‘उद्यम से भारत निर्माण’ के संदेश के साथ जागृति यात्रा की रेल मुंबई से रवाना

Posted by Shriya Garg in Hindi
December 27, 2016

जागृति यात्रा का उद्घाटन समारोह 24 दिसंबर को ‘टिस’ (टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेस) में सम्पन्न हुआ यह एक पंद्रह दिनों की वार्षिक रेल यात्रा है, जिसमें देश भर के साढ़े चार सौ प्रतिभागी (कुछ विदेशी प्रतिभागियों के साथ) भारतभ्रमण करते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे श्री किशोर माध्यन मौजूद थे उन्होने सभी यात्रियों को जीवंत उदाहरणों से निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया साथ ही पुस्तकों के अध्ययन पर उन्होने खासा ज़ोर दिया उन्होनें कहा कि यात्रा की लंबी अवधि के दौरान सीखने के लिए ये ज़रूरी है कि यात्री पूर्वाग्रहों को छोड़कर नए अनुभवों के लिए तैयार रहें

रेलमन्त्री सुरेश प्रभु ने वीडियो के ज़रिए सभी युवा यात्रियों को ‘डिजिटल भारत’ से सकरात्मक बदलाव लाने के लिए नए उद्यम लगाने का सन्देश दिया। जागृति के अध्यक्ष श्री शशांक मणि त्रिपाठी ने अगले बीस वर्षों मे ‘उद्यम से भारत निर्माण’ के लक्ष्य में मध्य भारत के युवाओं के ऊर्जा को दिशा देने की ज़रुरत का एहसास कराया |

इस अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। ‘जागृति गीत’ पर प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गौरी शर्मा त्रिपाठी ने सभी युवाओं को झुमाया। ‘जागृति एंटरप्राइज सेंटरपूर्वांचल’ की प्रतिकृति का अनावरण भी किया गया जिसे तृप्ति दोशी ने एक दो सौ वर्ष पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर डिजाइन किया है

इस केन्द्र में ही इन्क्युबेटेड ‘देवरिया डिजाइन्स’ की कहानी को पूजा शाही और प्रीति ने साझा किया। पूजा ने बताया कि ज़ागृति ने किस तरह देवरिया जैसे जिले में उनके हुनर को पहचाना, उन्हें सही मार्गदर्शकों से जोड़ा जिसके परिणाम स्वरूप उनके हस्त शिल्प को दुबई शहर की प्रदर्शनियों मे स्थान मिल सका उन्हें विश्वास है कि आने वाला केन्द्र उनके जैसी ग्रामीण परिवेश से आने वाली कई पूजाओं के सपनों को पूरा करेगा

जागृतियात्रा सम्पूर्ण भारत का भ्रमण करेगी, साथ ही उद्यम से भारत निर्माण के लक्ष्य मे यह सभी पड़ावों से मिट्टी लेकर, आने वाले केन्द्र की आधार शिला बनाएगी। श्नाइडर इलेक्ट्रिक, जो जागृति यात्रा 2016 के मुख्य सहायक हैं, की ओर से अनामिका भार्गव ने भी युवाओं को ऊर्जा के क्षेत्र मे सामाजिक पहल करने की प्रेरणा दी।

जागृति यात्रा के पहले ही दिन यात्रियों को एक अनोखी प्रक्रिया से गुज़ारा गया इस प्रक्रिया का नाम ‘लाइफ़ लाइन एक्सर्साइज’ है, जो अभी भी जारी है इसके तहत सभी यात्री अलगअलग समूहों मे अपने जीवन के अब तक के सभी अनुभवों को सन्क्षिप्त और कभीकभी विस्तार मे अन्य यात्रियों से साझा करते हैं जैसे-जैसे वो अपने जीवन की घटनाओं का वर्णन करते हैं, वैसे-वैसे ही वो अपनी जीवन रेखा के उतारचढावों को रेखांकित कर प्रत्यक्ष रोमांच कायम रखते है।

इस प्रक्रिया मे कई यात्री एक दूसरे से घुलमिल कर एकदूसरे के प्रति समझ विकसित कर पाते हैं उदाहरणस्वरूप, एक यात्री ने अपने जीवन के उस वक्त का वर्णन किया जब वो अपने जीवन को ही समाप्त करने की सोच रहे थे खैर, उन्होने ऐसा नही किया और उसके बाद ही उनका चयन ‘वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम’ मे हुआ इससे श्रोता यात्रियों ने कभी हार न मानने के महत्व को समझा

एक और युवती ने बताया कि कैसे उन्होने पहली बार अकेले यात्रा की है, क्योंकि उनके मातापिता ने उन्हें लड़की होने के कारण काफ़ी बंदिशों के माहौल मे रखा। फिर भी यात्रा के इस अवसर के लिए उन्होने खुद के निर्णय को सर्वोपरि रखा उन्होने बताया की उन्हें साहित्य मे रुचि थी, किन्तु फिर भी अन्य लोगों के नज़रिये से प्रभावित हो कर उन्होने कॉमर्स की पढ़ाई की। उन्होने काफ़ी खुलकर कुछ शारीरिक रोगों के अनुभवों को भी साझा किया।

ऐसी शिक्षा शायद ही कही मिल पाएं जो यात्रियों को इन वास्तविक जीवन की सच्चाइयों से अनुभव कराती है, साथ ही इस प्रक्रिया ने सभी यात्रियों को विनम्र होने का एक मौका दिया है, क्योंकि बहुत सारे यात्रियों की ज़ीवनी काफ़ी प्रेरित करने वाली रही है कुछ ने तो सफ़ल उद्यमों की स्थापना कर डाली है और कईयों ने सफ़ल आरामदायक जीवन का परित्याग कर छोटे स्तर पर ही सामाजिक पहल कर अन्य लोगों के जीवन की समस्याओं को दूर करने की ठानी है

पूरे भारत से, सभी राज्यों से एवं 23 अन्य देशों से आए यात्री न जाने कितनी अलगअलग भाषाओं, कहानियों को साझा कर रहे हैं। रेल अभी भी भारत के खेतों, पठारों से होकर गुजर रही है। काफ़ी रोमांचक अनुभव है और यात्रा जारी है

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