पंजाब में मुद्दे कम और चुनाव को लेकर जश्न ज्यादा हैं कही शराब बट रही हैं कही लड्डू,कोई विदेश से भी आ रहा हैं, लेकिन पंजाब पिछड़ गया हैं, अब तो इसे उड़ता पंजाब भी कहा जाने लगा हैं.

Posted by हरबंश सिंह
January 22, 2017

Self-Published

कही भी किसी भी प्रदेश में चुनाव हो तो, कुछ ऐसी तस्वीर सामने आती हैं की एक नेता होगा, कुछ सभा होगी, लोग जुडेगे,चुनावी वादा होगा और लोग मत डालकर अपना दायतत्व पूरा कर देंगे और एक सरकार चुन ली जायेगी, अब अगर में ये कहूं,की पंजाब एक ऐसा प्रांत हैं जहाँ विदेशों में बैठा पंजाबी भी यह तय करता हैं की इस बार किस पार्टी या विधायक को वोट देना हैं, बाकी प्रांत की तरह यहाँ भी धर्म मौजूद हैं लेकिन संज्ञा कुछ अलग तरह से हैं, इस रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में सबसे ज्यादा लो कास्ट के लोग मौजूद हैं पर इनकी गिनती चुनावी विधायक के रूप या इनकी तकलीफ का जिक्र तक,चुनाव में नहीं होता अगर होता भी हैं तो बहुत कम हैं. यहाँ कोई भी ऐसी पार्टी मोजूद नहीं है जो लो कास्ट का नेतृत्व करने का भरोषा देती हो. यहाँ, सबसे बड़ा मसला शराब और नशा इसी के तहत सुरक्षा, ये सब मुद्दे हैं लेकिन यहाँ अक्सर चुनावी सभा में सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे पर इल्जाम ही लगा कर भाषण खत्म कर दिया जाता हैं, ना उम्मीदवार ये कहता हैं की वह क्या करेगा और ना ही कोई उससे पूछता हैं की आप काम क्या करेंगे ?

चुनावी घोषणा पत्र, एक आम गाव का नागरिक इसके बारे में कम ही जानता हैं.  हां यहाँ हर चुनाव में लड्डू ज़रुर बांटे जाते हैं,लेकिन पहले इन्हें विधायक के वजन के बराबर तोला जाता हैं. अब आप सोचिये, की गाव के एक पंजाबी नागरिक का अंदाजा कितना सही होगा, विधायक को जाचने और परखने का, ये तो इनके वजन का अनुमान भी लगा लेते हैं और यहाँ नेता होता भी बहुत वजनदार हैं, गाडी की बीच वाली सीट पर पूरा फैल कर बैठता हैं, भाई नेता हैं तो फैलेगा तो सही. ये भारी भरकम नेता हर पार्टी में पूरी तरह से मौजूद हैं, यही कारण हैं की चुनाव आने से पहले अक्सर, हलवाई ये दुआ करता हैं की इस बार उम्मीद वार का वजन पिछले चुनाव से ५-१० किलो बड़ जाये,अब अगर उम्मीद वार सकता पक्ष का हैं तो ये दुआ यकीनन क़बूल होती हैं नहीं तो ज्यादा मायूसी भी हाथ नहीं लगती, कुछ ५-६ किलो वजन तो बड़ ही जाता हैं.

शिरोमणि अकाली दल बादल, अक्सर इनके नेता, चुनावी रैली में, लोक लुभावने ऐलान करते है, इस रैली में खुद, पंजाब राज्य के मुख्य मंत्री, श्री सुखबीर बादल , अपने चुनावी क्षेत्र जलालाबाद में, यहाँ हर किसी को पक्का मकान, जमीन रहित को मकान के लिये जमीन, हर गावँ में खेल का स्टेडियम, इत्यादि बनाने का ऐलान कर रहे है मतलब एक विधानसभा क्षेत्र में करोड़ो की लागत से एक आम नागरिक के जीवन में सुधार लाया जायेगा, अब पंजाब में कुल 117 विधान सभा क्षेत्र है, सोचिये, कितना पैसा आने वाले सालों में ये पार्टी खर्च करेगी, अब पैसा कहा से आएगा, इस का जवाब एक नेता के पास अक्सर नहीं होता ? लेकिन कुछ ऐसे ही वादे इस पार्टी ने पिछले चुनाव में भी किये थे, मसलन इनके २०१२ के चुनावी घोषणापत्र के अनुसार, ये हर विधार्थी को लैपटॉप देंगे, ५ मरला जमीन जिसके पास जमीन नहीं हैं, १० लाख नयी नौकरी,मोहाली और अमृतसर नया आईटी हब बनेगा, लोकयाकुत का गठन, खेती को अति आधुनिक बनाना, इत्यादि. उस समय ये भी, एक नारा प्रचलित हुआ था, की पंजाब को कैलिफ़ोर्निया बना दिया जायेगा, में भी इनके व्यक्तिगत प्रभाव में था,सारी जॉब साइट पे अपना रिज्यूमे पोस्ट कर दिया था, पर पिछले ५ साल मैं कभी भी मोहाली या अमृतसर से किसी भी आईटी कंपनी का फोन नहीं आया, फोन कहा से आयेगा, यहाँ आईटी तो क्या, किसी भी व्यवसाय में रोजगार पैदा नहीं हो पाये. सच्चाई ये हैं की आज जमीनी स्तर पर और हर क्षेत्र में पंजाब,बहुत पिछड़ गया हैं. लेकिन पंजाब के बादल दल के नेता अक्सर विदेशों में जाते रहते हैं, तो शायद हो सकता हैं की इन्होने २०१२ में कुछ इसी तरह के कैलिफ़ोर्निया की बात की हो. लेकिन २०१७, मैं एक चुटकला आम हो गया हैं की इस बार ये पार्टी पंजाब से सीधी सडक कैलिफ़ोर्निया के लिये बना देगी,जिस पर बिना रोक टोक आप आ जा सकते हैं, नीचे लिखा था,शर्तें लागू. इस तरह के और भी व्यंग बदस्तूर जारी हैं .

आज पंजाब, अपनी जगह से लड़ खड़ा रहा हैं, अब भाई उडने के लिये जमीन तो छोडनी ही पडेगी, ये, हकीकत हैं, मेरी एक रिश्तेदार से बात हुई जो अभी एक विद्यार्थी हैं और कॉलेज में ऐडमिशन ले चुके हैं, गाव से हर रोज, ५० किलोमीटर जाने का और इतना ही आने का, जमीनी फासला तय करते हैं, लेकिन किसी भी हालत में ये परिवार अपने,इकलोतै बेटे को कॉलेज के होस्टल में नहीं भेजना चाहते, कारण था नशा. नशा यहाँ सरेआम बेचा जाता है, बेचने वाले लोग यहाँ वहां कॉलेज के आस पास घुमते रहते है. ये इस तरह से प्रयाप्त है जिस तरह पारले के बिस्कुट, इसको नाम भी दिया गया हैं “चिटा” मतलब सफेद,मतलब ब्राउन सुगर. कुछ दिनों पहले, बच्चे को खासी हो गयी थी, तो दुकान से कोरेक्स की दवाई लेने चला गया, ये डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन लिखवा कर लाओ और फिर ही मिलेगी, लेकिन एक जान पहचान के कारण यहाँ से दवाई मिल गयी, अक्सर पुलिस इन मेडिकल स्टोर पर छापे मारती रहती है लेकिन ये मेडिकल स्टोर बदस्तूर जारी है मसलन गाव मैं जिसकी आबादी ५०० या ६०० भी होगी, वहा उतने ही मैडिकल स्टोर होंगे जितने की किराना की दुकान होगी. जनाब, हर तरह का नशा आज मौजूद हैं और मिलता भी बड़ी आसानी से हैं. अब आप सोचिये, नशा करने के बाद ये नहीं पता होता की कुत्ता मुंह चाट रहा हैं या पुलिस डंडा मार रही हैं, तो इस बेहोशी की हालत में, किस तरह कोई सुरक्षित हैं, खासकर महिला, यहाँ स्कूल हो या कॉलेज, घर की महिला दुपहर से पहले अपने घर में होती हैं. यहाँ, नशा एक सामाजिक बुराई तो हैं ही, लेकिन गुनाह का सबसे बड़ा कारण बन गया हैं, आकडों के लिये,आप गूगल कीजियेगा.

अब अगर में ये कहूं की कट्टर विरोधी राज्य की पार्टिया शिरोमणि अकाली दल बादल, शिरोमणि अकाली दल अमृतसर, कांग्रेस राज्य इकाई या आम आदमी पार्टी की राज्य इकाई का चेहरा बन चुके भगवंत मान, ये सब एक ही तरह के हैं, तो शायद आप यकीन ना करे, जी हां, इन सारी जगह पर आज जट सिख का दब दबा हैं, और यहाँ सिख धर्म की मौजूदगी भी हैं जो जात पात को पूरी तरह नकारता हैं. गाँव के गुरुद्वारों में एक ही पंगत में बैठ कर लंगर खाया जाता हैं और यही एक कारण हैं की आज सही मायनो में, यहाँ जट सिख नेता को चुनौती देने वाला कोई नहीं, जो एक सिख के रूप में खुद को पेश करता हैं, जब की बगल का राज्य हरयाणा जहां जाट मौजूद हैं पर सामाजिक तोर पर इनके विरोध में दूसरी जात के नेता भी हैं, अब जब सब जट ही हैं तो चुनाव में ढोल नगाड़ा सब बजेगा, मेरा मतलब शक्ति प्रदर्शन और घर की निकाली हुई देसी शराब से हैं, जो खिलोनो की तरह बाटी जाती हैं, मजदूर वर्ग, इस समय दिहाड़ी की कीमत डबल कर देते हैं क्युकी शराब तो उम्मीदवार की तरफ से हैं. लेकिन ये भी हकीकत हैं, की जट सिख किसान और मजदूर द्वारा आये दिन,आत्म हत्या की खबर अखबार की सुर्खिया बनती रहती हैं.

अब आखिर में जो एक पहलू पंजाबी मत को प्रभावित करता हैं वह हैं NRI, यहाँ हर राज्य इकाई पार्टी की अमूमन हर देश में इनकी इकाई हैं, सोशल मीडिया और लोकल अखबारों में इनके द्वारा अक्सर पंजाब के उम्मीद वार के पक्ष में प्रचार किया जाता हैं, कब्बडी करवाई जाती हैं, उस हर तार को छेड़ा जाता हैं जिससे ये अपनी मौजूदगी यहाँ दर्ज करवा सके, इस समय,अमेरिका, कनाडा और यूरोप में कड़ाके की ठंड होने से, इस बार ये खुद अपनी अपनी पार्टी का प्रचार करने आ रहे हैं और इस बार नारा दिया गया हैं “चलो पंजाब”  लेकिन कही भी ये सवाल मौजूद नहीं हैं की जिस बेरोजगारी के चलते इन्हें पंजाब छोड़ना पड़ा था उसमे ये किस तरह सहयोग करेंगे, मसलन कुछ, १-२ महीने में ये चले जायेगे और सरकार चुन ली जायेगी,लेकिन लोगो की मुसीबत कितनी हल हो पायेगी, ये सवाल बना रहेगा. धन्यवाद.

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