“भारत माता की जय” जैसे नारों में ना तौली जाए देशभक्ति

Posted on November 3, 2016 in Hindi, Society

हरबंस सिंह:

“भारत माता की जय”, ये नारा आज़ादी की लड़ाई में एक विशेष सम्मान रखता था। इस तरह के कई नारे उस समय प्रचलित थे जो कि एक आम भारतीय को आज़ादी के मकसद से जुड़ने के लिए उत्साहित करते थे। ये नारा क्रांतिकारियों और अहिंसावादियों दोनों खेमों में खूब प्रचलित था। लेकिन भारत की आज़ादी के बाद कभी भी ये इस तरह से सुर्खियों में नहीं आया, जिस तरह आजकल इसकी आज़माइश की जा रही है। यहां तक कि भारत माता की जय कहना ही आपका देशभक्त या देशद्रोही होना तय करता है।

मैं जब आम नागरिक की हैसियत से इस देश को देखता हूं तो यह बुहत खूबसूरत नज़र आता है, इसकी विभिन्नताओं में भी एक समानता है। और जब इस धरती को “माँ” के रूप में देखने की कोशिश करता हूं, तो उस औरत का चित्र सामने आता है जो सदियों से हमारे देश में हाशिये पर ही है। आज भी महिलाओं का एक बड़ा तबका अपनी मर्जी से जीवन बसर करने के लिए आज़ाद नहीं है। उसे आज भी रसोई में खाना बनाते हुए देखा जा सकता है। उसे क्या पहनना है या क्या नहीं ये सभी दिशा-निर्देश हमारा समाज तय करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-2013 से 2015 तक 3 लाख से ज़्यादा महिलाओं के खिलाफ अपराध दर्ज़ हुये हैं। इसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि 75-80% महिलाऐं उन पर होने वाले अपराधों पर चुप रहती हैं।

अब बात करते हैं “जय” की, हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार भगवान के गुणगान “जय” शब्द से होते हैं जैसे कि “जय श्री राम”, “जय श्री कृष्ण” आदि। इसी तरह जब किसी देवी का गुणगान करना हो तो “जय” के साथ एक और शब्द “माँ” भी जुड़ जाता है। यही गैर हिन्दुओं को ठीक नहीं लग रहा है कि “भारत माता की जय” एक धर्म विशेष से प्रेरित है। अब जैसे कि मैं एक सिख हूं और धार्मिक दृष्टी से मेरी माँ “साहिब कौर” हैं और पिता “गुरु गोबिंद सिंह” है और मैं “श्री आनंदपुर साहिब” का निवासी हूं। इस तरह मेरी माँ की जगह “साहिब कौर” के सिवाय और कोई नहीं ले सकता। अगर दबाब मैं आकर मैं कह भी दूं तो ये मेरी अपनी आत्मा से बेईमानी होगी और कभी ना कभी सामाजिक विद्रोह बनकर फूटेगी।

अंत में यही कहूंगा कि, जो हमारे देश में संविधान की गरिमा को बरक़रार रख शांति पूर्वक अपना जीवन बिता रहा है, वो एक सच्चा देश वासी है। “मेरी जान भारत”, “मेरा देश भारत”, “मेरा दिल भारत” या “मेरा देश महान” जैसे देश प्रेम के और भी कई गीत और नारे हो सकते हैं। कुछ विशेष शब्दों से किसी की भी देशभक्ति को नहीं तोला जाना चाहिए।

 

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