Youth Ki Awaaz हिंदी पर 2016 में आपके वो लेख जिन्हें सराहा सभी ने

Posted by Sidharth Bhatt in Hindi, Staff Picks
January 1, 2017

हमारे सभी पाठकों को 2017 में नए साल की शुभकामनाएँ। 2016 में हम सभी बहुत सी अहम घटनाओं के गवाह बने, यूथ की आवाज़ के लिए भी ये साल काफी ख़ास रहा, खासकर कि यूथ की आवाज़ हिन्दी के लिए। बीते साल हम काफी सारे नए हिन्दी पाठकों से जुड़े और साथ ही आप सभी के बीच से ही हमारे हिन्दी लेखकों की संख्या में भी इजाफा हुआ। हमारे लेखकों ने अमूमन सभी मुद्दों पर अपनी राय को लेख के रूप में हमारे प्लेटफार्म पर साझा किया।

बीते साल में जिस तरह से हिन्दी माध्यम में लोग हमसे जुड़े हैं वो बेहद उत्साह बढ़ाने वाला है और इस आने वाले साल में हम एक प्लेटफार्म के रूप में और बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये हैं 2016 के कुछ बेहतरीन लेख जिन्हें आप सभी ने पसंद किया और जिनके ज़रिये ज़रूरी मुद्दों को उठाया गया।

1)- शिंगणापुर शनि मंदिर में औरतें चढ़ावा क्यों नही चढ़ा सकतीं?

शिंगणापुर शनि मंदिर में एक विशेष पूजा स्थल पर महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक पर लिखा गया यह लेख पित्रसत्ता के मानकों और दोहरे रवैये पर चोट तो करता ही है, साथ ही लेखक के इस मंदिर में हुए निजी अनुभव की भी बात करता है।

शिंगणापुर शनि मंदिर में औरतें चढ़ावा क्यों नही चढ़ा सकतीं?

आज अखबार में खबर पढ़ी कि एक महिला समूह शनि शिंगणापुर मंदिर में 26 जनवरी को उस सालों पुरानी परंपरा को तोड़ने की तैयारी कर रहा है जिसमें महिलओं का उस चबूतरे पर जाना वर्जित है जहां शनि पत्थर स्थापित है। पिछले साल नवंबर महीने में शिंगणापुर शनि मंदिर के

2)- क्याें आर के लक्षमण आज भी चित्र-व्यंग्य के भिष्मपितामह हैं

प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण के जीवन पर नज़र डालता यह लेख उनकी प्रेरणाओं, उनके निजी जीवन और उनके काम के बारे में संछिप्त जानकारी देता है।

क्याें आर के लक्षमण आज भी चित्र-व्यंग्य के भिष्मपितामह हैं

“कमी नहीं कद्रदां की अकबर, करो तो पहले कमाल पैदा” – अकबर इलाहाबादी मशहूर उर्दू शायर अकबर इलाहाबादी का उपरोक्त शेर भारतीय ‘आम आदमी’ के सर्वमान्य प्रतीक रासीपुरम कृष्णा स्वामी लक्ष्मण अर्थात आर के लक्ष्मण पर बिल्कुल सटीक बैठता है। आर के लक्ष्मण एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही

3)-सिस्टम से जो फायदा कन्हैया कुमार को मिलता है वो रोहित वेमुला को क्यों नही मिल पाता?

जातिवाद और वर्णव्यवस्था या कास्ट सिस्टम के छात्र आन्दोलनों और सामाजिक विषयों पर पड़ने वाले असर और मेनस्ट्रीम मीडिया के द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को भी यह कैसे प्रभावित करता है, पढ़ें इस लेख में।

सिस्टम से जो फायदा कन्हैया कुमार को मिलता है वो रोहित वेमुला को क्यों नही मिल पाता?

जहाँ आजकल अगड़ी जातियों की लड़ाई आरक्षण जैसे संवेधानिक अधिकारों से है वहीँ पिछड़ी जातियां आजादी के 68 साल बाद अब भी गरिमा के साथ जिन्दगी जीने के अधिकार को लेकर लड़ रही हैं, मुझे इसलिए लिखना पड़ता है। मुझे इसलिए भी लिखना पड़ता है कि सिस्टम से जो फायदा

4)-सैराट: जाति व्यवस्था के बीच प्रेम को तलाशती एक सशक्त फिल्म

अप्रैल 2016 के अंतिम हफ्ते में आई मराठी फिल्म सैराट, एक ओंची जाति के लड़की और निचली जाति के एक लड़के की एक प्रेम कहानी है जो जाति व्यवस्था के दंश को सामने लेकर आती है। लेखिका ने इस फिल्म को जातिव्यवस्था पर अपने विचारों को रखने के लिए एक सशक्त माध्यम की तरह प्रयोग किया है।

सैराट में ऐसा क्या है जो तुम्हें परेशान कर रहा है?

सैराट के बारे में बहुत सुना, बहुत पढ़ा पर फिल्म के ख़त्म होने पर मैं निराश थी। मैं तो गयी थी “आखिर में जीत प्यार की ही होती है”, देखने और ये क्या फिल्म ने तो वही दिखा दिया जो इस देश के गाँव- खेड़ों, हुक्का-पानी वाली पंचायतों, वैवाहिकी वाले कॉलम और फेसबुक वाले शहरों में होता है। एक बच्चा रो रहा है, उसके पैर खून से सने हैं और वह, निशान हम पर क्यूँ छोड़ कर जाता है?

5)-पाकिस्तान में कौन सुनेगा हिन्दू अल्पसंख्यकों की?

पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यकों की स्थिति को सामने लेकर आता यह लेख किसी भी समाज में अल्पसंख्यकों की स्थिति के बेहद संवेदनशील मुद्दे पर बात करता है।

पाकिस्तान में कौन सुनेगा हिन्दू अल्पसंख्यकों की?

पाकिस्तान में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदाय अपनी पहचान, संस्कृति, अधिकार आदि क़ी मांग कर रहे हैं, और वर्तमान में यह समस्या काफी गंभीर होती जा रही है। अगर बहुसंख्यक वर्ग किसी विशेष अल्पसंख्यक समुदाय को इस्लाम आधारित कानूनों को मानने के लिए बाधित करता है तो टकराव होना लाज़मी है। हमेशा

6)-क्यों जामिया का स्कॉलर साइकल से घूम रहा है चम्बल?

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र शाह आलम की एक अनूठी यात्रा पर लिखा गया यह लेख जिसमे लेखक बता रहे हैं कि किस तरह शाह आलम अपनी साइकल से चम्बल में घूमकर उन क्रांतिवीरों की कहानियां तलाश रहे हैं, जिन्हें शायद आज की युवा पीढ़ी भुला चुकी है।

क्यों जामिया का स्कॉलर साइकल से घूम रहा है चम्बल?

‘उन तेज़ आँधियों में हमने जलायें हैं चिराग जो हवाएं पलट देती हैं चिराग़े अक्सर’ – शाह आलम किसी मुल्क़ में जब क्रांतियों का इतिहास लिखा जाता है, तब गढ़े जाते हैं कुछ नायक, और इसी क्रम में स्याही नहीं रंग पाती किताबों को, कुछ ऐसे वीरों से जिन्होंने अपने

7)- बिस्मिल साहब इतने डिमांडिंग मत बनिए, अब क्रांति के दिन गए

शाह आलम की ही यात्रा के एक किस्से पर लिखा गया एक लेख जिसमे क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के पैत्रिक गाँव और उनके नाम पे खोले गए पुस्तकालय की हकीकत बताई जा रही है।

बिस्मिल साहब इतने डिमांडिंग मत बनिए, अब क्रांति के दिन गए

“ओ रे बिस्मिल काश आते आज तुम हिन्दोस्तां, देखते की मुल्क सारा ये टशन ये थ्रिल में है।” गुलाल फ़िल्म का ये गाना भले ही डार्क ह्यूमर का हिस्सा हो लेकिन बिस्मिल साहब, आप अगर आज आते तो यक़ीनन देखते की पूरा मुल्क टशन और थ्रिल में है। आप इसमें

8)-छत्तीसगढ़ में बेरोकटोक जारी है बच्चों की ट्रैफिकिंग, क्या कर रही है राज्य सरकार?

छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और चाइल्ड ट्रैफिकिंग की समस्या को उठाता यह लेख, सरकार के इस दिशा में किये जा रहे प्रयास और समस्य के कारणों पर ध्यान खींचता है।

छत्तीसगढ़ में बेरोकटोक जारी है बच्चों की ट्रैफिकिंग, क्या कर रही है राज्य सरकार?

जब हम विश्वगुरू बनने की इच्छा और युवा भारत के जुमले पर अभिमान कर रहे होते हैं, तब कोई बच्चा लापता हो रहा होता है। हाल ही में मुम्बई पुलिस ने मुम्बई के एक बंगले में छापा मारकर 28 बच्चों को छुड़ाया जिसमें से ग्यारह बच्चे छत्तीसगढ़ के निकले। इनकी

9)- कैसे आज गाय को धर्म के रखवालों ने शाकाहारी से मांसाहारी बना दिया है

गाय पर पिछले लम्बे समय से की जा रही राजनीति पर, इस लेख के ज़रिये लेखक एक कटाक्ष कर रहे हैं।

कैसे आज गाय को धर्म के रखवालों ने शाकाहारी से मांसाहारी बना दिया है

बचपन में मास्टर साहब ने कई बार लेख लिखने को दिया। कहा जिस पर मन हो उस पर लिखो। हमारा भी सब फिक्स था। लेख या तो गाय पर लिखेंगे या 26 जनवरी पर। क्या है कि कुछ सोचना नही पड़ता था, जो देखा है लिख दो। गाय पर जब

10)-‘मुझे अपने बिहार वापस जाना था, लेकिन सुना है शहाबुद्दीन जेल से बाहर आ रहा है’

बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन की रिहाई पर एक बिहारी की राय और उसके डर को लेखक ने इस लेख के ज़रिये आवाज़ दी है।

‘मुझे अपने बिहार वापस जाना था, लेकिन सुना है शहाबुद्दीन जेल से बाहर आ रहा है’

गांव के दालान पर बैठकी लगी थी. नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग( राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की सरकार लालू यादव के किले को धराशायी करते हुए सत्ता में पहुंची थी. दालान पर सभी उत्सुक थे और बोल रहे थे कि अब तो सुशासन बाबू के शासन में शहाबुद्दीन सरीखे अपराधियों की खैर नहीं.

11)-‘मैं आदिवासी हूं इसलिए मेरा अपमान किया गया, हर कोशिश की गई कि मैं विदेश जाकर ना पढ़ूं’

आदिवासी समुदाय से आने वाले एक युवा से उसके संघर्ष पर किस तरह पढाई और आगे बढ़ने में उसे भेदभाव का सामना करना पड़ा, इस पर उन्ही से सीधी बातचीत को इस इंटरव्यू के ज़रिये सामने लाने की कोशिश की गयी है।

‘मैं आदिवासी हूं इसलिए मेरा अपमान किया गया, हर कोशिश की गई कि मैं विदेश जाकर ना पढ़ूं’

केरल के बीनेश बालन इतना तो जानते थे कि आदिवासी समाज से आने के कारण हक की लड़ाई लंबी, मुश्किल और कभी-कभी हताश कर देने वाली होगी, लेकिन इससे रूबरू होना इतना परेशान कर देने वाला होगा कि सूसाईड जैसे ख्याल मन में घर कर जाएंगे ये शायद कल्पना के

12)-हमारी ब्रा के स्ट्रैप देखकर तुम्हारी नसें क्यों तन जाती हैं ‘भाई’?

महिलाओं के साथ होने वाले तमाम भेदभाव और समाज के द्वारा उन पर थोपे जाने वाले नियमों की खिलाफत करता एक मजबूत लेख जो पित्रसत्ता पर कड़ी चोट करता है।

हमारी ब्रा के स्ट्रैप देखकर तुम्हारी नसें क्यों तन जाती हैं ‘भाई’?

‘अरे! तुमने ब्रा ऐसे ही खुले में सूखने को डाल दी?’ तौलिये से ढंको इसे। ऐसा एक मां अपनी 13-14 साल की बेटी को उलाहने के अंदाज में कहती है। ‘तुम्हारी ब्रा का स्ट्रैप दिख रहा है’, कहते हुए एक लड़की अपनी सहेली के कुर्ते को आगे खींचकर ब्रा का स्ट्रैप ढंक देती है। ‘सुनो!

13)-अगर सांवली रात खूबसूरत है तो सांवला चेहरा कैसे बुरा है?

त्वचा का रंग आपके व्यक्तित्वा पर कितना असर डालता है, क्या कोई ख़ास रंग आको बेहतर बनाता है? इसी मुद्दे पर लेखिका अपनी राय बता रही है और कह रही है कि रंग का खूबसूरती से कोई सम्बन्ध नहीं है।

अगर सांवली रात खूबसूरत है तो सांवला चेहरा कैसे बुरा है ?

काफी समय पहले नंदिता दास का यह पोस्टर फेसबुक पर दिखा था। ‘Stay Unfair, Stay Beautiful’ बहुत खूबसूरत लगता है यह शब्द। गोरेपन की चाहत के भ्रम को तोड़ता और सांवलेपन से प्यार करना सिखाता है यह शब्द। अपने सांवलेपन को लेकर अफ़सोस करने वाली तमाम लड़कियों में आत्मविश्वास भरता

14)-BHU में महिला महाविद्यालय का नाम सुनकर मुंह से बस ‘ओह’ निकलता है

देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान BHU के महिला महाविद्यालय में आज भी छात्राओं को किस कदर भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, इसी पर लेखिका अपने निजी अनुभवों को इस लेख के ज़रिये साझा कर रही हैं।

BHU में महिला महाविद्यालय का नाम सुनकर मुंह से बस ‘ओह’ निकलता है

जी हां, एम.एम.वी. (महिला महाविद्यालय) बी.एच.यू. के अन्दर तो है पर बी.एच.यू. जैसा नहीं है। बी.एच.यू.

15)-क्‍या हमने बिहार और यूपी में साम्‍प्रदायिक तनाव की ये खबरें देखीं, पढ़ीं और जानी हैं

सांप्रदायिक तनाव के मुद्दे पर इस लेख में लेखक ने हाल ही में देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को सामने लाने का प्रयास किया है, और इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान खींचने का प्रयास किया है।

क्‍या हमने बिहार और यूपी में साम्‍प्रदायिक तनाव की ये खबरें देखीं, पढ़ीं और जानी हैं

क्‍या हमें पता है कि पिछले हफ्ते तीन दिनों में कई जगहों पर हिन्‍दू और मुसलमान आमने-सामने आए हैं? दोनों समुदायों के टकराव की ये बातें हमें अलग-अलग माध्‍यमों से आ रही खबरों से पता चल रही हैं। खास तौर पर उत्‍तर प्रदेश और बिहार में साम्‍प्रदायिक तनाव की खबरें बड़े पैमाने पर मिल रही हैं। यूपी के पूर्वी इलाके में तनाव ज्‍यादा फैला है.

16)-बनस्थली विद्यापीठ यानी लड़कियों का जेलखाना

बनस्थली विद्यापीठ की कुछ छात्राओं से बात कर लेखक ने जानने की कोशिश की कि इस प्रतिष्ठित संस्थान में छात्राओं को मिलने वाली सुविधाएँ कैसी हैं और उन्हें किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बनस्थली विद्यापीठ यानी लड़कियों का जेलखाना

छठ के मौके पर बिहार के समस्तीपुर से दिल्ली लौटते वक्त इस बार जयपुर वाली ट्रेन में रिज़र्वेशन मिली जो दिल्ली होकर गुज़रती है। मालूम पड़ा कि दिल्ली से कहीं ज़्यादा बिहार का ठेकुआ जयपुर को जाता है। उससे भी आगे। राजस्थान के टोंक ज़िले की बनस्थली विद्यापीठ (यूनिवर्सिटी) में

17)-“हम वो बेशर्म औरते हैं जो हर पिंजरा तोड़ना जानती हैं”

पिंजड़ातोड़ मूवमेंट की अगुआ सबीका नकवी ने यूथ की आवाज़ के सालाना इवेंट कनवर्ज में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर बेबाकी से अपनी राय सबके सामने रखी। यह लेख उन्ही के विचारों को एक लेख के रूप में आपके सामने रखता है।

“हम वो बेशर्म औरते हैं जो हर पिंजरा तोड़ना जानती हैं”

तारीख में ऐसी तारिखें बार बार आई हैं, जब औरतों ने हर जगह बिजलियां गिराई हैं, गर ये बात आपको छूती नहीं है तो यकीन मानिए वक्त भी आ चुका है और ऐसे लोग भी हैं जो आपकी सोच पर बिजलियां गिरा के दम लेंगे। उन बिजलियों से ढह जाएगा,

18)-हेड शेव की हुई लड़की

सुन्दरता के बने बनाए मानकों को चुनौती देता ये निजी अनुभव लेखिका का एक सराहनीय प्रयास है।

हेड शेव की हुई लड़की

हेड शेव कराया है। क्यों?

19)-निजी फैसलों में दखल देने वालों को टीना डाबी का करारा जवाब-एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

2015 की आईएएस टॉपर टीना डाबी के इस इंटरव्यू में उन्होंने निजी जीवन में दखल देने वालों को एक करार जवाब दिया है।

निजी फैसलों में दखल देने वालों को टीना डाबी का करारा जवाब-एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

टीना डाबी साल 2015 की आईएएस टॉपर टीना डाबी एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। लेकिन इस बार अपनी शादी को लेकर। टीना उसी साल सिविल सेवा परीक्षा में दूसरा स्थान पाने वाले अतहर आमिर-उल-शफी खान से शादी करने जा रही हैं। टीना युवाओं के लिए आइकन हैं और

20)-डियर गौरी शिंदे, मेरे बचपन पर फिल्म बनाने के लिए थैंक्स।

हाल ही में आइ गौरी शिंदे की फिल्म डिअर ज़िन्दगी से लेखिका कैसे खुद को जोड़ के देखती हैं और किसे यह फिल्म उन्हें उनके निजी अनुभवों की याद दिलाती है, इस लेख में पढियेगा ज़रूर।

डियर गौरी शिंदे, मेरे बचपन पर फिल्म बनाने के लिए थैंक्स।

डियर गौरी शिंदे, आपकी हालिया रिलीज़ हुई फिल्म ‘डियर जिंदगी’ ने मुझे बुरी तरह रुलाया। कुछ सीन्स इतने भावनात्मक थे कि बस खुद पर नियंत्रण करना मुश्किल था। पहले कभी नहीं हुआ ऐसा, शायद ऐसी फिल्म ही नहीं आई। या कुछ आई भी तो उनसे वैसा जुड़ाव महसूस नहीं हुआ।

21)-25 मार्च 1989: जयललिता की तुलना हुई द्रौपदी से और ली गई एक प्रतिज्ञा

तमिलनाडु के सबसे सशक्त राजनेताओं में से एक और पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन की उस घटना के बारे में बताता एक लेख जिसने उनकी राजनीतिक शक्शियत को गढ़ने में अहम् भूमिका निभाई।

25 मार्च 1989:जयललिता की तुलना हुई द्रौपदी से और ली गई एक प्रतिज्ञा

25 मार्च 1989, तमिलनाडु विधानसभा। जो अंदर हुआ उसके अलग-अलग वर्ज़न्स, अलग-अलग लोगों से सामने आएं। लेकिन एक दृश्य जो सबने देखा वो था जयललिता का विधानसभा से परेशान हालत में अपनी खीची(कई वर्ज़न्स में फटी हुई साड़ी) हुई साड़ी में रोते हुए बाहर आना। जहां नियम बनाए जाते हैं

22)-मैनपुरी घटना पर एक पुलिसवाले का अखिलेश यादव को खुला खत

मैनपुरी उत्तर प्रदेश में एक महिला के साथ बदसलूकी और मारपीट का एक विडियो वायरल हुआ, उत्तर प्रदेश पुलिस के ही एक अधिकारी अभिषेक प्रकाश ने मुख्यमत्री अखिलेश यादव को कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए एक खुला ख़त लिखा है।

मैनपुरी घटना पर एक पुलिसवाले का अखिलेश यादव को खुला खत

“वाया हम भारत के लोग” आज कल बहुत चिट्ठीयां लिखी जा रही हैं इस देश में। मैं नहीं जानता कि उनका क्या हश्र होता होगा, कितनी जवाबी कारवाई होती होगी। लेकिन आज चुप रहना अच्छा नहीं लगा तो अपनी खाकी वर्दी थोड़े समय के लिए उतारकर एक ‘बेचारे नागरिक’ की

23)-दंगल विशुद्ध भारतीय फिल्म है

2016 के दिसंबर महीने के अंत में आई सुपरहिट फिल्म दंगल का एक इमानदार रिव्यु जिसमे लेखर आपको बता रहे हैं कि यह फिल्म क्यूँ देखी जानी चहिये।

दंगल विशुद्ध भारतीय फिल्म है

दिल्ली के घंटाघर इलाके का ‘अंबा सिनेमा’ दिल्ली से विलुप्त होते सिंगल स्क्रीन थियेटर की आखिरी निशानी की तरह ज़िंदा है। और इसे ज़िंदा रखने के लिए मजबूरी में किसी गंदी भोजपुरी फिल्म या कांति शाह का सहारा नहीं लेना पड़ता। यहां आमिर खान की दंगल लगती है और वो भी हाउसफुल। ‘दंगल’ के प्रोमो वाले पोस्टर पर जिस तरह ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के?’

24)-तुम उनके जिस्म पर कपड़े देखना ही नहीं चाहते।

क्रिकेटर मुहम्मद शमी और उनकी पत्नी के एक फोटो पर सोशल मीडिया में हुए विवाद पर इस लेख के ज़रिये लेखक ने अपनी राय व्यक्त की है और संकीर्ण विचारधारा वाले कथित सभ्य समाज को सवालों के कठघरे में खड़ा किया है।

तुम उनके जिस्म पर कपड़े देखना ही नहीं चाहते।

एक प्यारी सी तस्वीर है, पति अपनी पत्नी की बाहों में हाथ रखे बैठा है और दोनों मुस्कुरा रहे हैं। लेकिन यह मुस्कुराहट तुम्हें दिखाई नहीं देगी, क्योंकि तुम्हारी नज़रें बीवी के बिना बांह वाले गाउन पर अटक गई हैं, उसके खुले हुए गले में तुम झांकना चाहते हो। तुम

25)-सादुलपुर के ये विधायक नायक के ‘अनिल कपूर’ से कम नहीं

सादुलपुर राजस्थान से बसपा विधायक मनोज न्यान्गली, जिनकी छवि एक जनप्रिय विधायक की है इस इंटरव्यू में बात कर रहे हैं समाज, व्यवस्था और एक राजनीतिक नेता की भूमिका पर।

सादुलपुर के ये विधायक नायक के ‘अनिल कपूर’ से कम नहीं

मंत्री, सांसद, विधायक, सरपंच, वार्ड पार्षद, यह शब्द दिमाग में आते ही अमूनन सबसे पहला ख़याल आपके दिमाग में क्या आता होगा? लम्बी-लम्बी गाड़ियों का काफिला, आम जनों के पहुंच से दूर, बेईमान, घमंडी या कुछ और?

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