प्रधानसेवक को खरीखरी

Posted by Raj Narayan
January 29, 2017

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हमारे माननीय प्रधानसेवक 28 फरबरी को एक विशाल किसानरैली को सम्वोधित करने बरेली आ रहे हैं। जबरदस्त तैय्यारियां चल रही हैं। लाखों की भीड़ जुटाने के फरमान जारी हो चुके हैं ।आपके शानदार उद्ववोधन पर प्रशंशको की तालियों की गड़गड़ाहट और घर घर मोदी के नारो की गूंज भले ही आपको और आपके कार्यकर्ताओं को उत्साहित करे पर यह आपकी वक्त्रृत्व कला की असली कसोटी नहीं है । पिछले दिनों जब हरियाणा जल रहा था और जाटों ने 36 हजार करोङ की सम्पत्ती फूंक दी और बेतहासा जान माल का भी नुकसान किया और पूरा देश आपके मन की बात सुनना चाह रहा था वहां आपके नेतृत्व और वक्तृत्व कला की असली परीक्षा और जरूरत थी पर अफसोस कि आप चूक गये। ऐसे समय याद आता है प्रिय बापू गांधीजी का प्रसंग,कि जब पूरा देश आजादी का उत्सव मना रहा था बापू दूर नौआखाली में बिना वयक्तिगत सुरक्षा की चिंता करे दंगो की आग बुझाने के लिये जान की बाजी लगाये थे । बिनोबा जी ने एक शब्द दिया था शांतीसैनिक। जरूरत इस बात की भी थी कि आपकी एक आवाज पर लाखों कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा लिये शांतीसैनिक की तरह अपने जाट भाइयों के बीच पहुंचते और उन्हें ऐसे देश विरोधी कृत्य ना करने के लिये राजी करते। आगे ऐसी परिस्थितियां ना आंये ऐसी कामना के साथ सुझाव के रूप में यह पत्र आपको प्रेषित है। जय हिन्द। देश में अच्छे दिन लाने के लिये आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिये तैयार इस देश का एक तुच्छ सेवक राज नारायण।

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