वो सच जो भारत और पाकिस्तान का मीडिया आपको नहीं दिखाता

Posted on October 19, 2016 in Hindi, Politics, Society

हरबंस सिंह:

बड़े शहर की आलिशान ईमारत में, शायद ये सवाल ज़रूर उठता होगा कि भारत में ग़रीबी है कहां? और लाज़मी भी है क्यूंकि शहर की चकाचौंध में हर कोई सच्चाई नहीं समझ सकता। मेरे साथ भी यही हुआ जब एक दोस्त ने कहा, “ कहां है ग़रीबी हमारे देश में, यहां तो वो लोग ग़रीब हैं जो काम नहीं करना चाहते।” मैं चुप हो गया, क्यूंकि मेरे पास इस विषय पर कुछ बुनियादी जानकारी ही नहीं थी। फिर मैंने गूगल की मदद ली। एक सर्वे के अनुसार 17-20 करोड़ लोग ऐसे हैं जो रोज़ के 100 रुपये या इससे कम कमाते हैं।

इसके बाद मन में एक ही ख़याल आया कि क्यूं इस सच्चाई का एक आम आदमी को पता नहीं चलता? और जो जवाब मुझे मिला उससे आप चकित रह जाएंगे, वो जवाब है ‘पाकिस्तान’। एक आम भारतीय की जानकारी का स्त्रोत ‘मीडिया’ ही है और टीवी न्यूज़ मीडिया इसमें प्रमुख है जिसे ‘पाकिस्तान’ से जुड़ी खबरें दिखने से फुर्सत नहीं  है। इसके बाद क्रिकेट, फिल्मों, राजनेता और उनकी राजनीती को जगह दी जाती है। मसलन किसी भी न्यूज़ चैनल के प्राइम टाइम पर रात को 9 से 10 बजे के बीच एक बार तो ‘पाकिस्तान’ का ज़िक्र होना तय है। कुछ ऐसे ही हालात पाकिस्तानी मीडिया के भी हैं, वहा भी अधिकांश चर्चाओं का विषय भारत ही होता है।

अब मीडिया की इस मानसिकता को समझने के लिए पहले दोनों देशों की आंतरिक स्थिति को समझना होगा। CIA वर्ल्ड फैक्टबुक  के हवाले से पाकिस्तान में बेरोज़गारी की बात करें तो 2015 तक पाकिस्तान की कुल आबादी में से 6.5% लोग बेरोज़गार थे। पाकिस्तान की 22.3% आबादी, ग़रीबी रेखा के नीचे बसर कर रही थी। 2015 के बजट के हिसाब से, पाकिस्तान का खर्चा उसकी आय से लगभग दोगुना है। 2014 के मुकाबले 2015 में पाकिस्तान के एक्सपोर्ट में कमी आयी है। 31 दिसम्बर 2015 तक पाकिस्तान पर 60.19 बिलियन डॉलर का कर्ज़ा था।

FBR के सर्वे के मुताबिक 1% से भी कम पाकिस्तानी नागरिक टैक्स अदा करते हैं। पाकिस्तान के आर्थिक हालात इस तरह से लड़खड़ाए हुये हैं कि उसे अपने सरकारी कर्मचारिओं को वेतन देने के लिए अपनी कई सरकारी इमारतों को गिरवी रखना पड़ा है। WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 31.6% बच्चों का वजन सामान्य से कम है, 4.5% बच्चों का कद सामान्य से कम है। 10.5% बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार हैं। इन सभी के बावजूद पाकिस्तान अरबों डॉलर की युद्ध सामग्री खरीदता है।

अब भारत की बात करें तो CIA वर्ल्ड फैक्टबुक के हवाले से भारत की कुल आबादी में से 8.4% भारतीय बेरोज़गार है। 29.8% भारत की आबादी ग़रीबी रेखा के नीचे बसर कर रही है। 2015 के बजट के हिसाब से भारत का आमदनी लगभग 193.4 बिलियन डॉलर है और इसका खर्चा 276.4 बिलियन डॉलर है। 2014 में 328.4 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट के मुकाबले 2015 में यह 272.4 बिलियन डॉलर ही था। 31 दिसम्बर 2015 तक भारत पर 480.8 बिलियन डॉलर का कर्ज़ा था।

इकोनोमिक टाइम्स 2015-2016 के सर्वे के मुताबिक सिर्फ 5.5% भारतीय लोग सीधे तौर पर टैक्स अदा करते हैं। WHO  की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 43.5% बच्चो का वजन सामान्य से कम है, 47.9% बच्चों का कद सामान्य से कम है। 20% बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार हैं। इन सभी के बावजूद भारत भी पाकिस्तान की तरह अरबों डॉलर की युद्ध सामग्री खरीदता है।

दोनों देशों में कानून व्यवस्था भी सवालों के घेरे में हैं, कभी-कभी एक छोटी सी अफवाह भी बड़ी आग लगा देती है। उदहारण के तौर पर भारत में दादरी और पाकिस्तान में आसिया बीबी की घटनाओं का ज़िक्र किया जा सकता है। अगर अपराध की बात करे तो दोनों देशों में ये अपनी चरम सीमा पर हैं। भारत में अपराध दर, सुरक्षा दर से मामूली रूप से कम है, यहां अपराध दर 44.53% है और सुरक्षा दर 55.47% है। भारत में रात में आप लगभग 50% ही सुरक्षित हैं। दोनों ही देशो में आंतरिक सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है, महिलाओं और बच्चो के खिलाफ अपराध दिन प्रति दिन बढते जा रहे हैं।  पाकिस्तान में अपराध दर, सुरक्षा दर से मामूली रूप से ज़्यादा है, यहां अपराध दर 55.35% है और सुरक्षा दर 44.65% है। पाकिस्तान में रात में आप लगभग 35.06% ही सुरक्षित हैं।

इसके बावजूद दोनो ही देश अपनी बाहरी सुरक्षा के लिए ज़्यादा चिंतित रहते हैं। अगर आंकड़ों पर ध्यान दें, तो भारत ने सिर्फ 2016 में सुरक्षा की दृष्टि अभी तक 7.8 बिलियन यूरो का सौदा फ्रांस के साथ राफेल एयरक्राफ्ट के लिए किया है और एक बड़ा सौदा रूस के साथ 72,000 करोड़ रुपये का किया है। वहीं पाकिस्तान 2016 से 2024 के बीच कुल मिलाकर 12 बिलियन डॉलर के रक्षा सौदे करेगा। भारत कहीं ना कहीं इन सौदों के लिए चीन और पाकिस्तान से अपनी सुरक्षा का भी वास्ता देता है और वहीं पाकिस्तान इसके लिए अपनी भारत से सुरक्षा का वास्ता देता है। ये सोचने वाली बात है कि अगर दोनों देशों के इन सुरक्षा सौदों पर किया गया खर्चा अगर देश की ग़रीबी और बेरोज़गारी को हटाने में किया जाए तो शायद हर घर में खुशी के ठहाकों की आवाज़ सुनायी दें।

भारत की सीमा से चीन, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान लगे हुए हैं। आये दिन चीन के सिपाहियों की भारत की सीमा में घुसपैठ की ख़बरें आती रहती है। 2001 में बांग्लादेश और भारत के बीच हुई क्रॉस फायरिंग में भारत के 16 जवान मारे गए थे। इन सबके बावजूद भारतीय मीडिया में पाकिस्तान को ज़्यादा अहमियत दी जाती है। आखिर इसका क्या कारण है? कश्मीर, जिसे पाकिस्तान भारत का अंग नहीं समझता, अगर यही मापदंड है तो चीन भी अरुणाचल पर अपना हक़ जमाता है।

वहीं अगर बात करें पाकिस्तान की तो उसकी रक्षा सीमा भी अफगानिस्तान और इरान के साथ लगती है। इन दोनों ही देशों के साथ भी पकिस्तान के रिश्तो में तंगदिली है, खासकर कि अफगानिस्तान के साथ। फिर क्या वजह है कि पाकिस्तानी मीडिया ‘भारत’ का विशेष रूप से ज़िक्र करता है। दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं, दोनों ही बड़ी सेनाएं भी रखते है। मैं यहां कहना चाहता हूं कि रातो-रात कोई एक देश दूसरे पर हमला करके कब्ज़ा कर लेगा ऐसा कुछ भी नहीं होगा। तो फिर हकीकत क्या है? क्यूं दोनों देशों का मीडिया एक दुसरे को दुश्मन की नज़र से ही देखता हैं?

अगर, यहां थोड़ी देर रुक कर सोचें कि दोनों ही देश ग़रीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लेकिन फिर भी दोनों देशों का ही मीडिया इन्हे दिखाने में परहेज़ क्यों करता है और बस एक दुसरे की तरफ नफरत की आग ही उगलता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि ये अपनी खामियों को छुपाने के लिए दूसरे खामियों को दिखाने की कोशिश हो। क्यूंकि अगर खुद की कमियां सामने आ गयी, तो देश के नागरिकों के सामने अपनी ही सरकार की क्या इज्जत रह जाएगी?

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