नोटबंदी हुई पूरी तरह से फेल

रिज़र्व बैंक को अब तक करीब 15 लाख करोड़ रुपए के पुराने 500 और 1000 के नोट मिलने का अनुमान है। 8 नवंबर को घोषित नोटबंदी के ज़रिए करीब 15 लाख 40 करोड़ रुपए के पुराने नोट हटाए गए थे।

सरकार का दावा था कि करीब 4 से 5 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट वापस नहीं आ पाएँगे और वह इतनी कीमत के नए नोट छाप सकेगी लेकिन अब लग रहा है कि उसे बुरी तरह से नाकामी हाथ लगी है।

तकरीबन सारे नोट आना नोटबंदी की पूरी तरह से असफलता है और पीटीआई के मुताबिक इसके बचाव में वित्त मंत्रालय का कहना है कि हो सकता है कई जगह कुछ नोट दो-दो बार गिन लिए गए हों। यही कारण है कि नोटों की दोबारा गिनती कराई जा रही है।

वित्तमंत्री अरुण जेटली भी इस बात से इन्कार नहीं कर रहे हैं कि लगभग सारे हटाए गए नोट वापस आ चुके हैं। हालाँकि उन्होंने अभी यही कहा है कि उन्हें ठीक संख्या का पता नहीं है।

अभी तक सरकार और रिज़र्व बैंक दोनों ही 30 दिसंबर तक के आंकड़े ज़ारी करने बच रहे हैं और इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है कि पुराने हटाए गए नोटों में से कितने वापस आए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, 14.5 लाख करोड़ से  15 लाख करोड़ रुपए के बीच के नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं और ये सिलसिला अभी ज़ारी है। रिज़र्व बैंक पूरा हिसाब-किताब करने में जुटा है।

नोटबंदी के असर को लेकर अब राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी आशंका ज़ाहिर कर दी है। राष्‍ट्रपति ने कहा है कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पर अस्थाई असर पड़ सकता है।

अमेरिका के प्रमुख अर्थशास्‍त्री स्टीव एच. हांके ने भी कहा है कि नोटबंदी की वजह से भारत 2017 में आर्थिक वृद्धि के मामले में नेतृत्व के मंच से नीचे खिसक सकता है।

अभी तक के जो आंकड़े मिले हैं वो 10 दिसंबर तक के ही हैं जिनके मुताबिक करीब 12.44 लाख करोड़ मूल्य के नोट पक्के तौर पर वापस आ चुके हैं। उसके बाद के 20 दिनों का हिसाब अभी होना बाकी है। अनुमान है कि 30 दिसंबर तक करीब 14 लाख 97 करोड़ रुपए मूल्य के पुराने नोट वापस आ चुके हैं।

नोटबंदी के आखिरी दिन रिज़र्व बैंक ने सभी बैंकों से पुराने नोटों का ब्यौरा तैयार करने को कहा है लेकिन नोटबंदी की नाकामी को देखते हुए ऐसा लग नहीं रहा है कि सरकार या रिज़र्व बैंक को पूरे आँकड़े पेश करने की कोई जल्दी है।

वैसे तो अभी भी कुछ विशेष परिस्थितियों में लोग पुराने नोट बदलवा सकते हैं जिसका एक मतलब ये भी है कि रिज़र्व बैंक को मिले पुराने नोटों की तादाद में कुछ बढ़ोतरी और होगी यानी नोटबंदी की असफलता और बढ़ेगी।

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