31 की रात बैंगलौर ने मुझे बहुत डरा दिया

Posted by Shobha Shami in Hindi
January 3, 2017

31 तारीख की रात और शहर यही बैंगलौर। हम अपने कमरे में बैठे हुए थे, कुछ 11:30 बज रहे होंगे और अचानक से बहुत चीखने चिल्लाने की आवाज आई। दीदी ने कहा, “अरे यहीं यहां पास में एक पब है, आज सारे लोग वहीं मस्ती कर रहे होंगे। लेकिन शोर पब जैसा नहीं था और शोर भी नहीं था, वो दरअसल हुल्लड़ था जो पास आता लग रहा था।

12 बजे के आस-पास ऐसा लगने लगा जैसे दंगे हो गए हैं यहां, पूरी सड़क पर लड़कों के झुंड। वो बीच सड़क पर बम फोड़ रहे थे, गाने गा रहे थे, सीटियां मार रहे थे, बाइक्स पर घूम रहे थे। मोदी के भाषण के बाद कुछ ग्रुप्स जय मोदी, जय मोदी चिल्ला रहे थे। कुछ भारत माता की जय!! वो सब चीख रहे थे। जिसे सुन कर बहुत दिन बाद मुझे डर लगा। सच कहूं तो इतना डर तो तब भी नहीं लगा था जब कावेरी विवाद के बाद बंगलौर में मेरे घर के करीब वाले चौराहे पर टायर जल रहे थे।

अपनी खिड़की से झांक कर देखा, लड़कों की पूरी की पूरी टोली चली आ रही थी। मुझे मन किया कि नीचे जाकर इनके बेहुदेपन का वीडियो बनाऊं, लेकिन सच बताऊं तो डर लगा। बिल्डिंग में आमतौर पर ताला भी नहीं होता, मुझे लगा कि ये 10-20 लड़के घुस आए बिल्डिंग में तो हो गया काम।

ये जो पूरा माहौल मैंने उस रात देखा वो किसी भी एंगल से उत्सव या नए साल की खुशी नहीं थी। मुझे लगा कि लोग अपने घरों से अपनी ताकत दिखाने निकले हैं, भड़ास निकालने और हुड़दंग करने निकले हैं। उत्सव होता तो कोई परिवार, लड़कियां शामिल होतीं, बच्चे होते। पर ऐसा कुछ नहीं था। वो जो भीड़ थी वो उत्सव की नहीं उन्माद की थी जिसमें एग्रेशन था फ्रस्ट्रेशन था।

मुझे उन लोगों के प्रति एक पल के लिए दया भी आई कि मन, एनर्जी के लिए कोई सही डायरेक्शन नहीं है… वरना इतनी एनर्जी कुछ अच्छा कर रही होती। लेकिन बहुत खीज भी हुई, बहुत लाचार भी महसूस किया। मैंने सोचा था कि इस बारे में लिखूंगी, लेकिन फिर लगा कि ये बैंगलौर का एक छोटा सा हिस्सा है। हो सकता है बाकी जगह सब शांत रहा होगा। सुबह उठकर खबरें देखीं तो बंगलौर के सबसे पॉश, सबसे बड़े और सेलिब्रेट करने के लिए सबसे आम पब्लिक स्पेस पर 1500 पुलिसवालों के सामने लड़कियों को मोलेस्ट किया गया। मैं बस इतना ही लिखना चाह रही हूं कि 31 की रात कोई उत्सव-खुशी की रात नहीं थी। मुझे उस रात सिर्फ डर लगा।

फोटो आभार: कैरोल ओल्सन, ट्विटर

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