युद्ध विभीषणों के बल पर जीता जाता है, ताकत के बल पर नहीं।

Posted by Sunil Jain Rahi in Hindi, Politics, Staff Picks
January 19, 2017

अब्‍बा हजूर दालान में खटिया बिछाए बैठे थे। सबकी तरह उन्‍हें भी झम्‍मन का इंतजार था। झम्‍मन की घर वापसी हो रही थी। घर वापसी उन्‍हीं की होती है, जिन्‍हें या तो घर से भगा दिया जाता है या निकाल दिया जाता है अथवा जो अपनी जिम्‍मेदारियों से भाग जाते हैं।

भागने वाले और पलायन करने वालों में थोड़ा अंतर है। जो ज्‍यादा पढ़-लिख जाते हैं, वे पलायन कर जाते हैं, जो कम पढ़ लिखें होते हैं वे दूसरे के घरों में काम करते-करते जब थक जाते हैं, फिर उनको घर वापसी की याद आती है। जो भाग जाते हैं, उन्‍हें भगोड़ा कहते हैं। घर से भागने वाले बिना किसी दण्‍ड और सेना से भागने वाले कोर्टमार्शल या सजा पाने के बाद वापसी करते हैं।

राजनीति में घर वापसी पर दण्‍ड नहीं सम्‍मान मिलता है। झम्‍मन की घर वापसी हो रही थी। झम्‍मन न घर से भागे थे, न सेना से। वे राजनीति में हैं और पार्टी में आने तथा जाने को भागना नहीं कहते हैं। उसे घर वापसी कहा जाता है। वैसे ही जैसे-जहाज डूबने लगता है तो चूहे भागने लगते हैं, या पार्टी जनता द्वारा दरकिनार कर दी जाती है या झम्‍मन जैसों का वजूद समाप्त हो जाता है तो उन्‍हें घर वापसी यानी नयी पार्टी में जाने की याद आती है।

घर वापसी पर मंच सजाया जाता है, माला पहनाई जाती है, झम्‍मन पार्टी के अब्‍बाओं के चरण स्‍पर्श कर अपनी निष्‍ठा जाहिर करते हैं। दूसरे शब्‍दों में जब तक आपकी पार्टी में दम है, तब तक झम्‍मन आपके साथ हैं। झुके हुए, विनम्रता, चापलूसी के साथ और पार्टी डूबती दिखाई देगी तो झम्‍मन अपने पुराने घर की वापसी कर लेंगे।

घर वापसी घर के हित के लिए होती है। घर में बेटा, बेटी, भाई, भतीजा, चाचा और दादाजी हैं, इसलिए यह दो देशों के आपसी हितों की तरह होती है। जिस घर (पार्टी) से ओहदे के साथ सत्‍ता, खैर ये तो तय है कि झम्‍मन उसी पार्टी में वापसी करते हैं, जहां सत्‍ता सुख की उम्‍मीद होती है। बिना सत्‍ता के घर और घर के बिना सत्‍ता दोनों का चोली दामन का साथ कैसे छूट सकता है। उसी घर में वापसी होती है, जिस घर में स्‍वागत होता है। तुलसी वहां न जाइए जहां न बरसे नेह। जिस घर में कोप्‍चे (कोने) में भी जगह ना मिले वहां क्‍या वापसी करना।

झम्‍मन की घर वापसी हो गई। कई फ़ूल (Fool) फूलमालाओं के साथ खड़े हैं। उन्‍हें उम्‍मीद है, झम्‍मन के आने से उनके घर की रौनक बढ़ेगी, मुहल्‍ले में रूतबा बढ़ेगा, शोहरत मिलेगी। झम्‍मन की शोहरत से मुहल्‍ले की शोहरत में चार चांद लगेंगे, अगर मुहल्‍ले को शोहरत और रौनक नहीं मिली तो झम्‍मन को फिर भागने पर मजबूर होंगे।
हर पार्टी में झम्‍मन पाए जाते हैं। कहीं-कहीं पार्टी खुद झम्‍मन बन जाती हैं। युद्ध गद्दारों के बल पर जीता जाता है, ताकत के बल पर नहीं।
पहले अपने झम्‍मन को मनाओ और बचाओ। चुनाव जीतना है तो झम्‍मन ढूढों और उनकी घर वापसी कराओ।

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