मेरे पिता जी फौज में हैं, फिर भी मैं पाकिस्तान से वॉर नहीं चाहता

Posted on October 2, 2016 in Hindi, Specials

अंकित रॉय:

ये कोई खुला पत्र नहीं लिख रहा हूं मैं, जो देख रहा हूं उसको लेकर मेरी निजी भावनाएं हैं। अपने आस-पास देख रहा हूं लोगों में युद्ध की कितनी चाहत है और उसे लेकर कितना जोश है। वैसे भी मेरे चाहने ना चाहने से क्या होता, युद्ध होना होगा तो होकर रहेगा लेकिन मैं अपनी बात को रख रहा हूं। जब से भारतीय सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सर्जिकल स्ट्राइक की सूचना दी है देश में लोग जाने क्यों पागल हुए जा रहे हैं। अव्वल तो ये कि ये कोई पहला सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है सेना की ओर से, इस तरह के सर्जिकल ऑपरेशन्स कभी सीमा के उस पार वाले अंजाम देते हैं तो कभी हम देते हैं।

ऐसे ऑपरेशन्स को कई दफे अंजाम दिया जा चुका है, बस फर्क इतना है कि इस बार सरकार ने ऑपरेशन के बाद जानकारी को आपके सम्मुख रख दिया है। सिर्फ इसलिए क्योंकि एक ऐसी फौज घरों में टीवी के सामने बैठी है जो युद्ध लड़ने तो नहीं जाएगी लेकिन उसे बेडरुम में बैठकर युद्ध देखना खूब पसंद है। क्योंकि इससे आपको लगेगा केंद्र में बैठी हुई किसी पार्टी की सरकार मुंहतोड़ जवाब दे रही है और उरी आतंकी हमलों का बदला ले रही है। शायद करगिल की रिपोर्टिंग ने मुंह में युद्ध का खून लगा दिया है हमारे दर्शकों में और आपकी उसी बात को ये राजनीतिक पार्टियां भुना रही हैं।

कितना आसान होता है घर बैठकर ये कहना कि अरे पाकिस्तान पर तो चढ़ाई कर देनी चाहिए। अरे क्या आप जाएंगे सीमा पर बंदूक उठाकर लड़ने। बस कहना ही आसान लगता है, सोचेंगे तो पाएंगे कि दोनों ही देश परमाणु शक्ति से लैस हैं और किसी एक ने भी गलती से परमाणु हमला किया तो दोनों के दोनों देश तबाह हो जाएंगे। लेकिन अगर मैं शांति की बात कर रहा हूं तो कोई ये न समझे कि मैं भारतीय सेना के काम को हीन भावना से देख रहा हूं। मेरा मानना है कि सेना का जो काम है वो करती है और करेगी ही लेकिन आप लोग सरकार को युद्ध के लिए उकसाना बंद कीजिए।

कुछ लोग मुझसे कहते हैं, “अरे तुम्हारे पिताजी तो फौज में हैं और तुम ऐसी बातें करते हो”। अरे चाचा मेरे पिताजी फौज में हैं, मैं नहीं हूं। मेरे और उनके विचार अलग हो सकते हैं। देश में डेमोक्रेसी है। उन्होंने जिस बात की प्रतिज्ञा ली थी उसे वो बखूबी निभा रहे हैं और आखिरी समय तक निभाते रहेंगे। युद्ध होना होगा तो होकर रहेगा और मैं अपने देश के लिए खड़ा मिलूंगा लेकिन एक बात जान लीजिए कि युद्ध में किसी की हार या जीत नहीं होती। जो भी देश युद्ध में शामिल होते हैं उन सभी की हार होती है क्योंकि उसमें कई लोग मारे जाते हैं, इंसानियत की मौत होती है और जहां ये सब होता है वहां किसी की जीत नहीं होती।

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।