कॉनवर्ज:घर में ट्वायलेट ना होना बना सामाजिक बहिष्कार का कारण

Posted on November 12, 2016 in Specials

यूथ की आवाज़:

स्वच्छ भारत अभियान एक बेहतरीन सोच की शुरुआत है ये शायद ही किसी के लिए विवाद का मुद्दा हो। इस अभियान की घोषणा के बाद से वो कहानियां और निजी स्तर के संघर्ष भी सामने आए हैं जो लोग स्वच्छता और सैनिटेशन को लेकर लड़ रहे थे।

कॉनवर्ज 2016 में भारत के संसद से 1 किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले 10 साल के राम की सैनिटेशन को लेकर अपनी कहानी थी। राम का परिवार संसद से 1 किमी की दूरी पर एक सोसायटी में रहता था, राम के पिता उसी सोसायटी में वॉचमैन का काम करते थे, राम के परिवार के पास ट्वायलेट की सुविधा नहीं थी, नतीजा खुले में शौच, और एक शहरी क्षेत्र में खुले में शौच करने से होने वाली तमाम परेशानियां। राम को अपने दोस्तों के साथ कई दफा रात में नींद में दिल्ली की सबसे वयस्त सड़कों से होकर शौच करने के लिए गुज़रना होता था, जिसमें कई दफा खतरनाक दुर्घटनाएं राम के सामने मुंह फाड़े खड़ी रहती थी। राम के मुताबिक ऐसा करना हर वक्त मुमकिन नहीं होता था और कई दफा विपरीत परिस्थितियों में और बहुत ही स्ट्रॉंग अर्ज आने पर सोसायटी में ही शौच करना होता था।

इस बात को लेकर बिना किसी पूर्व नोटिस के राम के पूरे परिवार को सोसायटी से बाहर निकाल दिया गया। राम को परिवार के साथ नेपाल जाना पड़ा और स्कूल भी छूट गया। ‘नेपाल जाने से मेरा स्कूल जाना बंद हो गया और मेरी पढ़ाई बंद हो गई, वहां मेरे गांव में लड़कियों की शादी बहुत कम उम्र में कर दी जाती है मुझे डर था कि मेरी बहन के साथ भी ऐसा ना हो जाए

इसी सोच के साथ राम ने हिम्मत नहीं छोड़ी और भारत में बच्चों के हक के लिए काम करने वाली NGO नाइन इज़ माइन से मदद की गुहार लगाई और राम को निराश नहीं किया गया। राम वापस दिल्ली आ गएं और अपनी पढ़ाई शुरु की। हालांकि ये पूरा घटनाक्रम इतना आसान नहीं था और खराब सैनिटेशन कैसे अर्बन एक्सक्लूज़न कर सकता है इसकी कहानी बयां करता है राम का संघर्ष।

राम इसके बाद बच्चों के लिए संघर्ष का चेहरा बनें और अपनी कहानी और जगलिंग की प्रतिभा को लेकर वो देश के मशहूर लोगों से मिलें
मैं सचिन तेंदुलकर और प्रियंका चोपड़ा से भी मिला और सबसे कहा कि मुझे पैसे या पुरस्कार नहीं चाहिए, बस सबको सबका हक दिला दो’ 

राम और ऐसी ही कई कहानियां बाहर लाने का श्रेय जाता है हितवादा के चीफ रिपोर्टर कार्तिक लोखंडे को। कार्तिक लोखंडे 1999 से अखबार हितवादा के लिए रिपोर्टिंग कर रहे हैं और अर्बन प्लानिंग, सैनिटेशन, पानी की कमी जैसे मुद्दों पर बहुत ज़्यादा काम किया है। कार्तिक ने  सैनिटेशन पर बात करते हुए बताया कि कैसे हम प्लानिंग के स्तर पर बहुत पीछे हैं, और सवच्छ भारत मिशन एक बेहतरीन सोच होते हुए भी प्लानिंग के अभाव में काम नहीं कर पा रहा है।

स्वच्छता या सैनिटेशन के मुद्दों पर मीडिया में भी पॉलिसी गैप्स पर बात नहींं होती। स्वच्छता और सही सैनिटेशन पूरे समाज के लिए बहुत ज़रूरी है। कई ऐसे उदाहरण हैं जहां  शहरी क्षेत्रों में भी मां अपने बच्चों को रात में ही बाहर लेकर जाती हैं शौच करवाने और अगर डायरिया हो जाए तो वो असहाय हो जाते हैं। 

कार्तिक ने कॉनवर्ज में बात करते हुए कहा कि हमें ये ज़रूर सोचना चाहिए कि हम क्या कर सकते हैं इस पूर मुद्दे पर। शौचालय बनवाना या खुले में शौच से देश को मुक्त करना प्लानिंग स्तर पर हमारा काम नहीं हो सकता। कम से कम हम ये तो कर सकते हैं कि हम ऐसी कहानियां सबके सामने ला सकते हैं।