आखिर बेकसूर को किस चीज की सजा

Posted by Madhu Bhagat
January 21, 2017

Self-Published

जहां एक तरफ दंगल ने हिंदी सिनेमा के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए वही दूसरी तरफ दंगल में गीता फोगाट का किरदार निभाने वाली जायरा वसीम के कपड़ो और कई बड़े लोगो से मिलने  पर लोगो ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया हैं ।  फिल्म जनता को खूब पसंद आ रही हैं। इसको देखकर लड़कियो के जज्बे को सलाम किया जा रहा है,और फिल्म का डायलॉग “म्हारी छोरिया छोरों से कम हैं के” भी बहुत प्रचलन में आ गया है । इस सभी दृश्यों को देखकर ऐसा लगा जैसे देश में महिलाओ को बराबरी का दर्जा मिलेगा। लेकिन मेरा ये सोचना गलत सिद्ध हुआ । अभी -अभी सोशल मीडिया पर खबर आयी  कि जायरा वसीम के खिलाफ  कश्मीर में प्रदर्शन शुरू हो चूका हैं ।ये प्रदर्शन सिर्फ इसलिए है क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की । जिसे सुनकर बहुत अजीब लगा और ये सवाल जहन में आया कि क्या किसी को मुख्यमंत्री से मिलने का हक नही हैं ।

कश्मीर की रहने वाली दंगल अभिनेत्री जायरा वसीम ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से लोगों का  दिल जीत लिया, लेकिन कुछ कट्टरपंथियों की धमकियों का शिकार बनी । जायरा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात क्या कर ली, अलगाववादी हाथ धो कर उनके पीछे पड़ गए । इसके बाद जायरा को माफीनामा लिखना पड़ा । मैं आपसे पूछना चाहती हूँ कि आखिर उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात  कर कौन सा गुनाह कर दिया?  एक मौलाना साहेब ने जायरा के कपड़ों को आपत्तिजनक बताया जिसका करारा जवाब गीता फोगाट ने दिया ।  उन्होंने मौलाना साहेब की टिपण्णी को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि ऐसी बहुत सी मुस्लिम लड़कियां है जो बड़े स्तर पर पहुचकर देश  के लिए मैडल जीतती  हैं । वो सामाजिक बंधनो को तोड़कर सफलता की सीढ़िया चढ़ रही है। इस तरह उनके कपड़ो पर सवाल उठाना उचित नही है । इस सब बातो से ऐसा लगता है जैसे कि बेटियों की सफलता इन लोगो से बर्दाश नही हो रही हैं । इस लिए ये लोग ऐसे कह रहे हैं । आखिर वो कौन होते है हमें बताने वाले कि हमें क्या पहनना हैं क्या नही ।
इन विवादों को देखकर ये सवाल, जो आज दुनिया की हर एक लड़की पूछ रही है, क्या जायरा जो की मुस्लिम है तो क्या उन्हें अपनी जिंदगी अपने मुताबिक जीने का हक नही है । क्या एक मुस्लिम लड़की अपने सपनो को पंख नही दे सकती ?  क्या  किसी मुख्यमंत्री से मिलने का जुर्माना  माफीनामा देकर भरना होगा ।  जायरा की मेहनत को प्रोत्साहित  न कर उसके खिलाफ विरोध करना क्या ठीक हैं ?

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