कश्मीरी पंडितों का दर्द………..

Posted by Janmejay Kumar
January 29, 2017

Self-Published

19 जनवरी 1990 की घटना कश्मीर की इतिहास का सबसे दुखद अध्याय है। 19 जनवरी 1990 को नामुराद कट्टरपंथियों ने ऐलान कर दिया कि कश्मीरी पंडित काफिर है। इस ऐलान के साथ कट्टरपंथियों ने कश्मीरी पंडितों को कश्मीर छोड़ने और इस्लाम कबूल करने के लिए जोर-ज़बरजस्ती करने लगे। कट्टरपंथियों का आतंक कश्मीर मे़ बढता जा रहा था। नतीजतन मार्च 1990 तक लगभग 1 लाख 60 हजार कश्मीरी पंडितो को अपना घरबार छोड़कर कश्मीर से भागना पड़ा। मार्च 1990 तक कश्मीर में हिंदू समुदाय के हर वर्ग की बड़े पैमाने पर हत्याए हुई। जिसमें हिंदू अधिकारी बुद्धिजीवी से लेकर कारोबारी एवं अन्य लोग भी शामिल थे।
सत्ताईस साल पहले कश्मीरी पंडितों को दहशतगर्दो के चलते अपना घरबार छोड़ना पड़ा। कश्मीर की सुंदर और खूबसूरत वादियों में उन्होंने भी अपने सपनों को संजोया था, पर शायद ही आज भी वो सपना उनकी आंखों में दिखे क्योंकि 27 साल पहले जो उन्होंने खोया है और जो दर्द उन्होंने सहा है उसे भुलाया नहीं जा सकता है। करीब 4 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को उनके घर से भागने को मजबूर कर दिया गया जो कश्मीरी पंडित कश्मीर से भागकर देश के विभिन्न हिस्सों में चले गए, जहां उन्हें रिफ्यूजी कैंप में रहना पड़ा।
पिछले हप्ते गुरुवार को जम्मू कश्मीर की विधानसभा ने जो प्रस्ताव पारित किया है, उसके तहत कश्मीरी पंडितो और दूसरे विस्थापितों को कश्मीर घाटी में वापस लाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कश्मीर घाटी में लोगों की वापसी हो, इसके लिए बेहतर माहौल तैयार करने की जरूरत है। मगर क्या इस प्रस्ताव पर पूर्ण रुप से अमल किया जाएगा?
विस्थापन के बाद शायद ही कोई परिवार होगा जो घाटी में वापस आया होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह है कश्मीरियत के नाम पर अक्सर होती आ रही हिंसा। जिसकी वजह से लोग घाटी में वापस आना नहीं चाहते हैं। सच तो यह है कि बुरहान वानी के इनकाउंटर के बाद हिंसा और डर की वजह से कश्मीरी घाटी के 600 कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
घाटी में कश्मीरी पंडितों एवं अन्य विस्थापितों को वापस लौटने की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही है। इसलिए इस संदर्भ में पीड़ितों से बातचीत किए बगैर कोई भी प्रस्ताव पारित करना या योजना बनाना अर्थहीन ही साबित होगी।

https://www.quora.com/Kashmir-Whats-the-story-of-the-Kashmiri-Pandits

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