पुलिसिया और सरकारी दमन के बाद भी प्रिकॉल रुद्रपुर के मज़दूरों का संघर्ष जारी

Posted on September 26, 2016 in Hindi, News

नागरिक ‘अधिकारों को समर्पित’:

रुद्रपुर में प्रिकॉल लि. के मजदूरों का संघर्ष जारी है। पुलिस द्वारा अनशनकारियों सहित बाकी मजदूरों पर भयंकर लाठीचार्ज करने, महिलाओं के कपड़े फाड़ने व बदतमीजी करने के बावजूद संघर्षरत मजदूरों के हौंसले टूटे नहीं। दमन के बाद भी मजदूर पुनः संघर्ष को तेज करने की राह पर हैं।

ज्ञात रहे कि प्रिकॉल के 150 ठेका मजदूरों की जो 7-8 सालों से कम्पनी में मशीनों पर काम कर रहे थे, 8 अगस्त को कम्पनी द्वारा गेटबंदी कर दी गयी। ये मजदूर सहायक श्रमायुक्त (असिस्टेंट लेबर कमिश्नर या ए.एल.सी.)  कार्यालय रुद्रपुर में धरना दे रहे थे। संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में ट्रेनी के 14 मजदूर भी 12 अगस्त से बाहर आ गये थे।

मजदूरों ने 1 सितम्बर से आमरण अनशन शुरू किया जिसमें 4 महिला मजदूर और 3 पुरुष मजदूर बैठे व 6 सितम्बर को ए.एल.सी. कार्यालय पर जन महासम्मेलन करने की घोषणा की और एक पर्चा निकाला गया। सिडकुल पंतनगर में यह पहली घटना थी जिसमें महिला मजदूर अपनी कार्यबहाली के लिए आमरण अनशन पर बैठीं। मजदूरों के संघर्ष का सिडकुल की अनेक ट्रेड यूनियनों/संगठनों ने समर्थन किया। संघर्षरत मजदूरों को आर्थिक रूप से व राशन आदि से व कम्पनियों के मजदूरों ने शिफ्ट के हिसाब से अनशन स्थल पर पहुंच कर समर्थन दिया।

4 सितम्बर को एस.डी.एम., सी.ओ. रुद्रपुर आदि पुलिस बल लेकर दोपहर में अनशनकारियों को उठाने आये तो प्रिकॉल के मजदूरों के अलावा अन्य कम्पनियों के मजदूरों द्वारा भारी विरोध किया गया। पुलिस को बैरंग लौटना पड़ा। दमन की सम्भावना देखकर यूनियनों द्वारा रात्रि में भी अपनी कम्पनियों के कुछ मजदूरों को अनशन स्थल पर रुकने का वादा किया गया। 4 सितम्बर की रात्रि में पुलिस बार-बार मौका देखती रही, लेकिन रात्रि में प्रिकॉल के अलावा अन्य कम्पनियों के भी काफी मजदूरों की मौजूदगी के कारण पुलिस कुछ नहीं कर पायी।

5 सितम्बर को प्रातः जब बाकी कम्पनियों व प्रिकॉल के मजदूर फ्रेश होने गये थे तब करीब 7:30 बजे एस.डी.एम., सी.ओ. रुद्रपुर भारी पुलिस-पी.ए.सी. फोर्स लेकर अनशनकारियों को जबरन उठाये आये। अनशनकारियों द्वारा विरोध करने पर पुलिस द्वारा अनशनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया गया। बचाने गये मजदूरों पर भयंकर लाठीचार्ज किया गया। एस.डी.एम. व सी.ओ. द्वारा महिला मजदूरों को बाल पकड़कर घसीटा गया, महिलाओं के कपड़े फाड़े गये। कुछ मजदूरों ने इसकी वीडियोग्राफी करने का प्रयास किया तो पुलिस द्वारा मोबाइल छीन लिए गये व वीडियो और फोटो मिटाने के बाद मोबाइल फोन तोड़ दिये।

पुलिस 7 अनशनकारियों में से 5 को (3 लड़कियों व 2 लड़कों) व एक काफी घायल लड़की सहित कुल 6 मजदूरों को अस्पताल ले गयी और 23 मजदूर (13 लड़कियों व 10 लड़कों) को पुलिस लाइन में ले गयी, जिन्हें शाम को निजी मुचलके पर छोड़ा गया। अस्पताल ले जाए गये 6 मजदूरों को पुलिस द्वारा अस्पताल में भी लाठियों से पीटा गया। मजदूर फिर भी डटे रहे तब पुलिस व प्रशासन द्वारा 5 अनशनकारियों व एक महिला मजदूर को तुरंत हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रैफर कर दिया।

पुलिस प्रशासन द्वारा अनशनकारियों पर लाठीचार्ज और महिलाओं के कपड़े फटने की घटना से सिडकुल की अन्य यूनियनों में भी आक्रोश फैला, उनके प्रतिनिधि अस्पताल पहुंचने लगे। रुद्रपुर जिला अस्पताल में घायल अनशनकारियों से मिलने गये इंकलाबी मजदूर केन्द्र (इमके) के अध्यक्ष कैलाश भट्ट को पुलिस द्वारा मजदूरों के बीच से हटाकर वहीं एस.डी.एम, सीओ और ए.एस.पी. के सम्मुख पेश किया गया, जहां उन्हें धमकाने का काम सिडकुल चौकी इंचार्ज करता रहा। कैलाश भट्ट ने अधिकारियों के सामने काफी स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखी  व किसी भी तरह से डर-भय में न आने पर उन्हें आधे घंटे बाद बाहर आने दिया गया।

अनशन स्थल पर 2 अनशनकारी मजदूर जो पहले से ही अनशन पर थे और प्रातः लाठीचार्ज की घटना पर इधर-उधर हो गये थे पुनः बैठे, साथ ही 3 और नये मजदूर अनशन पर बैठ गये। मजदूरों ने इस घटना के लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया व एस.डी.एम., सी.ओ. रुद्रपुर और चौकी इंचार्ज सिडकुल की बर्खास्तगी की मांग की। अनशन स्थल पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को पुलिस दमन के कुछ वीडिया सौंपे गए। मजदूरों के बीच पहुंचे कांग्रेस के छुटभैय्यै नेताओं को मजदूरों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। मजदूरों ने कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद, उत्तराखण्ड सरकार मुर्दाबाद, हरीश रावत मुर्दाबाद के नारों से कांग्रेसी नेताओं का स्वागत किया तो छुटभैय्यै नेता वहां से खिसक गये। सिडकुल की ट्रेड यूनियनों द्वारा शाम को पुलिसिया दमन के खिलाफ उत्तराखण्ड सरकार की शवयात्रा निकालने की योजना बनाई गयी।

रुद्रपुर पुलिस-प्रशासन अनशनकारियों पर लाठीचार्ज व महिलाओं के कपड़े फाड़ने की घटना से बैकफुट में आ गया था। शाम को ही ए.एल.सी. कार्यालय में प्रिकॉल प्रबंधन को त्रिपक्षीय वार्ता हेतु बुलाया गया। इस वार्ता में इंटक (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) के नेता भी गये। वहां पर इंटक नेताओं द्वारा प्रशासन के समक्ष किसी भी तरह मजदूरों की तुरंत कार्यबहाली का दबाव नहीं बनाया गया। उल्टा दबाव में आ चुका प्रशासन, प्रिकॉल प्रबंधन को 2 और दिन का समय देकर आ गया और बाहर आकर मजदूरों को किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन करने से मना किया गया। इंटक नेताओं की बात सुन कुछ ट्रेड यूनियनों के मजदूरों में निराशा फैली और वे चले गये। इंकलाबी मजदूर केन्द्र (इमके) ने उत्तराखण्ड सरकार, रुद्रपुर पुलिस और डी.एम. की शवयात्रा के तय कार्यक्रम करने की वकालत की और ए.एल.सी. कार्यालय से नैनीताल रोड़ तक जुलूस निकालकर मजदूरों ने शवयात्रा आयोजित की।

5 सितम्बर को प्रिकॉल के संघर्षरत मजदूरों के दमन के विरोध में विभिन्न स्थानों पर मजदूर संगठनों ने अपना तीखा विरोध प्रकट किया। उत्तराखण्ड के हरिद्वार व काशीपुर में इंकलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा उत्तराखण्ड सरकार का पुतला फूंका गया। दिल्ली में विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्तराखण्ड भवन पर पहुंचकर इस घटना पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रिकॉल मजदूरों के बर्बर दमन के आरोपी पुलिस अधिकारियों को दंडित करने, प्रिकॉल मजदूरों की सभी मांगों को स्वीकार करने की मांग के साथ एक ज्ञापन रेजीडेण्ट कमिश्नर के मार्फत मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को प्रेषित किया।

6 सितम्बर को पूर्व में तय जन महासम्मेलन में कई यूनियनों के शिफ्ट के मजदूर पहुंचे। प्रिकॉल के मजदूरों की मांग के साथ-साथ पुलिसिया दमन के खिलाफ भी मजदूरों ने आक्रोश व्यक्त किया और सभा के पश्चात रुद्रपुर शहर में जुलूस निकाला। 6 सितम्बर को ही एक महिला मजदूर ने अनशन पर बैठने की घोषणा की। अस्पताल में भर्ती अनशनकारियों का अनशन भी जारी था। अब कुल 11 लोग आमरण अनशन पर थे। इस महासम्मेलन में थाई सुमित नील ऑटो, व्हेरॉक, राने मद्रास, डेल्फी टी.वी.एस., टाटा स्टील, टाटा ऑटोकाम आदि के यूनियनों के प्रतिनिधियों व इंकलाबी मजदूर केन्द्र, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, मजदूर सहयोग केन्द्र आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने भागीदारी की।

7 सितम्बर की देर शाम को जिला प्रशासन की मध्यस्थता में प्रिकॉल लि. प्रबंधन-मजदूरों का समझौता हुआ। सुबह से कई चक्रों की वार्ता में कंपनी प्रबंधन मजदूरों की कार्यबहाली से इंकार करता रहा। पहले दौर की वार्ताओं में इमके अध्यक्ष कैलाश भट्ट भी गये जिससे एस.डी.एम. महोदया और ए.एल.सी. महोदय से इनकी काफी तीखी बहस हुई इसके बाद प्रशासन ने उनको वार्ता में नहीं बैठने दिया। प्रशासन औरकंपनी प्रबंधन की स्थिति देख सिडकुल की कई यूनियनों ने तत्काल मीटिंग की जिसमें प्रिकॉल का समझौता नहीं होने की दशा में पूरे सिडकुल में एक दिवसीय हड़ताल करने की योजना बनाई गयी। तभी प्रशासन ने वार्ता हेतु पुनः मजदूरों को बुलाया। इस वार्ता में प्रिकॉल के मजदूरों के अलावा ए.एल.सी., एस.डी.एम., प्रिकॉल प्रबंधक, ठेकेदार, इंटक जिलाध्यक्ष जनार्दन सिंह और एक कांग्रेसी नेता डी.के.सिंह बैठे।

प्रशासन ने वार्ता में ट्रेनी मजदूरों के साथ मैनेजमेण्ट का अलग से समझौता कराया कि उन्हें जल्द कन्फर्मेशन लेटर दिया जायेगा, सभी मजदूरों की कार्यबहाली की गयी तो ठेके मजदूरों का ठेकेदार के साथ समझौता कराया गया। जबकि पूर्व में ए.एल.सी. की रिपोर्ट कि कम्पनी में गैरकानूनी तरीके से ठेका मजदूरों से मशीनों से काम कराया जा रहा है पर ठेकेदार के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति भेजी जा चुकी थी। फिर भी प्रशासन और बीच के प्रबंधकों ने मजदूरों का समझौता ठेकेदार के साथ करवा कर मैनेजमेण्ट और प्रशासन का साथ दिया। और मजदूरों के साथ वार्ता में गये लोगों को बाहर सलाह-मशविरा करने भी नहीं आने दिया।

मजदूरों के हस्ताक्षर करने के साथ ही सभी प्रशासनिक अधिकारी व नेता, मजदूरों का अनशन तुड़वाने आ गये जबकि मजदूरों के वार्ताकार प्रतिनिधि अभी डी.एम. कोर्ट में ही थे। अनशन स्थल पर कांग्रेस पार्टी, हरीश रावत, ए.डी.एम., एस.डी.एम., ए.एल.सी., डी.के.सिंह, जनार्दन सिंह आदि के जिन्दाबाद के नारे लगाये गये। बगैर समझौता पत्र पढ़े या उसकी जानकारी दिये बिना मजदूरों का अनशन तुड़वा दिया गया। जब इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने इसकी आलोचना की तो सभी नेता व प्रशासनिक अधिकारी खिसक गये थे। उनका काम हो चुका था। समझौता, ठेकेदार व ठेका श्रमिकों के बीच हुआ था जिसमें 50 प्रतिशत मजदूरों की तत्काल बहाली और 50 प्रतिशत मजदूरों को 45 दिन बाद प्रत्यावेदन देने पर बहाली की बात कही गयी थी।

मजदूर पिछले 7-8 सालों से मशीनों पर काम कर रहे थे और ठेकेदार व प्रबंधकों की गैरकानूनी कृत्य पर ए.एल.सी. की रिपोर्ट लाइसेंस रद्द हेतु संस्तुति की जा चुकी थी। तब भी मध्यस्थता कर रहे दलाल नेताओं ने समझौते में मजदूरों को ठेका श्रमिक घोषित कर ठेकेदारी के तहत ही कार्यबहाली करायी थी। सभा में समझौता पढ़ने के बाद मजदूरों के बीच काफी आक्रोश रहा। मजदूर विरोधी फैसला होने के बावजूद मजदूरों ने धैर्य का परिचय दिया और अपने संगठन व एकता को ध्यान में रख इसको मानना तय किया।

50 प्रतिशत लोगों की तत्काल कार्यबहाली हेतु लिस्ट बनाने में मजदूरों ने तय किया कि सर्वप्रथम अनशनकारी मजदूर फिर सभी महिला साथी काम पर जायेंगे। तत्पश्चात ऐसे साथी जो सक्रिय रहे हैं और शादीशुदा हैं वे जायेंगे फिर बचे हुए सक्रिय साथी जायेंगे। सभी साथी जिनकी कार्यबहाली हो गयी है। वे अपने वेतन का एक हिस्सा संगठन के कोष में देगें जिन्हें बाहर रहे साथियों में वितरित किया जायेगा। एक महिला मजदूर साथी माधुरी ने कहा कि हमें लड़के-लड़की के हिसाब से नहीं बल्कि अपने मजबूत साथियों की कार्यबहाली पहले करानी चाहिए जो 45 दिन बाद बाकी लोगों की कार्यबहाली हेतु संघर्ष कर सकें। मजदूरों की अपने संगठन, साथियों के प्रति यह एहसास और एकता की बात प्रशासन और कंपनी प्रबन्धन के लिए मजदूरों की ओर से करारा जबाव था जो इस समझौते के बाद मजदूरों के बीच आपसी लड़ाई करवा कर उनकी एकता भंग करने की चाल चल रहे थे।

मजदूर विरोधी इस समझौते को भी प्रबंधक/ठेकेदार मानने से इंकार करने लगे। 8 सितम्बर को पुनः मजदूरों द्वारा एस.डी.एम., ए.एल.सी. का घेराव किया तो ठेकेदार 40 मजदूरों की लिस्ट लाया। इस लिस्ट में 15 मजदूर पहले से ही कम्पनी के भीतर कार्यरत थे व 25 मजदूर ऐसे थे जिन्हें 2-6 माह का ही समय हुआ था, ये मजदूर संघर्ष में एकदम पिछड़े मजदूर थे। बाकि 50 लोगों के लिए 9 सितम्बर को लेने की बात कही गयी व 25 मजदूरों को 9 सितम्बर को बुलाया जहां उन्हें एंट्री नहीं दी गयी। ठेकेदार इन मजदूरों को अपने आफिस ले गया और इन मजदूरों से 2 पत्रों पर हस्ताक्षर करने को कहा। एक में लिखा था कि इस कम्पनी पर मेरा कोई लेन-देन, बोनस आदि का बकाया नहीं है और मैं अपनी मर्जी से काम छोड़ रहा हूं और दूसरे पत्र में लिखा था कि तीन माह से छः माह के बीच कभी भी काम से निकाला जा सकता है। मजदूर इस पर कोई आपत्ति नहीं उठायेगा।

दो-तीन मजदूरों ने बगैर पढ़े हस्ताक्षर कर दिए। जब लड़कियों का नम्बर आया तो उन्होंने इसे पढ़ा और आपत्ति दर्ज की और सीधे ए.एल.सी. में धरना स्थल पर आ गयी। पुनः एस.डी.एम., ए.एल.सी. का घेराव किया। तब ठेकेदार ने कहा कि 30 लड़कियों को और बचे 45 लड़कों में से 23 मजदूरों की लिस्ट से व ठेकेदार की मर्जी से 22 मजदूरों की कार्यबहाली होगी। पहले सभी 150 मजदूरों की लिस्ट पर सभी पक्ष प्रशासन साइन करेगा। उनमें से 75 की कार्यबहाली होगी। ठेकेदार आधा घंटे में लिस्ट लाने की बात कर शाम छः बजे तक नहीं आया तो मजदूरों ने तय किया कि ये समझौता हमारे खिलाफ था लेकिन इसका उल्लंघन कम्पनी प्रबंधन व ठेकेदार ने किया है। लिहाजा हम इसे अब नहीं मानते। अब लड़ाई को पुनः तीव्र कर नया समझौता कराया जायेगा। अब सभी मजदूरों की एकसाथ कार्यबहाली होगी। ये मांग नहीं मानी गयी तो 12 सितम्बर से वित्त मंत्री उत्तराखण्ड सरकार इंदिरा हृदयेश के हल्द्वानी आवास पर अनशन पर बैठने का पत्र प्रशासन को सौंपा गया।

10 सितम्बर को ट्रेड यूनियनों की इस मुद्दे पर मीटिंग हुयी जिसमें समझौते के उल्लंघन हेतु प्रबंधक-प्रशासन की निंदा की गयी और संघर्ष आगे बढ़ाने का समर्थन किया गया। 11 सितम्बर को इंटक के जिला सम्मेलन में प्रिकॉल के मजदूर गये और उन्होंने सवाल उठाया लेकिन इंटक के प्रदेश अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट जो पूर्व श्रम मंत्री रहे हैं और वर्तमान में कांग्रेस के विधायक हैं, ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। 12 सितम्बर को हल्द्वानी आमरण अनशन का कार्यक्रम था। इससे पूर्व यूनियनों की मीटिंग में तय हुआ कि 12 सितम्बर को इंटक प्रदेश अध्यक्ष और इंटक के मजदूरों के साथ सिडकुल की समस्याओं पर एक दिवसीय धरना उप श्रमायुक्त कार्यालय हल्द्वानी में दिया जाएगा। पहले प्रिकॉल के मजदूर डी.एल.सी. चलेगें फिर वहां से बाकी लोगों को साथ लेकर वित्त मंत्री के पास चलेंगे। इस मीटिंग में कई सारे इंटक के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

12 सितम्बर को प्रिकॉल के मजदूर अपनी तैयारी के साथ हल्द्वानी बुद्ध पार्क में एकत्र हुए जहां पर इंटक के नेतृत्व में कई कम्पनी के मजदूर एकत्र थे। वहां से डी.एल.सी. कार्यालय तक जुलूस निकला गया। प्रिकॉल के मजदूर सीधे सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए नारेबाजी कर रहे थे। इंटक के नेताओं के लिए इससे दिक्कत होने लगी। डी.एल.सी. पर प्रिकॉल के समर्थन में वित्त मंत्री के यहां जाने की कोई बात नहीं की गयी और न ही प्रिकॉल के मजदूरों को मंच पर बुलाया गया। इंटक के सभी नेता किसी भी तरह प्रिकॉल के मजदूरों को वित्त मंत्री के आवास पर जाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। इंटक के प्रदेश अध्यक्ष ने मजदूरों से दो दिन का समय देने को कहा और वित्त मंत्री के आवास की ओर कूच नहीं करने की अपील की तो दूसरे अन्य नेताओं ने हल्द्वानी में सामान्य धरने पर बैठने पर गुंडा तत्वों द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का भय दिखाकर मजदूरों की हिम्मत तोड़ने का काम किया।

इंकलाबी मजदूर केन्द्र ने मजदूरों को समझाया की बगैर ठोस और उचित कार्यवाही किये मजदूरों का नया समझौता तो क्या पुराना समझौता भी कंपनी प्रबंधन लागू नहीं करेगा। मजदूरों को दो दिन का समय वित्त मंत्री को देना चाहिए और तब तक बुद्ध पार्क हल्द्वानी में लगातार धरना चलाना चाहिए। लेकिन मजदूर इंटक नेताओं की बातों से भय ग्रस्त हो गये और उन्होंने रुद्रपुर वापसी का निर्णय लिया और 13 तारीख को ए.एल.सी. रुद्रपुर में धरना स्थल पर आगे की रणनीति बनाने की बात तय की गयी।

13 तारीख को ए.एल.सी. कार्यालय में धरने पर वित्त मंत्री के पी.ए. का मजदूरों के पास फोन आया कि सभी मजदूर 14 तारीख को कम्पनी गेट पर जाएं अगर प्रबंधन नहीं लेता तो वे मेरे पास आएं। इस पर मजदूरों ने 14 तारीख को गेट पर जाना तय किया और अगर कार्यवाही नहीं होती तो 15 तारीख से ए.एल.सी. कार्यालय पर आमरण अनशन शुरु करने का फैसला लिया गया।

प्रिकॉल के मजदूरों ने बहादुरी से संघर्ष लड़ा है लेकिन मजदूर अभी भी किसी न किसी नेता के आश्वासन पर भरोसा कर ले रहे हैं, जबकि मजदूरों का दमन करने वाली सरकार कांग्रेस की, महिलाओं के कपड़े फाड़ने व बदतमीजी करने वाले लोग कांग्रेस सरकार और प्रशासन के, मजदूर विरोधी समझौता करवाने वाले दलाल नेता कांग्रेस के, इंटक खुद कांग्रेस का संगठन, प्रिकॉल का ठेकेदार कांग्रेस का प्रदेश सचिव है। इसके बाद भी मजदूर इंटक और कांग्रेस पार्टी के चक्कर में पड़े हैं। मजदूरों को अपनी ताकत का एहसास कर सिडकुल के मजदूरों पर भरोसा कर कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करना होगा। सरकार से सवाल करने होंगे और अपने ऊपर हुये दमन व उत्पीड़न का सवाल खड़ा करना होगा तभी मजदूर बेहतर समझौता करवा पाएंगे।

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