बिहार ने उसका उचित मार्ग प्रशस्त किया है। लेकिन काटजू जैसे लोग सिर्फ अपना भविष्य सोचते हैं, उनके दिमाग में जनता होती ही नहीं है।

बहरहाल, काटजू के सारे पोस्ट को पढ़ा जाए तो साफ पता चलता है कि वो मज़ाक नहीं बल्कि मज़ा ले रहे हैं। काटजू की बिहार के प्रति सोच कतई अच्छी नहीं दिखती, अब समझिये कि किस तरह के लोग हमारी न्याय व्यवस्था में हैं। अगर हमारी तथाकथित तौर पर पवित्र न्यायपालिका में ऐसे लोग होते हैं तो ज़ाहिर है कि न्यायपालिका में अब जज किसी नेता को होना चाहिए। काटजू उसी मेरिटवाद का नतीजा है जिसकी आड़ में न्यायपालिका में आरक्षण नहीं रखा गया। काटजू को असली समस्या सामाजिक न्याय से है। बिहार ने सामाजिक न्याय का झंडा बुलंद किया है और ऐसे लोग पिछड़े-दलितों को शासन में देखना हीं नहीं चाहते। काटजू अपने ज़माने के टॉपर हैं तो इनको पोलिटिकल साइंस की कितनी समझ है वो भी जनता को दिख रहा है।

काटजू को कश्मीर में ट्यूलिप फ्लावर दिखता है और बिहार को कश्मीर में रहने वाले लोग दिखते हैं। इनका क्या है कश्मीर पाकिस्तान में हो या चीन में, फ्लावर तो इम्पोर्ट हो जाएगा। लेकिन बिहार के लोग ये समझते हैं की ट्यूलिप फ्लावर इम्पोर्ट हो सकता है परन्तु लोग इम्पोर्ट नहीं किये जाते। यह बात सही है कि बिहार की अपनी समस्याएं हैं, लेकिन फिर भी बिहार संसाधनों से परिपूर्ण नहीं होने के बावजूद पिछले दशक से इस देश का सबसे तेज गति से तरक्की करने वाला राज्य है। कई विद्वान मानते हैं कि अगर बिहार ग़रीब रहा तो भारत अग्रणी देशों में स्थान नहीं बना पायेगा। वह इसीलिए भी है क्योंकि बिहार भारत की नींव है।

काटजू साहब! बिहार अगर पाकिस्तान को दे देंगे तो पाकिस्तान देश होगा भारत नहीं। खैर! उन्हें अपनी अज्ञानता दूर करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर में पड़ी ईंटो को छूना चाहिए ताकि उनकी अज्ञानता दूर हो सके। अगर नहीं तो काटजू को सब छोड़, एक किराना की दुकान खोलनी चाहिए और लक्स साबुन के साथ शैम्पू का कॉम्बो ऑफर बेचना चाहिए। बहरहाल! जब आपको कहीं जगह न मिले तो आप बिहार आइये हमारे साथ खेतों में काम कीजिये। कहते हैं, मेहनत करने से मन पवित्र हो जाता है। वैसे! काटजू का बयान महज़ बयान नहीं बल्कि इस देश के एलीट वर्ग की स्वाभाविक सोच है।

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