आरक्षण निर्धारण (जाती या आमदनी)

Posted by Shippra Mishra
February 8, 2017

Self-Published

अभी अभी हमारे देश के विकास के लिए एक बहुत ही एहम फैसला लिया गया है जो कि था “विमुद्रीकरण”. मैं इस फैसले का सम्मान करते हुए इस फैसले से पूरी तरह से सहमत हूँ, कि काले धन को खत्म करने के लिए जो भी निर्णय लिया गया वो सर्वथा उचित है.

पर आज मैं एक और मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करना चाहती हु जिससे ना ही सिर्फ मेरे देश का विकास होगा बल्कि मेरे देश मे एकता का भी वास होगा, मैं आप सबका ध्यान केंद्रित करना चाहती हु “आरक्षण” की तरफ,

जैसा की आरक्षण तब लागु किया गया था जब हमारे देश में निचे जाती के लोगो को हर अधिकार से वंचित रखा जाता था, उस समय डॉ. भीमराव आंबेडकर जी द्वारा लिया गया ये फैसला सर्वथा उचित था. इस वजह से देश में सभी को सम्मान अधिकार भी प्राप्त हुआ था. नीचे जाती के लोगो को सुखदायी जीवन जीने की  एक उम्मीद मिली थी और एक जिल्लत की जिंदगी से रहत मिली थी.

बीते हुए वक़्त के साथ आज का वक़्त बदल गया है. आज हर एक व्यक्ति उस सम्मान के साथ जी रहा है जो उसे मिलना चाहिए बस कुछ लोगो की सोच की वजह से वो खुद को आगे नहीं बढ़ा पा रहे है, पर ऐसे लोगो की वजह से हमारा देश आज भी एकता की उस चरम सीमा पर नहीं पहुंच पा रहा.

क्योंकि कुछ लोग ने तो इस अधिकार का मज़ाक बना के रखा है, खुद ऊँची जाति के होकर भी नीचे जाती का प्रमाण पत्र बनवा कर उसका फायदा उठा रहे है. और बहुत लोग ऐसे है जिन्हें इस आधिकार की जरुरत नहीं है फिर भी वो इसका फायदा उठा रहे है. जिस वजह से कम आमदनी वाले लोगो को बहुत से कष्टों का सामना करना पड़ रहा है.

इस इक्कीसवीं सदी में इतना विकास हुआ है कि अब हर इंसान खुद अकेले बहुत कुछ कर सकता है उसे  “आरक्षण” के अधिकार की जरुरत नहीं है. इसीलिए मेरा इस विषय पर यही विचार है की “आरक्षण” सिर्फ उन्हें ही प्राप्त हो जो “बी पी ल”  (बिलो पावर्टी लाइन) में आते हो, फिर चाहे वो किसी भी जाति या धर्म का हो.

क्यूकी हमारे देश में एकता तभी आ सकती है जब हम सब  जाती और धर्म के नाम पर लड़ना बंद करदें, और मेरे विचार से इसे खत्म करने की पहल सिर्फ यही होगी की जाती के नाम पर “आरक्षण” देना बंद किया जाये, क्योंकि जाती के नाम पर दिया आरक्षण स्पष्ट रूप से जाती में हो रहे भेदभाव को दर्शाता है.

आरक्षण मिले पर सिर्फ उन्हें जिनको इसकी जरुरत है.और सिर्फ मैं ही नहीं ऐसा बदलाव हर वो इंसान चाहेगा जिसे पता हो की उसे अपने आपको साबित करने के लिए किसी भी आरक्षण की जरूरत नहीं है वो खुद इस लायक है की अपने दम पर वो सबकुछ हासिल कर सकता है जो वो चाहता है, और ऐसा करने से इंसान की जाती नहीं उसकी काबिलियत देखी जायेगी, उसे निचे जाती के कारण “आरक्षण” से मिला अधिकार के रूप में नहीं बल्कि उसकी काबिलियत से मिला अधिकार के रूप में देखा जायेगा,

ऐसे इंसान के लिए लोगो के मन में सम्मान बढ़ेगा,की उस इंसान ने जो कुछ भी पाया है अपनी मेहनत से पाया है न की किसी मिले आरक्षण के फायदे से. मझे ये भी पता है की मेरे इस विचार का विरोध सिर्फ वही इंसान करेंगे जो इस अधिकार के आदी हो चुके है या जिनको मेहनत करने से डर लगता है जिस वजह से उन्होंने अपने आप को आलसी बना लिया है.

मेरा इरादा किसी की भावनाओ को ठेस पहुंचाने का नहीं है. मैं सिर्फ अपने देश मे एकता देखना चाहती हूँ, और सिर्फ उनकी एक छोटी सी मदद करना चाहती हूँ जिन्हें इस अधिकार की जरुरत है पर जाति के नाम पर मिले आरक्षण की वजह से वो इसका लाभ नहीं पा सकते, मैं बात कर रही हूँ ऐसे लोगो की जो ऊँची जाती के है पर “बी पी ल” में आते है. और मझे पूरा विश्वास है की मेरा ये विचार देश के विकास के लिए एकदम सही है.

जय हिंदुस्तान, जय भारत.

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