यूपी चुनाव में लेफ्ट पार्टियों का बन पाएगा राईट कॉम्बिनेशन?

Posted on November 10, 2016 in Hindi, Politics

विष्णु प्रभाकर:

बिहार में महागठबंधन की जीत के बाद यूपी में भी महागठबंधन की बात शुरु हो गयी है। समाजवादी पार्टी के एक कार्यक्रम में भी जनता परिवार से निकली सारी पार्टियों के नेता एक मंच पर दिखे थे। दूसरी तरफ 9 नवंबर को लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में लेफ्ट की 6 पार्टियों सीपीआइ (Communist Party of India या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी), सीपीआइएम (मार्क्सवादी), सीपीआइएमएल (मार्क्सवादी लेनिनवादी), आरएसपी (Revolutionary Socialist Party), फारवर्ड ब्लॉक और एसयूसीआई सी (Socialist Unity Centre of India (Communist)) ने संयुक्त रैली की।

अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव होना है। वामपंथी दलों का एक मंच पर आना उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को कितना प्रभावित करता है ये तो समय ही बतायेगा। पर अगर बिहार विधानसभा चुनाव को देखा जाए तो वहां भी वामपंथी दलों ने संयुक्त रूप से प्रत्याशी उतारा था। लगभग तीस सीटों पर वामपंथी दलों ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की, लेकिन विधानसभा में सिर्फ सीपीआइएमएल ही तीन लोगों को भेज कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाई।

उत्तर प्रदेश और बिहार नब्बे के दशक तक कम्युनिस्ट आंदोलनों का गढ़ रहा है। ग़ाज़ीपुर, बलिया, बनारस, मऊ में तो कम्युनिस्ट पार्टी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती रही। लेकिन नब्बे के दशक के बाद वामपंथी आंदोलन बहुत पीछे चला गया। ऐसे में वामपंथी पार्टियों के सामने अपनी ज़मीन को फिर वापस ले पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

बंगाल विधानसभा चुनाव में सीपीआइएम ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था जिससे वाम एकता नहीं बन पायी थी। रैली में उपस्थित सीपीआइएमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने  कहा कि बंगाल में सीपीआईएम से जरूर हमारे वैचारिक मतभेद हैं, लेकिन हम संघर्ष करेंगे और बंगाल के वाम आंदोलन को खड़ा करेंगे। उत्तर प्रदेश में पहली बार वामपंथी पार्टियों का एक मंच पर आना स्वागत योग्य है।

सीपीआईएम के महासचिव और राज्यसभा सांसद सीताराम येचुरी ने कहा कि पीएम मोदी अश्वमेध का घोड़ा दौड़ा रहे हैं, लेकिन उनको पता नहीं है कि अश्वमेध के घोड़े को भी दो भाईयों ने पकड़ा था। वैसे ही सांप्रदायिक और पूंजीवाद का जो घोड़ा मोदी दौड़ा रहे हैं, उसे हंसिया और हथौड़ा यूपी में रोकेंगे।

रैली में सीपीआइ नेता डी. राजा, महासचिव फॉरवर्ड ब्लॉक देवब्रत विश्वास, आरएसपी महासचिव टी.के. चंद्रचूड़न, व केंद्रीय कमेटी एसयूसीआई (सी) के सदस्य सत्यवान, सीपीआइएमएल पोलित ब्यूरो सदस्य रामजी राय, सीपीआइएम नेता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली मौजूद थे। हज़ारों की संख्या में लोग रैली में पहुंचे थे।

यूपी चुनाव के मद्देनजर भाजपा अपने मुख्यमंत्रियों को ,प्रचार के लिए यूपी में लायेगी ऐसा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है। वामपंथी पार्टियों में सबसे बड़ी पार्टी सीपीआईएम है जिसकी दो राज्यों त्रिपुरा और केरल में सरकारें भी हैं। माणिक सरकार अपनी सादी जीवनपद्धती और ईमानदार छवि के मुख्यमंत्री हैं और पिनराई विजयन भी एक मजबूत नेता हैं। इन दो मुख्यमंत्रियों के अलावा सीपीआइएम के पास और भी चेहरे हैं ऐसे में अगर सीपीआइएम अपने चर्चित चेहरों को प्रचार के लिए यूपी में उतारती है तो इसका अलग प्रभाव होगा।

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