आइये पान पर चर्चा करें, चूना अपने हिसाब से लगाएं।

Posted by Sunil Jain Rahi in Hindi, Society
January 1, 2017

देश की सबसे बड़ी समस्‍या है-चर्चा। चर्चा के लिए स्‍थान ढूंढे जा रहे हैं। पहले गांव की चौपाल पर चर्चा के साथ-साथ लट्ठ भी चलते थे और फटाफट फैसला भी हो जाता था। पहले कुछ ही स्‍थानों पर चर्चा की जाती थी। अब चर्चा के विकास के साथ-साथ चर्चा के स्‍थान भी बदलने लगे हैं। प्रजातंत्र में चाचा और चर्चा दोनों का ही महत्‍व है। बाप बेटे की चर्चा तो हो नहीं सकती। चर्चा के लिए घर का आंगन छोटा पड़ने लगा है और चौपाल पर चर्चा के लिए माइक की आवश्‍यकता पड़ने लगी है। अब बिना माइक के चर्चा का कोई महत्‍व नहीं रह गया है। अब तो माइक के साथ-साथ चर्चा में चाचा और भतीजा का फोटो भी दिखाई देना चाहिए, वरना संसद की कार्यवाही की तरह चर्चा अधूरी रहेगी।

चर्चा के स्‍थान के महत्‍व की कमी को देखते हुए चर्चा के उचित स्‍थान की तलाश जारी है। कुछ दिनों पहले चाय पर चर्चा शुरू हुई। लेकिन सवाल यह उठने लगा कि यह तो अब पुराना रिवाज हो गया है, इसलिए चर्चा का स्‍थान अलग होना चाहिए।

अब पान पर चर्चा की बात चलने लगी है। पान भी कई तरह के होते हैं। मीठा पान, कलकतिया पान, इन्‍दौरी पान, गुलकन्‍दी पान, पान मगही, किमामी पान और न जाने कितने तरह के पान। पान पर चर्चा की जाए। हां ये अच्‍छा लगा-पान पर राजनीतिक चर्चा की जाए और यह भी देखा जाए कि पान खाकर एक-दूसरे पर कितनी दूर से थूका जा सकता है। कौन कैसे निशाना लगाता है, कैसे हमला पान खाकर करता है।

आजकल हर चैनल कहा रहा है कि फलाने नेता ने फलाने नेता पर निशाना लगाया, हमला किया, लेकिन इसमें आज तक कोई भी घायल नहीं हुआ और न ही कोई श्‍मशान गया। चाय में तो एक ही संभावना है कि आप उसमें चीनी कम कर सकते हैं, लेकिन फीकी चाय पर तो चर्चा हो नहीं सकती। वैसे फीके लोगों की संख्‍या काफी बढ़ रही है और इसीलिए फीकी पीने वाले की संख्‍या में बढ़ोतरी भी हो रही है। यह दीगर बात है कि आलस्‍य के कारण उन्‍हें फीका होना पड़ा और फीकी चाय पीनी पड़ रही है।

यह सुझाव बड़ा अच्‍छा आया है। इस सुझाव से सभी राजनीतिक दल सहमत हैं। पान पर चर्चा की जाए। पान पर चर्चा का आशय है कि आप पान खाते-खाते या पान बनाते समय चर्चा कर सकते हैं। इस चर्चा में यह तय करना होता है कि कौन किस पर कैसे थूकेगा। कौन किसको कितना चूना लगायेगा, कत्‍थे के इस्‍तेमाल पर रोक लगानी चाहिए या नहीं, कत्‍था लगाने से दाग गहरे हो जाते हैं, ज्‍यादा गंदे दाग होते हैं। उन्‍हें छुड़ाना चरित्र पर लगे दाग को छुड़ाना जैसा होता है।

पान वाला यानी एंकर कौन होगा। पान पर चर्चा के दौरान स्‍थान का चयन करना बड़ा मुश्किल काम है। पान की दुकान पर चर्चा हो नहीं सकती। छोटी सी पान की दुकान पर चार-पांच लोगों से ज्‍यादा चर्चा नहीं कर पाएंगे। हां अगर कोई चैनल पान पर चर्चा करता है तो वह आमंत्रित अपने सिलेक्‍टेड श्रोताओं के बीच चर्चा करवा सकता है।

वैसे भी अब जमाना आ गया है कि पान पर ही चर्चा की जाए। हर कोई एक-दूसरे पर थूकने को तैयार है, चूना हर किसी के पास है, लगवाने वाला चाहिए, आप चूना किसे लगाना चाहते हैं-सरकार, व्‍यापारी, भाई, भतीजा, अध्‍यक्ष, अफसर, नेता बाबू, बाबा, सोसायटी या फिर किसी अन्‍य संस्‍था, व्‍यक्ति अथवा देश को। आप चूना लगाने के लिए स्‍वतंत्र हैं, किसको कितना चूना लगाया जाए, आप पर निर्भर है। आप संबंधों के हिसाब से चूना लगा सकते हैं। पान खायें या न खायें लेकिन चूना अवश्‍य लगायें।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।