पद्मावतीःएक प्रेम कथ

Posted by Janmejay Kumar
January 31, 2017

Self-Published

मशहूर फिल्म मेकर  संजय लीला भंसाली के साथ जो हुआ उसने पूरे भारतीय फिल्म जगत में हड़कंप मचा दी। राजस्थान के जयपुर में उनकी फिल्म पद्मावती की शूटिंग चल रही थी। वहां राजपूत समाज से जुड़े एक संगठन करणी सेना ने उन पर हमला कर दिया। करणी सेना ने आरोप लगाया कि भंसाली फिल्म के लिए ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़-छाड़ और उन्हें तोड़ मरोड़ कर पेश करने की कोशिश रहे हैं । इसके बाद पूरा बॉलीवुड एकजुट होकर इसके विरुद्ध में उतर आया और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने तो अपने नाम से अपना सरनेम हटाने की बात कह दी। इस घटना ने पूरे बॉलीवुड को झकझोर कर रख दिया है ।

कुछ दिन पहले ही मीडिया में ख़बर आई थी कि संजय लीला भंसाली अपने सेट पर सुरक्षा बढ़ाने वाले हैं ताकि कोई किरदार लोगों के सामने ना आए । इसके बाद करणी सेना के द्वारा उनके सेट पर हमला बहुत कुछ कहता है। करणी सेना के द्वारा पुरे सीट पर तोड़फोड़ और भंसाली जी को जो चाटा पड़ा, वो वायरल वीडियो में सब कुछ  साफ दिखाई दे रहा है। करणी सेना निडर कानून को अपने हाथ में लेते दिख रही है, लेकिन इसके बाद अतीत का एक किरदार हर लोगों की जुबां पर है कि आखिर रानी पद्मवती कौन हैं । अतीत में झाक कर  देखा जाए तो 15-16वी सदी में यह किरदार सबसे पहले चर्चा में आया । दरअसल मलिक मोहम्मद जायसी ने 1597 ईस्वी में “पद्मावत” नामक महाकाव्य की रचना की।

जायसी ने इस महाकाव्य में रानी पद्मावती और राजा रतन सिंह के प्रेम के बारे में वर्णन किया है । हांलाकि बहुत सारी इतिहासकार इस बात को नहीं मानते हैं । इस महाकाव्य के अनुसार रानी पद्मावती, पद्मिनी के नाम से भी जानी जाती थीं । रानी पद्मावती सिंहल द्वीप(श्रीलंका) के राजा गंधर्व सेन की कन्या थी । रानी पद्मिनी का विवाह चित्तौड़ के राजा रतन सिंह राजपूत से हुआ था । रानी पद्मिनी अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थी । उनके सौंदर्य  की गाथा चारों दिशाओं में फैली थी ।

उस दौर मे दिल्ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी था । उनके सौंदर्य की चर्चा सुन  अलाउदीन खिलजी, रानी पद्मावती को पाने के लिए बेचैन हो उठा । रानी पद्मावती को पाने के ख्याल से अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तोड़ पर हमला कर दिया । लेकिन कोई सफलता हासिल नहीं हुई ।  उसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा और राजा रतन सिंह को धोखे से बंदी बना दिल्ली ले गया । रानी पद्मावती ने गोरा बादल की मदद से राजा  रतन सिंह को भगाने में कामयाब हुई । जिस समय रतन सिंह दिल्ली में बंदी थे, कुंभलनेर का राजा देवपाल रानी पद्मावती के पास प्रेम प्रस्ताव भेजा था । जब राजा रतन सिंह को यह बात पता चली तो कुंभलनेर जाकर राजा देवपाल के साथ युद्ध किया और देवपाल को मारकर चितौड़ वापस लौटे । लेकिन युद्ध के दौरान बुरी तरह घायल होने के कारण चित्तौड़ लैटते के बाद उनकी मृत्यु हो गई। तत्पश्चात  रानी पद्मावती ने उनके शव के साथ चितारोहण कर लिया । अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मावती को पाने के मकसद से फिर चित्तौड़ पहुंचा, पर उसे कुछ हासिल नहीं हो सका । उसके आने से पहले ही राजा रतन सिंह की मृत्यु हो चुकी थी और रानी पद्मावती ने  चितारोहण कर लिया था।

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