ओबामा का अमेरिका Vs ट्रम्प का काल्पनिक अमेरिका

Posted by niteesh kumar in Hindi, Politics
January 25, 2017

अब जब आश्चर्यजनक रुप से अमेरिका के राष्ट्रपति पद की कमान नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प के हाथों में आ चुकी है। ऐसे में हर तरफ ट्रम्प के द्वारा चुनाव अभियान में किये वादों को धरातल पर उतारने की संभावनाओं पर चर्चा शुरु हो गई है। डोनॉल्ड ट्रम्प ने ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) को रद्द करने घोषणा और ‘अमेरिका पहले’ का उल्लेख करके ऐसे संकेत भी दे दिये हैं कि चुनावी वादों को अमल में लाया जायेगा।

पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा अगर साल 2008 में ‘यस वी कैन चेंज’ का नारा देकर पहली बार सत्ता में आये थे, तो डोनॉल्ड ट्रम्प  भी ‘अमेरिका नीड्स चेंज’ की बात लेकर जनता के सामने आए थे। डोनॉल्ड ट्रम्प ने अमेरिकियों व दुनिया के सामने जिस अमेरिका की कल्पना पेश की, वह दुनिया भर के तमाम उदारवादियों को चौंकाने वाली थी।

‘अमेरिका पहले’ की बात करके ट्रम्प ने दुनिया के अन्य देशों से नौकरी की तलाश में अमेरिका आने वाले लोगों को रोक देने का वादा किया। यह अमेरिका जैसे विकसित व दुनिया भर में लोकतांत्रिक अधिकारों का रक्षक होने का दंभ भरने वाले देश के लिए अजीब बात थी। सारे बाहरी लोगों को बाहर निकाल दिया जाये तो अमेरिका की कमर ही टूट जायेगी। इसके अलावा मुसलमानों के अमेरिका में आने पर पूर्ण प्रतिबंध व शरणार्थी संकट से निपटने के लिए मैक्सिको की सीमा पर दीवार बना देने की घोषणा ने भी ट्रम्प के काल्पनिक अमेरिका की चौंकाने वाली छवि पेश की।

तमाम वाद-विवादों, विरोधों के बावजूद डोनॉल्ड ट्रम्प अपनी प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को मात देने में कामयाब हो गये। अब आगे क्या होगा, यह सब देखना काफी दिलचस्प होने वाला है। मगर इन सब से पहले ओबामा के कार्यकाल पर नजर डालना जरुरी हो जाता है।

अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने लगातार दो बार (8 साल तक) राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाला। निश्चित तौर पर एक राष्ट्रपति के लिए यह एक लंबा समय होता है जिसमें वह देश को एक छोर से दूसरे छोर तक ले जाने का कार्य कर सकता है। मगर सवाल यह है कि आखिरकार ओबामा अमेरिका को किस छोर से किस छोर तक ले गये।

सर्वविदित है कि बरॉक ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे। और यह भी सर्वविदित है कि अमेरिका में कई दशकों से अश्वेतों के साथ नस्लीय भेदभाव होता रहा है। ऐसे में अमेरिकियों की ओबामा से पहली उम्मीद शायद यही थी कि वे नस्लीय भेदभाव को हमेशा के लिए समाप्त कर देगें। मगर ओबामा ऐसा नहीं कर पाये हैं। जानकारों का मानना है कि ओबामा के कार्यकाल में नस्लीय भेदभाव घटने के बजाय और बढ़ा ही है।

ओबामा के कुल आठ साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी कामयाबी यही मानी जा रही है कि वे तमाम अमेरिकियों को स्वास्थ्य बीमा दिला पाने में सफल हुए हैं। इस स्वास्थ्य बीमा के तहत लाखों अमेरिकियों को एक प्रकार से मुफ्त में स्वास्थ्य सुविधायें मिल पायेंगी। साल 2008 में जब ओबामा ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाला था, उस समय देश भारी आर्थिक मंदी की चपेट में था। ओबामा ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी जनता से यह वादा किया था कि हम देश को मंदी से बाहर निकाल देगें। आज जरुर अमेरिका अर्थव्यवस्था में कुछ जान आई है लेकिन बहुत अच्छे हालात नहीं कहे जा सकते हैं। कई अमेरिकियों ने ओबामा पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में दुनिया से अमेरिका का दबदबा कमजोर हुआ है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि ओबामा के नेतृत्व में अमेरिका, शांति नोबेल प्राप्तकर्ता बराक ओबाका के अपने ही जिम्मेदार अंदाज में चलता रहा। अमेरिका अपनी आंतरिक आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में ज्यादा व्यस्त रहा ना कि दुनियाभर  के पचड़े में पड़ने को लालायित दिखा।

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