संदीप कुमार ‘सेक्स टेप’ पर घमासान- आपत्तिजनक क्या, सेक्स या सोच?

Posted on September 1, 2016 in Hindi, Politics

प्रशांत झा:

दो इंसान एक दूसरे की मर्ज़ी से सेक्स करते हैं, पता नहीं कहां और कैसे ये रिकॉर्ड होता है और जब सबके सामने आता है तो दोनो सेक्स नहीं कर रहे होते बल्कि ‘आपत्तिजनक हालत’ में पाए जाते हैं और अगर अंग्रेज़ी भाषा के हिसाब से कहें तो ‘compromising situation’ में पाए जाते हैं। लेख का टाईटल पढ़ने के बाद शायद ही आपको कोई संदेह हो कि हम बात कर रहे हैं AAP सरकार के पूर्व समाज कल्याण मंत्री संदीप कुमार के बारे में, जिनकी कथित ‘सेक्स टेप’ लीक होती है, मुख्यमंत्री उनके अनैतिक होने का ट्वीट करते हैं और आनन फानन में संदीप कुमार को पार्टी से बर्खास्त कर दिया जाता है।

ना सवाल होता है, ना जिनकी CD आती है उनसे पूछा जाता है, बस मंत्री जी को बर्खास्त कर दिया जाता है। CM सर ज़रा विस्तार से बताइए ना कि जब दो बालिग लोग अपनी मर्जी से सेक्स करते हैं तो उसमें आपत्तिजनक क्या हो जाता है?

क्या बात इसपे नहीं होनी चाहिए की AAP नेता संदीप कुमार की ये सेक्स टेप लीक कैसे हुई? और अगर उन्होंने ये अपनी मर्ज़ी से नहीं किया तो ये रिकॉर्ड किसने किया? ये समझ पाना भी बड़ा मुश्किल है कि दो लोगों की आपसी सहमती से बनाया गया संबंध अगर किसी तरह सार्वजनिक हो जाता है तो वो ‘सेक्स स्कैंडल’ में कैसे बदल जाता है।

दरअसल दस्तूर ये है कि सार्वजनिक जीवन में बने रहने वाले शख्स का इस देश में निजी जीवन शून्य हो जाता है। हालांकि अगर नग्नता ही आपत्तिजनक है तो क्या एक धर्मगुरु का नग्न होकर पूरे महिला वर्ग की स्वाधीनता और वजूद पर सवाल उठाना आपत्तिजनक नहीं?
छोड़िये कल्पना और नैतिकता से बाहर निकल कर इसी घटना वाले दिन रोज़मर्रा की सड़क पर आते हैं, माफ करिए दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे कैसे साहब बरसात जो है और बारिश में जो हमारी सड़कें हो जाती है वो आपत्तिजनक थोड़े ही है, घंटो जाम में फंस कर वक्त का बर्बाद हो जाना आपत्तिजनक थोड़े ही है, सड़क पर खुले में पेशाब करते लोगों को देखना आपत्तिजनक थोड़े ही है, आपत्तिजनक कुछ है तो बस ये कि किसी इंसान की निजी जिंदगी का सार्वजनिक हो जाना।

और केजरीवाल जी एक बात तो कमाल है ना जब सोमनाथ भारती पर उनकी पत्नी घरेलू हिंसा का आरोप लगाती है तो आप कहते हैं कि ये उनका निजी और घर का मामला है और जब एक इंसान के लिए शायद जो सबसे निजी हो सकता है वो सार्वजनिक हो जाता है तो वो इतना आपत्तिजनक हो जाता है कि पार्टी से बर्खास्त करने की नौबत आ जाती है।

बात ये भी है कि आखिर हम अपने समाज को कौन सी दिशा देना चाहते हैं? संदीप कुमार को पार्टी से हटाने के बजाए क्या उस आपत्तिजनक विडीयो को वेबसाइट्स से नहीं हटाना चाहिए? क्या हम पूरे प्रकरण से ये साबित करना चाहते हैं कि किसी के साथ शारिरिक संबंध बनाना भले ही गैरकानूनी ना हो लेकिन अनैतिक है और हम तो मॉरल पुलिसिंग करने में सबसे अव्वल देश हैं।

क्या संदीप कुमार की पत्नी ने इस विडीयो पर कोई आपत्ति जताई है या कानूनी कार्रवाई की बात की है? क्या जिन महिलाओं के साथ संदीप कथित सेक्स टेप में नज़र आए हैं वो शादी शुदा थीं अगर नहीं तो क्या उनपर IPC की धारा 497 के तहत एडलट्री के आरोप लगाए जा सकते हैं? क्या इस शारीरीक संबध के बाद संदीप कुमार ने राजनैतिक सहूलियत का वादा किया था? अगर हम इन बातों को नहीं जानते तो क्यों हम बिना फीस के वकील की तरह कानूनी सलाह जेब में लिए घूम रहे हैं?

क्या ऐसे मामलो में अपने विवेक पर नैतिक पट्टी चढ़ाकर हम वैसे ही जटिल समाज की रचना नहीं कर रहे हैं जिसकी मुखालफत हम साल के बाकी दिनों एक मंत्री, एक अखबार, एक न्यूज़ चैनल या एक बुद्धिजीवी हो कर करते हैं?

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