83 वर्षीय श्याम नारायण पंकज के शिक्षा-सेवा हेतु समर्पण के सामने उम्र बना बौना

Posted by Munna Bhai
January 17, 2017

Self-Published

जब उम्र बढ़ता है तो आदमी को सेवा एवं आराम की जरूरत महसूस होने लगता है लेकिन आदमी अपने जीवन के अंतिम दौर में ज़िंदगी को पछाड़ने पर तूल जाए तो उम्र बौना बन जाता है। कुछ ऐसा ही सिरहा पंचायत के 83 वर्षीय स्व. रामप्रसाद राम के सुपुत्र श्याम नारायण पंकज ने अपने पढ़ाने के जुनून द्वारा साबित कर दिया है ।

सिरहा पंचायत अवस्थित इटवा मध्य विध्यालय को उच्च विध्यालय में तब्दील करने हेतु प्रारम्भिक प्रयास किया जो आज पूरा हो गया। लेकिन स्कूल में शिक्षको की कमी ने इन्हे बच्चे को निशुल्क पढ़ाने हेतु प्रेरित किया। आज श्याम नारायण पंकज उच्च विध्यालय इटवा में रोजाना 2 घंटे समय देकर शिक्षको की कमी को पूरा करने का अपना अथक प्रयास कर रहे है।श्याम नारायण पंकज नवम वर्ग के बच्चों को अँग्रेजी एवं गणित पढ़ाते है। चूकीं इनकी पढ़ाने का माध्यम अँग्रेजी है इसलिए अँग्रेजी पर ज्यादा ज़ोर देते है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित यह विध्यालय ग्रामीण लड़कियों के लिए एक वरदान स्वरूप है जिसमे लगभग 200 बच्चों का नामांकन हो गया है। इसमे लड़कियों की संख्या ज्यादा है। पंकज जी इन बच्चियों के लिए एक तारणहार की तरह सेवा दे रहे है।  इटवा स्कूल उच्च विध्यालय में परिणत तो हो गया है लेकिन उच्च विध्यालय के योग्य शिक्षकों के अभाव ने बच्चो के भविष्य पर ग्रहण लगा दिया है। स्कूल में कुल 13 शिक्षक है जिसमे दो शिक्षक वर्षीय प्रशिक्षण हेतु बाहर है।वर्तमान शिक्षकों में मनीष कुमार,संजय कुमार, कमलेश कुमार यादव,अमरेन्द्र कुमार,बिभा कुमारी,प्रमोद कुमार कुशवाहा,सरिता कुमारी हाज़रा खातून,इमरान खातून,सुधा मिश्रा पंकज सर के विध्यालय को निशुल्क सेवा से काफी खुश और प्रेरित है।

सेकेंडरी की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात कोलकाता में रहे और अर्थोपार्जन करके पढ़ाई करते रहे। विदेश में पढ़ने के लक्ष्य को पूरा करने के जुनून ने खूब मेहनत करवाया और अंत में सीनियर कैम्ब्रिज ,ब्रिटेन में पढ़ाई पूरी करके स्वदेश वापस आ गए। विभिन्न कॉलेज में अध्यापन का कार्य किया लेकिन अपना जन्मभूमि के प्यार ने इन्हे घर वापस बुला लिया। शिक्षा- समर्पण एवं देश सेवा में इन्होने शादी भी नहीं किया। पकड़ीदयाल में एक प्राइवेट स्कूल में प्राचार्य का कार्य किया लेकिन शिक्षको द्वारा इन्हे उचित मान-सम्मान नहीं दिये जाने एवं इनकी विद्वता का सही प्रयोग नहीं किए जाने के कारण पद को त्याग दिया। अब खुद से घर-घर जाकर सिरहा ,इटवा,सुंदरपट्टी, पकड़ीदयाल, चोरमा के बच्चो को पढ़ाते है। इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये पैदल ही इन जगहों पर जाते है और बच्चे को पढ़ाते है। इनका दैनिक कार्यक्रम सूर्य निकलने से पहले शुरू होता है और सूर्यास्त के बाद तक जारी रहता है। हाथ में एक लाठी,कंधे पर गमझा ,पैर में हवाई चप्पल और कंधे पर एक छाता लटकते रहता है और पूरे शांतचित स्वभाव से टहलते हुये बिना किसी परेशानी के दिखाई दे देंगे। रोजाना लगभग 15-20 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते है और कभी आधुनिक सुविधाओ की चिंता नहीं किया। जब आप इनसे मिलेंगे तो आप से अँग्रेजी में ही बात करना चाहेंगे लेकिन गाँव में अँग्रेजी बोलने और समझने वालों की कमी रहती ही है। इसलिए बच्चो को अँग्रेजी बहुत ही शानदार तरीके से पढ़ाते है। इन्होने “सादा जीवन और उच्च विचार” को चरितार्थ किया है और आज सिरहा पंचायत के एक अमूल्य निधि के रूप में 83 वर्ष आयु में भी सेवा दे रहे है। बीमारियों को मात देने वाले श्याम नारायण पंकज युवाओं के भटकाव को लेकर चिंतित है और अच्छा होने की उम्मीद पर अपना व्यक्तिगत प्रयास कर बच्चो को संस्कारित एवं अनुशासित बना रहे है।

 

“ उच्च विध्यालय में परिणत होने से बहुत खुशी है लेकिन शिक्षको के अभाव से दुखी हूँ। शिक्षकों की कमी को श्याम नारायण पंकज जी काफी हद तक पूरा कर दिये है। मैं अन्य लोगों से भी आग्रह करता हूँ कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए आगे आए। ”

जय किशोर शाह

प्रधानाध्यापक ,मध्य विध्यालय इटवा,सिरहा पंचायत, बिहार ,भारत

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