अदृश्य चश्में

Posted by Vikram Singh
January 16, 2017

Self-Published

आज के खान पान एवं प्रदूषित वातावरण के कारण लोगों की आँखों से सम्बंधित समस्या बढ़ती जा रही हैं| जिससे उनकी नजरों पर तो फर्क पड़ा ही है साथ ही साथ उनका नजरिया भी प्रभावित हुआ है| आज कल कुछ ऑनलाइन कंपनिया नजर को ठीक करने के फ्री में चश्मे का टेस्ट उपलब्ध करा रहीं है तो वही कुछ बेनाम कंपनिया लोगों को अदृश्य चश्में भी पहना रही हैं |  

आज अधिकतर लोगों की आँखों पर एक अदृश्य चश्मा लगा हुआ है| इस अदृश्य चश्मे की खाशियत यह है कि जिसकी आँखों पर यह चश्मा लगा होता है उसे भी इस बात का एहसास नहीं होता कि उसने एक खास प्रकार का अदृश्य चश्मा पहन रखा है| इस अदृश्य चश्में के कारण व्यक्ति को दुनिया उसी रंग में रंगी दिखाई देती है जिस रंग का वह चश्मा है| चूँकि चश्मा अदृश्य है इसलिए चश्में की बजाय केवल उसका प्रभाव दिखता है | लोगों के ऊपर इस अदृश्य चश्में का प्रभाव सिर्फ उनकी आँखों पर ही नहीं पड़ता बल्कि उनका पूरा व्यवहार तथा नजरिया भी परवर्तित हो जाता है| इस चश्में के कारण उन्हें एक ही तरह की बातें समझ में आती हैं और वे एक ही तरह की बातों को सुनना पसंद करते है| अगर कोई व्यक्ति उन लोगों के सामने चश्में के रंग से अलग कोई बात रखता है तो इन अदृश्य चश्में पहने हुए लोगों को वह व्यक्ति दूसरे गृह का प्राणी लगने लगता है|

 

इस अदृश्य चश्मे की एक खाशियत यह भी है कि यह व्यक्ति को एक काल्पनिक दुनिया में पहुंचा देता है जहाँ सत्य और तथ्य को कोई भी महत्त्व नहीं दिया जाता| व्यक्ति को यह काल्पनिक दुनिया ही वास्तविकता लगने लगती है और वह दोनों (सत्य और कल्पना) में अंतर करना भूल जाता है| इस अदृश्य चश्मे का प्रभाव इतना अधिक होता है कि अगर पहनने वाले को कोई यह एहसास कराये कि उसकी आंखो पर कोई चश्मा है तो वह इसे उतरने से भी कतराता है और वास्तविकता की बजाय कल्पना में ही रहना पसंद करता है|

 

आज जरुरत है कि हम अपनी तथा लोगो की नजरों से इस अदृश्य चश्मे को हटाये तथा वास्तविकता में जीने का प्रयास करें|

 

-विक्रम प्रताप सिंह

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