बेरोज़गार पंजाबी मुंडो के बीच पॉप्यूलर है हिंसक पंजाबी म्यूजिक

Posted by हरबंश सिंह in Hindi, Society
December 9, 2016

तारीख 03-12-2016, एक आम ही दिन था लेकिन शाम होते एक विडियो वायरल हो गया। पंजाब की मोड़ मंडी में शादी के कार्यक्रम के दौरान एक गोली चली जो स्टेज पर डांस कर रही डांसर कुलविंदर कौर के सर को छेद करती हुई निकल गयी। उसी समय उनकी मौत हो गयी, बाद मे उनके पति द्वारा ये भी कहा गया कि वह गर्भवती थी। पुलिस छानबीन से पता चला कि लकी गोयल उर्फ बिल्ला से ये गोली चली थी। इसके उपरांत, बिल्ला के साथ और तीन व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया गया।

किसी भी अपराध में, दो चेहरे अक्सर हमारे सामने आते हैं एक पीड़ित का और एक दोषी का। इसी तर्ज़ पर हमारा मीडिया भी सिर्फ और सिर्फ कुलविंदर कौर और बंदूक से चली गोली की बात कर रहा है। लेकिन वायरल हुये विडियो में, उस समय स्क्रीन पर पीछे एक पंजाबी गीत चल रहा था, जिसमें शराब और सामाजिक प्रतिष्ठा को गौरवान्वित किया जा रहा था। इस मानसिकता पर क्यूँ कोई बात नहीं कर रहा? शायद पंजाब में बढ़ रहे अपराधों की ये भी एक जटिल वजह है।

पंजाब में हिंसक हो रही मानसिकता को समझने के लिये, तीन चीजों पर ध्यान देना ज़रूरी है। पंजाबी मानसिकता, जटिल हो रही सामाजिक समस्या और सभ्याचार के नाम पर परोसे जा रहे हिंसक पंजाबी गीत। पंजाब एक कृषिप्रधान राज्य है और यहां किसान की सामाजिक और राजनैतिक गलियारों तक पहुँच हैं। पंजाबी किसान जिसे ‘जट’ कहा जाता है, का अपना एक इतिहास है।

आज किसानों की आबादी तो बढ़ ही रही है साथ ही प्रति किसान ज़मीन भी कम होती जा रही है। आज पंजाब के ज़्यादातर किसान कुछ एकड़ ज़मीन तक ही सिमट के रह गए हैं। बेहद कम किसान हैं जो किसी अन्य व्यवसाय में या विदेश जाने में कामयाब हो पाये हैं। लेकिन अधिकांश किसान खेती के सिवाय किसी और हुनर के ना होने के कारण आज हाशिये पर हैं। इसके चलते आये दिन अखबारों में किसानों की खुदकुशी की खबरें प्रकाशित होती रहती हैं। अब ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं हैं कि आज पंजाब का समाज किस निराशा से गुजर रहा है।

अब अगर नयी पीढ़ी की बात करें, जिसका जन्म इंटरनेट और मोबाइल फ़ोन आने के बाद हुआ है, आज डिजिटल माध्यमों ने उसे सारी दुनिया से जोड़ दिया है और उसने भी विदेश में जाने का सपना देखना शुरू कर दिया है। अगर व्यक्तिगत रूप से बात करूं तो मुझे आज पंजाब के अंदर ऐसा युवा नहीं मिलता जो विदेश जाने का सपना ना संजोये हुये हो। इस युवा पीढ़ी के लिये खेती एक निम्न व्यवसाय है। खेती से जुड़े अन्य व्यवसाय जैसे पशु पालन इत्यादि में भी इसकी दिलचस्पी नही रही। क्यूंकि पंजाब में उद्योगों का विकास ना के बराबर है इसलिए आज का पढ़ा लिखा युवा हाथ में डिग्री होने के बावजूद बेरोज़गार है। ये बढती बेरोज़गारी एक गहरी निराशा को जन्म दे रही है।

अब ये समझाने की जरूरत नहीं हैं कि निराशा और हिंसा का आपस में क्या रिश्ता है। अब इस तरह के माहौल में, पंजाबी गायक अपनी पहचान बनाने के लिये कुछ इस तरह के गानों का चयन करते हैं जिनमें शराब और हिंसा की भरमार हो। इस तरह के गानों को मशहूर करने के लिये कुछ इसी तरह के इनके विडियो भी बनाये जाते हैं, जहां एक आम सा दिखने वाला किसान हाथ में बंदूक उठा कर 10-20 लोगों को मार रहा होता है। इस तरह के गानों और विडियो से आज पंजाबी गायकी भरी हुई है। इस तरह के गानों को विदेशों और गैर पंजाबी समाज में भी खूब सहारा जाता है। इस निराशा में जी रहा नौजवान इन गीतों से प्रेरित होकर नशे की ओर तो बढ़ ही रहा है साथ ही बंदूक को एक तमगे की तरह भी पेश कर रहा है। वो इसे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा का मापदंड समझ रहा है।

कुलविन्दर कौर को जब गोली लगी तब पीछे की स्क्रीन पर जो गाना चल रहा था उसके बोल थे “बोतल शराब दिये” और इसे गाया हैं मशहूर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांज ने। संगीत, भारतीय समाज का एक अदभुत अंग हैं, जो आपको सभी जगह दिखेगा। इस पर किसी भी तरह की सेंसरशिप लगाना भी नामुमकिन है और ये हमारी आजादी में कहीं ना कहीं ख़लन भी है। लेकिन हमें खुद को इस तरह के लच्चर गीतों को सुनने से रोकना होगा। अगर हम एक सुरक्षित समाज की रचना करना चाहते हैं तो आज की इस घड़ी में ये ज़रुरी भी है।

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