महिलाओं को देवी कहना और उनका शोषण करना इस देश का दोहरा चरित्र है

Posted on October 14, 2016 in Gender-Based Violence, Hindi

भावना मैठाणी:

आज हमारा देश तमाम तरह की समस्याओं से ग्रस्त है जैसे सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक समस्याएं, बेरोज़गारी, गरीबी, शिक्षा, पर्यावरण, आपदा, आतंकवाद, लैंगिक पक्षपात एवं हिंसा, किसान आत्महत्या और सूखा आदि। इन सबके बावजूद लैंगिक पक्षपात एवं महिला विरोधी हिंसा का मुद्दा हमारे दिमाग और मन पर गहरा असर डालता है, क्योंकि यह समस्या हमारे देश की आधी आबादी के साथ जुड़ी है। महिलाओं की विभिन्न समस्याओं में से सबसे ज्वलंत समस्या महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा है। यह एक ऐसी स्थिति है जो न केवल अनैतिक है बल्कि प्रत्येक सभ्य समाज के लिए चिंता और शर्म का विषय भी है।

महिला विरोधी हिंसा किसी एक समाज, समुदाय या वर्ग में नहीं बल्कि सभी प्रकार के वर्गों, जातियों, सम्प्रदायों में की जाती है। जिससे प्रश्न यह उठता है कि आखिर बार-बार सिर्फ महिलाओं को ही क्यों प्रताड़ित किया जाता है? “आखिर महिला क्यों?” इसके बहुत से उदाहरण देखने को मिलते कि समाज की किसी भी स्थिति में चाहे साम्प्रदायिक दंगे हों, चाहे जातिगत दंगे हों या फिर पुरुष किसी भी स्थिति को लेकर गुस्सा हो, उसका भुगतान महिलाओं को ही करना पड़ता है जिसके कुछ तथ्यात्मक उदाहरण इस प्रकार हैं:-

  • 11 जुलाई 2004 को मणिपुर इम्फाल के पूर्वी जिले के लैफराक मरिंग में 32 वर्षीय ठंगजम मनोरमा देवी को असम राइफल्स के जवानों ने उनके घर से उन्हें उठाया और बलात्कार करने के बाद उनकी हत्या कर दी।
  • छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की 36 वर्षीय स्कूल टीचर सोनी सोरी के साथ सलाखों के पीछे यौन हिंसा की गई तथा उससे कहीं अधिक बर्बर सलूक किया गया।
  • 20 अगस्त 2007 को आन्ध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के वाकापल्ली गांव में 11 कोंध आदिवासी महिलाओं के साथ ग्रेहाउंड जवानों ने बलात्कार किया।
  • सलवा जुडूम ऑपरेशन के दौरान 99 आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया।
  • 29 दिसम्बर 2006 को महाराष्ट्र के खैरलांजी में एक दलित महिला सुरेखा भोटमांगे और उनकी 17 वर्षीय बेटी को गांव के सवर्णों ने पूरे गांव में निर्वस्त्र कर घुमाने के बाद उनका सामूहिक बलात्कार किया और फिर उनके दो बेटों सहित उनकी हत्या कर दी गयी।
  • अभी हाल ही में हरियाणा जाट अंदोलन में भी महिला के साथ बलात्कार की खबरें सामने आई।

ऐसे कई उदाहरण हैं जहां महिलाओं को बर्बर हिंसा का सामना करना पड़ता है। ऊपर दिए गए उदाहरण तथा आज महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हुए अपराधों ने इस कथन को सिद्ध किया है।

इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? क्या महिला को समाज की सबसे कमज़ोर कड़ी समझा जाता है जो कि आसानी से ऐसी स्थिति में शिकार बनाई जा सकती है? या फिर उन्हें पुरुष अपने से अधीनस्थ समझ कर हिंसा करते हैं। जिस देश की सभ्यता एवं संस्कृति महिलाओं के सम्मान पर टिकी है, उसे सम्मान देने की बात करती है आदिकाल से आज तक जहां महिला शक्ति का अवतार समझी जाती है, अलग-अलग रूपों में पूजी जाती है, उसी देश में महिला हिंसा का शिकार होती है। उसी देश में बंटवारे से लेकर आज तक महिलाओं को ही हमले का केंद्र समझा गया है। क्या किसी ने इस पर कोई प्रश्न उठाने का प्रयास किया है “आखिर महिला ही क्यों?”

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