सर्दियों में सीजनल डिप्रेशन के शिकार होते बच्चें और बुजुर्ग

Posted by Kamal Joshi in Hindi, Mental Health, Specials
January 5, 2017

सर्दियों के मौसम में होने वाले परिवर्तनों के कारण बच्चों और बुजर्गों में सीजनल अफ्फेक्टिव डिसऑर्डर(एसएडी) होने का खतरा बढ़ जाता है।इस मौसम में ठण्ड के बढ़ने के साथ में सूरज की रोशनी सही मात्रा में नहीं मिलने के कारण हमारें शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक सिस्टम बिगड़ जाता है। जिस कारण हमारे नर्वस सिस्टम में पाये जाने वाले सेरोटोनिन और मेलाटोनिन नामक  केमिकल्स की मात्रा असंतुलित हो जाती है। न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में काम करने वाले केमिकल हमारे मूड और सोने-उठने की प्राकृतिक क्रियाओं को सामान्य रूप अंजाम देने में सहयोग करते है | इनकी मात्रा में कमी और अधिकता के चलते व्यक्ति सीजनल अफ्फेक्टिव डिसऑर्डर से ग्रसित हो जाते हैं।

एसएडी एक प्रकार का डिप्रेशन है। जो खासकर सही मात्रा में सूरज की रोशनी ना मिलने के कारण होता है। ठंड के दौरान दिन छोटे होने के साथ ही रात में तापमान गिरने लगता है। सूरज उगने के बाद ढलने में ज्यादा समय नहीं लगता और कोहरे के कारण सूरज की किरणे पूर्ण रूप से हम तक नहीं पहुँच पाती हैं। इसका असर हमारे शरीर के सिर्काडियन रिदिम सिस्टम पर पड़ता है। हमारे शरीर का प्राकृतिक क्लॉक सिस्टम होता है। जो हमारे पूरे दिन के 24 घंटें में सोने-जागने क्रियाओं को कराता है। सर्दियों में जब सही धूप नहीं मिल पाती है तो यह सिस्टम गड़बड़ा जाता है। जिस कारण सेरोटोनिन का लेवल कम और मेलाटोनिन का लेवल बढ़ जाता है | मेलाटोनिन नींद के लिये लिये जिम्मेदार होता है। जब इसकी मात्रा में वृद्धि होती है तो ज्यादा नींद आने के साथ में सुस्ती भी  बढ़ जाती है। वहीं सेरोटोनिन की मात्रा तभी बढ़ सकती है जब धूप सही मिलें और इसी की कमी के चलते डिप्रेशन बढ़ता है।

बच्चों और बुज़ुर्गो को सूरज की रौशनी की ज़रूरत अन्यों के मुकाबले ज्यादा होती है इसीलिये यह डिप्रेशन उनको ज्यादा घेरता है। इस डिप्रेशन के लक्षण अन्य डिप्रेशन की तरह ही होते हैं। लेकिन इसकी एक ख़ास बात यह है यदि कोई व्यक्ति ठंड के दौरान ही हर बार डिप्रेशन का शिकार होता है और बाकि मौसम सामान्य हो जाता है तो वह व्यक्ति एसएडी से ग्रसित हो सकता है। इस बारे में वैदिक ग्राम के डॉक्टर प्रियुष जुनेजा का कहना है “कि सर्दियों के दौरान एसएडी डिप्रेशन के मरीजों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत बढ़ जाती है जिसमें सभी उम्र के लोग होते हैं लेकिन उनमें बच्चों और बुजर्गों की संख्या ज्यादा होती है”। इससे बचने का उपाय बताते हुए डॉक्टर प्रियुष जुनेजा कहा कि यदि मोर्निंग वाक,मैडिटेशन, साइकिलिंग और सही मात्रा में धूप ली जाये तो इस डिप्रेशन से बचा जा सकता है साथ ही उन्होंने कहा आयुर्वेद यह सलाह देता है कि इस दौरान दिनचर्या में खास ध्यान देना चाहिये और पंचकर्मा थेरपी के जरिये रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर डिप्रेशन के शिकार होने से बचा जा सकता है।

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