काश! कैशलेस से पहले हम क्राइमलेस हो जाते

सुबह ऑफिस पहुंचते ही सबसे पहला वीडियो जो देखने को मिला उसमें एक महिला के सिर से खून बह रहा है और उसके साथ एक छोटी बच्ची दहाड़े मार कर रो रही है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में कुछ गुंडो ने एक महिला के साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर उसे घायल कर दिया। बेबस लोग सिर्फ वीडियो बना रहे है लेकिन जुबान नहीं खोल रहे।

वैसे जुबान तो सभी की बंद है। ईमानदारों की भी और काले धन वालों की भी। देश में सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही है और उसके बोल हैं ‘कैशलेस सोसाइटी’। पीएम चाहते हैं कि हम सब मोबाइल एप का इस्तेमाल करें, अपने फोन को ही बटुआ बना लें। कितनी क्रांतिकारी सोच है, देश में बदलाव की बयार बह रही है और शायद इसीलिए हर रोज आरबीआई के नियम भी बदल जाते हैं।

वैसे बदलाव की एक क्रांति आज से 4 साल पहले भी आई थी। 16 दिसंबर, निर्भया कांड की वह काली रात जिसकी अल सुबह हम सभी सड़कों पर थे। उस दिन भी हम चीख रहे थे, चिल्ला रहे थे। कई बेबस हाथ उस दिन भी कैमरों से वीडियो बना रहे थे। उस समय हवाओं में जो आवाज गूंज रही थी उसके बोल थे ‘क्राइमलेस सोसाइटी’। नियम वहां भी बदले गए, कुछ नए कानून बने। कुछ अपराधी जेल गए तो कोई नाबालिग उसी कानून के सहारे बच भी निकले। नहीं बदली तो ‘क्राइमलेस सोसाइटी’ होने की वह आवाज जो उस वक्त से लेकर आज तक सिर्फ हवाओं में ही रह गई, जमीन तक नहीं पहुंच सकी।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 34 प्रतिशत की वृद्धि आयी है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में यह मामले सबसे ज्यादा हैं। इसी रिपोर्ट के अनुसार हर दो मिनट में महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक मामला दर्ज किया जाता है।

पिछले चार सालों में हमने एक मूक प्रधानमंत्री से लेकर वाक् पीएम तक का सफर तय किया। इस दौरान चांद से लेकर मंगल तक तिरंगा लहरा दिया। लेकिन अपनी सड़कों को महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं बना सके। हालात का अंदाजा लगाइए कि इसी साल 16 दिसंबर की ही रात को दिल्ली की सड़क में एक और युवती का चलती कार में रेप किया जाता है। लेकिन अब हम शायद उतने आंदोलित नहीं होते, सड़कों पर उतरना और नारे लगाना हमने छोड़ दिया है। हम जान गए हैं कि आंदोलनों से बदलाव नहीं आएगा।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.