मेरे गाँव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, नशा, ये आम समस्या है, लेकिन, इस पंजाब राज्य चुनाव से कुछ बदल जायेगा, इसकी उम्मीद कम ही दिख रही है.

Posted by हरबंश सिंह
January 23, 2017

Self-Published

मेरा गाँव, बुरज हमीरा, ये एक आम सा ही गाँव है जिस तरह पंजाब के और गाँव है, यहाँ एक प्राइमरी तक का स्कूल है, एक मेडिकल स्टोर है और यहाँ इस मेडिकल स्टोर की दवाइयों का जानकार ही, डॉक्टर है, जो हर मरीज को, हर मरज की दवाई भी देता है और जहाँ जरूरत लगे वहा ये मेडिकल इंजेक्शन भी लगा देता है, यें हालात हर गाँव के है यहाँ अक्सर जब गुरुद्वारे से गुरबाणी की आवाज आती है, सुबह प्रातः काल हो जाती है लेकिन इसकी शाम भी, अँधेरा होने से पहले ही हो जाती है, दरवाजे बंद कर लिये जाते है और अँधेरा होने के बाद, किसी को भी घर से बाहर जाने की सलाह नहीं दी जाती, पंजाब के किसी भी गावँ में है, घर की औरतों को, अक्सर शाम के 5 बजे तक घर वापस आने की नसीयत दी जाती है, सर्दियों में ये समय कुछ 3-4 बजे का हो जाता है. यहाँ, मैंने व्यक्तिगत रूप से, पुलिस को कभी शाम में या रात को, मेरे गाँव में, कभी भी गस्त लगाते हुये नहीं देखा, हाँ ये, दिन में किसी रोड पर नाका लगाकर अक्सर खड़े देखे जाते है जहाँ ड्राइवर के लाइसेंस की ही पूछ ताछ होती है.

अब अगर मेरे गाँव के पास के बाजार की बात करे, जिसका नाम निहाल सिंह वाला, जिसे पंजाबी में मंडी कहा जाता है और इसका विस्तार कुछ सड़क के किनारे की दुकाने होगी मसलन 1-1.5 किलो मीटर जहाँ जीवन की जररूत का सामान मिलता है और कुछ हस्पताल भी है, लेकिन डॉक्टर के पास डिग्री है या नहीं, इसका प्रमाण कही मिलता नहीं और ना ही कोई पूछता है, ये मंडी करीबन 39 गावँ को जोड़ती है, मतलब अगर आप के घर में शादी है तो खरीद दारी यहाँ से होगी और अगर कोई बीमार है तो सबसे पहले मरीज को यहाँ ही लाया जायेगा और अगर ज्यादा हालात खराब है तो यहाँ से डॉक्टर, मरीज को 80 किलोमीटर दूर लुधियाना भेज देता है. अब हैरानी की बात ये भी है की निहाल सिंह वाला एक विधान सभा इलाका है, लेकिन यहाँ शायद ही कोई कॉलेज हो, मेडिकल या इजनिरियग कॉलज, का तो सवाल ही नहीं उठता, यही हालात पास के विधान सभा इलाका भदौड़, रामपुरा, रायकोट, इत्यादि के है, हाँ या शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा जैसी मुलभुत सुविधायों की कमी है लेकिन शराब का ठेका हर दूसरे या तीसरे गावँ में बदस्तूर जारी है. और मेडिकल स्टोर हर गाँव में मौजूद है. हाँ, एक बात लिखना भूल गया, निहाल सिंह वाला में एक पुलिस स्टेशन भी है, जहा कर्मचारी कुछ २०-३० होंगे, अब सोचिये ये पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था किस तरह बना कर रख सकते है.

अब जब मैंने, मेरे गाँव की और इसके विधान सभा क्षेत्र की रूप रेखा बता दी है, जिससे ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं, की आज 69 साल की आज़ादी के बाद भी, पंजाब के बहुताय इलाक़ो मैं जीवन जरूरियात की सुविद्याओं , से आज भी एक पंजाबी नागरिक वंचित है. खासकर, शिक्षा, ये एक ऐसा दीप है जो अपने ज्ञान की रौशनी से, आस पास भी उजाला कर देती है, लेकिन इसकी लोह, पंजाब के, मेरे गावँ, बाकी गावँ में, बहुत मद्धम है. मसलन, 1987 में, गावँ के जिस सरकारी स्कूल के टीचर, अक्सर मुझ से , हमारे घरों से, चाय के लिये दूध मंगाते थे, हद तो तब हो गयी, जब हमसे, खाने के लिये एक देशी मुर्गा मंगवाया था और ये बदस्तूर आज भी जारी है, इसलिये गावँ के वह घर, जो अपने बच्चो को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सकते है , वह सरकारी स्कूल से कनी ही काटा करते है, लेकिन, प्राइवेट स्कूल मतलब इंग्लिश माध्यम, जहाँ आज भी टीचर इंग्लिश को पंजाबी में ही पढ़ाती है, इसी की वजह से मैंने अपने भांजी और भांजे का एडमिशन यहाँ से हटाकर, निहाल सिंह वाला के, सीबीएसई स्कूल में करवा दिया, लेकिन इस स्कूल की पढ़ाई भी शहर के स्कूल की पढ़ाई की तरह तो नहीं ही है, पर, यहाँ एक सुरक्षा भी मुद्दा है, मसलन मेरी भांजी, आज ११ वी कक्षा की छात्रा है, स्कूल की, बस, स्कूल छूटने के बाद, बच्चो को घर छोड़ देती है लेकिन अगर आप को, प्राइवेट ट्यूशन करना है, तो किस तरह एक अकेली लड़की, सफर कर सकती है ? कुछ, ३-४ लड़कियों का साथ होना चाहिये, लेकिन अगर ये सब साथ भी है, फिर भी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं. आज, इसी कारण से सर्दियों में दिन छोटे होने से, भांजी का ट्यूशन बंद करवा दिया गया है. यहाँ ज्ञात रहे, की मेरे गाँव में आज भी एक ही बस, सुबह आती है और शाम को इसकी वापसी होती है, मुख्य आवा जावी का साधन, तीन टायर वाला टेम्पो ही है, जिस का अंतराल १ घंटे पर है और ये निहाल सिंह वाला से मेरे गाँव का सफर जो कुछ 7-8 किलोमीटर का अंतराल है उसे तय करने में 45 मिनिट का समय लेता है, अब यहाँ सुरक्षा के लिहाज से, एक अकेली महिला की आवा जावी पर रोक ही लगाना बेहतर समझा जायेगा.

एक और जरूरी बात जो आज पंजाबी नागरिक के जीवन को प्रभावित कर रही है, उच्च शिक्षा, जिस के लिये किया लड़का और लड़की, हर किसी को शहर का रुख करना पड़ता है, जो नहीं करते या जिन्हे इसकी इज्जात नहीं मिल पाती, उनका आगे का पड़ने पर यहाँ पूर्ण विरनाम लग जाता है, लेकिन जो हिम्मत करते है, मसलन, मेरे गाँव के लिये, उचच शिक्षा का मतलब लुधियाना या चंडीगढ़, इसकी दुरी को देखते हुये, अक्सर छात्र को वही रहना पड़ता है, जिस के तहत, घर से दूर, एक होनहार विद्यार्थी के , नशे की चपेट में आने के आसार बड़ जाते है, यहाँ सरकारी रिपोर्ट  मानती है की नशा पंजाब में एक गहरी समस्या है लेकिन ये कहा से आता है, इसके बारे में सरकार कुछ कहने में अक्सर हिचकिचाती रहती है. लेकिन, एक पंजाबी आम नागरिक की तरह, यहाँ मेरा मानना भी है की पंजाब के हर गाँव में मौजूद, मेडिकल स्टोर ही इसके लिये जिम्मेदार है.

मेरे गाँव में शिक्षा, सुरक्षा, नशा, स्वास्थ्य, इत्यादि मुलभुत समस्या आज भी मौजूद है जिसके चलते, आज भी एक आम नागरिक को खासकर महिला नागरिक को हर जगह अपने जीवन में समझौता करना पड़ता है, यहाँ सवाल भी नहीं करते, बेहतरी, खुद को सम्भालने में ही है, अब यहाँ, चुनाव है जो लगातार पिछले 69 सालों से एक आम जिंदगी की बेहतरी की बात करते रहते है, ये कही चुनावी मुद्दा होता है, घोषणा पत्र में भी मौजूद है और चुनावी भाषण में भी, लेकिन जमीन पर कभी भी इसे ईमानदारी से लागू नहीं किया गया, व्यक्तिगत रूप से, मुझे इन आने वाले पंजाब राज्य के चुनाव से कोई ज्यादा उम्मीद नहीं है, लेकिन देखते है चुनी हुई सरकार किस तरह एक आम जिंदगी को मुलभुत सुख सुविधा देने में कामयाब हो पाती है. धन्यवाद.

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