खुला ख़त – तमाम शोहदों के नाम

Posted by Sumit Soni (सुमित सोनी)
December 27, 2016

Self-Published

नमस्कार ,

समझ नहीं आता की कैसे और कहाँ से शुरू करूँ , आखिरकार आप लोगों की करस्तानियाँ ही ऐसी हैं।आप कॉलेजों के बाहर , गलियों के मुहाने पर तथा नुक्कड़ों पर मिलने वाले वही महान विभूतियाँ है जो लड़कियों का जीना हराम कर देते हैं। यूँ ही आवारागर्दी करते करते आप को कोई भोली भाली सी लड़की पसंद आ जाती है, कुछ दिनों तक आप उसे राह चलते देख देख कर आँख सेकते हैं फिर उस अबला का नाम पता करते हैं , अब आप उस लड़की से ना जाने किस सस्ते टाइप का प्यार करने लगते है जिसका मूल देहाकर्षण ही होता है परंतु आप इसे सच्चे प्यार का नाम देते है और आप अब उस लड़की को पाने के लिए जमीन आसमान एक करने लगते हैं अपने दोस्तों वगैरह से बताते फिरते हैं सिवाय उस लड़की को बताने के !!!!

एक दिन वो भी आता है की आप अपने दोस्तों की बात मान लेते है और  बहुत हिम्मत करके अपना हाल ए दिल उस लड़की को बता देते हैं परंतु यह क्या …………..? वो लड़की आप से प्यार करने से इन्कार कर देती है। अब आपके अहंकार को ठेस पंहुचता है , आप सोचते है की उस लड़की की इतनी हिम्मत कैसे हुई की उसने आपको ना बोल दिया , आखिर उसने इंकार किया भी तो कैसे ?  आप सोचे भी क्यों नही आखिर में आप तो उस लड़की को अपने बाप की जागीर समझते है की आप को वो पसन्द आई तो वो आपकी बात माने ही माने । आप तो उसे बाजार में मिलने वाली कोई वास्तु समझते हैं की अगर माल पसन्द आया तो बस दाम चुकता किया और माल लेकर चल दिए मगर अफ़सोस की इस बार तो आपको कोई ऐसा पसन्द आगया है जो किसी बाजार में मिलता ही नही तो आपको कैसे मिले ?

अब आपको बहुत ढ़ेर सारा गुस्सा आता है जिसके कारण आपके शैतानी दिमाग में यह विचार आता है की जब वो लड़की आप की ना हुई तो आप उसे किसी और की भी नही होने देंगे और यहीं पर एक गंभीर किस्म की आपराधिक भावना आपके मन मंदिर में जन्म ले लेती है और आप तेजाब द्वारा उस लड़की के सुंदर तन और उस से भी सुन्दर मन को जला देने की योजना बना डालते है या फिर किसी अन्य आपराधिक विधि द्वारा उस लड़की पर हमला कर के उसके गुरुर को तोड़ने का प्रयत्न करना चाहते हैं जबकि हकीकत तो कुछ और ही होती है ।

ये गुरुर उस कोमल हृदया के मन में ना होकर आपके हृदय में होता है जिसका साक्षात् प्रमाण आपके उसे आघात पँहुचाने के विचार ही है।चलिए एक बार आप उस लड़की के स्थान पर अपनी बहन को रख कर सोचिये या फिर आप ये कल्पना कीजिये की अगर कभी ऐसा हो की आप ही वो लड़की हैं और कोई अंजान सा आवारा लड़का आकर आपसे अपने प्रणय निवेदन का विचार थोपे और जबरदस्ती आपसे प्रेम का रिश्ता बनाने को कहे तो आप को उस वक्त कैसा महसूस होगा , क्या आप उस लड़के के प्रेम निवेदन की बात मान लेंगे ?

नहीं ना , सोचिये जब आप नही मान सकते तो और कोई कैसे मानेगा ? नफरत तो होगी ही ना ऐसे लोगो से, बस यही भावना उस लड़की के मन में भी आ जाती है जब आप उसके साथ जबरदस्ती प्यार का बर्ताव करते हैं। चलिए , उठिए, अपने इस झूठे प्रेम की बावड़ी से बाहर निकलिये , अपनी वासना और जिद को अपने मन मंदिर से निकाल के दूर फेंकिए और अपने समय और शक्ति का सदुपयोग कर के अपने आपको एक ऐसी शख्शियत बनाइये की जो लड़की आज आपको अस्वीकार कर गई है वो कल को अपने फैसले पर पछताए और और आपको पाने का सपना देखे ।और आपको लोगों के सामने शर्म से सर ना झुकाना पड़े , लोग आपकी नजीर दें ।

उम्मीद है की आगे से आप के द्वारा अपने झूठे प्रेम के लिए किसी लड़की को डराया नहीं दिया जायेगा और उन्हें उन्मुक्त गगन में स्वच्छंद विचरण करने दिया जायेगा ।

धन्यवाद
सुमित कुमार सोनी

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