नोटबंदी: ई-बैंकिंग Vs. नॉन ई-बैंकिंग वाला इंडिया

Posted on November 18, 2016 in Hindi, Politics, Specials

 साक़िब सलीम:

भारत सरकार के 500 और 1000 के नोटों को बंद करने के फ़ैसले के बाद से ही तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। जहां एक ओर कुछ लोग इसको एक बिना सोचा समझा कदम करार दे रहे हैं वहीं काफ़ी लोगों का मानना है कि इस फ़ैसले से भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी। अगर हम सोशल मिडिया की ओर रुख़ करें तो दो तरह के गुट दिखाई दे रहे हैं। एक ओर वो लोग जो कि बैंकों के बाहर लम्बी कतारों, उसमें बेहोश हो कर गिरते लोगों, मारपीट और झगड़ों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि सरकार के क़दम के कारण जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आत्महत्याओं और कतार में थकान के कारण हुई मौतों की खबरें भी लगातार इस तर्क को बल दे रही हैं कि सरकार की निति में कुछ ख़ामी है।

दूसरा गुट उन लोगों का है जो कि सरकार के क़दम की तारीफ़ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि देश-हित में जनता को कुछ संयम बरतना चाहिए।

इस फ़ैसले का आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था पर असर तो वक़्त ही बताएगा पर इस से हमारे समाज का एक ख़तरनाक सच खुल कर सामने आ रहा है। हम देख रहे हैं कि ये देश और समाज सिर्फ़ अमीर और ग़रीब में नहीं बटा हुआ है बल्कि यहाँ उंच नीच के और भी कारण मौजूद है। और हम देख रहे हैं कि देश में कैसे अचानक कम पढ़ा लिखे और पढ़े लिखे के फ़र्क से ज़्यादा टेक्नोलॉजी तक पहुँच पाने का फ़र्क मायने रख रहा है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ख़ुद कहा है कि भारतीय जनता को ई-बैंकिंग की आदत डाल लेनी चाहिए क्योंकि नई अर्थव्यवस्था में इस से उनका जीवन सरल होगा. आज हम देख रहे हैं कि हमारे समाज का एक छोटा सा तबका जिसकी पहुँच ई बैंकिंग तक है उस पर सरकार के इस फ़ैसले का कोई ख़ास असर नहीं है। ये तबका बड़े रेस्टोरेंट में खाना खा कर बिल की अदायगी कार्ड द्वारा कर देता है, अपने स्मार्ट फ़ोन से पैसा चुका कर खाना मंगा लेता है, ऑनलाइन शॉपिंग के द्वारा ज़रूरत का सामान माँगा लेता है। बस कंप्यूटर या स्मार्ट फ़ोन पर उँगलियाँ चलानी होती हैं और इनके बैंक अकाउंट से भुगतान हो जाता है। ऐसे शोरूम और मॉल जहां कि कार्ड या अन्य साधन जैसे कि paytm द्वारा भुगतान होता है वहां अचानक से खरीदारी बढ़ गयी है।

और ऐसे में एक तबका वो है जिसकी पहुँच इस ई-बैंकिंग तक नहीं है। कुछ लोग इतने पढ़े लिखे ही नहीं कि इसका इस्तेमाल कर पायें, देश में एक चौथाई से ज़्यादा जनता आज भी अशिक्षित है। बहुत से लोग पढ़े लिखे होने के बावजूद पुरानी पीढ़ी से होने के कारण नई टेक्नोलॉजी को नहीं अपना पा रहे। ई-बैंकिंग के लिए ज़रूरी बैंक बैलेंस और स्मार्ट फ़ोन इत्यादि भी सब की पहुँच में नहीं। सोचिये उस मज़दूर का जो रोज़ 100 रुपए कमाता है, क्या वो बैंक में पैसे डाल भी सकता है?

कई बार पैसा, शिक्षा, टेक्नोलॉजी कि जानकारी होने के बावजूद भी जनता इसका लाभ नहीं उठा पाती. वजह है कि भारत में इन्टरनेट का जाल अभी बड़े शहरों के बाहर बहुत सिमित है। बड़े शहरों में भी पिछले एक हफ़्ते में इन्टरनेट बैंकिंग में ट्रैफिक अधिक होने के कारण दिक्कतें सुनी गयी हैं। छोटे शहर, देहात या रास्तों पर आप के पास paytm या कार्ड होगा भी तब भी उस से भुगतान कि सुविधा न होगी।

भारत की सवा सौ करोड़ की आबादी का एक बहुत ही छोटा हिस्सा ई-बैंकिंग तक पहुँच पाया है। इसमें ध्यान देने लायक बात ये भी है कि जिन लोगों की पहुँच स्मार्ट फ़ोन आदि से बैंकिंग तक है उन घरों में भी बुज़ुर्ग और औरतें इन से अछूते हैं। परिवार का नया पढ़ा लिखा लड़का जो बड़े शहर में रहता है वही बाकि घर के लिए ऑनलाइन खरीददारी करता है। ऐसे में बुज़ुर्ग और औरतें भी इस तबक़े के अन्दर ही निचले स्तर पर जाते देखे जा सकते हैं। अब वे आश्रित हैं घर के उन लोगों पर जो ई-बैंकिंग कर पा रहे हैं।

नोटों के मुद्दे से एक बारगी हटकर सोचा जाये तो सरकार को देश भर में तकनीकी शिक्षा और उसको पहुंचाने के लिए ठोस क़दम उठाने होंगे। केवल तब ही जैसा कि जेटली जी ने कहा भारत एक कैश-लैस अर्थव्यवस्था हो सकता है। नहीं तो समाज दो तबकों में बट कर रह जायेगा।

 

 

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।