दिन प्रतिदिन बढ़ते रेल हादसे

Posted by adity agrawal
January 24, 2017

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आज उन मासूमों की जान जा रही है जिनकी कोई गलती नहीं थी जो देश का भविष्य थे। उन्हें किसी भी वाहन से यात्रा करना उतना सुरक्षित नहीं लगता था जितना की रेल से क्योंकि उन्हें रेल मंत्रालय पर अटूट विश्वास था। पर आज जो स्तिथि सामने आ रही है और रेल मंत्रालय की छवि जिस पाकर ख़राब हो रही है उससे सामान्य व्यक्ति का न सिर्फ भरोसा टूटा है बल्कि आज वह रेल से सफर करने में यह दुआ मांग रहा है कि हम सही सलामत घर पहुच जाएं बस!! रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने के रेल मंत्रालय के दावे आज फीके नजर आ रहे हैं। आज अगर नज़र घुमाकर देखें तो सिर्फ तीन चार माह में ही चार बड़े रेल हादसे हुए हैं। और छोटे-छोटे हादसों का तो कोई लेख जोखा ही नहीं है।

आज आधी से ज़्यादा जनता के मन में यही सवाल रहता है कि क्या रेल में सफर करना सुरक्षित रहेगा? पिछले वर्ष नवम्बर २०१६ के हादसे को लोग भुला ही नहीं पाए थे कि शनिवार की रात एक और बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में आंध्र प्रदेश के विजयनगर जिले में हीराखंड एक्सप्रेस के इंजन सहित ९ कोच पटरी से उत्तर गए जिसमें तक़रीबन ४२ लोगों की मौत हो गई और ५० लोग घायल हो गए, जिनमें से कुछ की अभी तक गंभीर हालात बनी हुई है। इस दुर्घटना के पीछे रेलवे ने किसी साजिश का संदेह बताया था क्योंकि ट्रेन जगदलपुर से भुवनेश्वर जा रही थी और हादसा कुनेरू स्टेशन के समीप हुआ जो की नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता है, परंतु उड़ीसा पुलिस ने जांच के बाद यह ख़ारिज कर दिया कि इसमें नक्सलियों का हाथ था।
गत वर्ष नवम्बर में कानपुर के पास एक बड़ा रेल हादसा हुआ था, जिसमें लगभग १५० लोगों की जानें गयी थी। तब पटना- इंदौर एक्सप्रेस के १५ कोच पटरी से उतरे थे। उससे पहले मार्च में जनता एक्सप्रेस पटरी से उत्तर गयी जो कि देहरादून से वाराणसी जा रही थी, जिसमें तकरीबन ३४ लोग मरे गए थे।
सिर्फ यात्रियों से भरी ट्रेन ही नहीं पलटी हैं बल्कि मालगाड़ी भी पलट चुकी है जिसमें जान माल की हानि तो नहीं हुई परंतु यह सभी हादसे हमारे रेल मंत्रालय के लिए बड़ी शर्मनाक बात है। रेल मंत्री अपना दुःख जताने के लिए मृतकों के लिए मुआवजा घोषित कर देते हैं और घटनास्थल का जायजा लेने आ जाते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि क्या उनके पैसे देने से उस परिवार का वह सदस्य वापिस आ सकता है जो आपकी लापरवाही से अपनी जान गवां बैठा है। रेल मंत्रालय पर लोगों का भरोसा तभी दुबारा कायम हो पाएगा जब वह रेल सुरक्षा की विफलताओं की जांच करेगा और पता लगाएगा आखिर क्यों दिन प्रतिदिन इतने हादसे बढ़ रहे हैं।

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