इतना बड़ा चॉकलेट, खाने में मज़ेदार, दू रुपिया में खरदा, तीन रुपिया में बेचा

Posted by gunjan goswami
February 26, 2017

Self-Published

“इतना बड़ा चॉकलेट ,खाने में मजेदार दू रुपिया में खरदा, तीन रुपिया में बेचा”

अगर आपको ऊपर लिखी पहेली का अर्थ समझ नहीं आया, तो निश्चित ही आप अपने बचपन के होनहारों में  से नहीं थे। पर सुमित को इसका अर्थ मालूम था, रितु और उसकी सहेलियों ने सुमित से यह पहेली की थी पांचवी कक्षा में। उस वक्त सुमित भी फसा था। सबने उसका मजाक उड़ाया था। पर अब छठवीं में आते-आते सुमित सैकड़ों लड़कों से यह पहली पूछ कर, उनका मजाक बना चुका था।
Tution, exam, school और लड़ाइयों में 3 साल बीत गए । 9वीं के आखिरी तिमाही exam  के बाद सुमित ने ऋतु को प्रपोज कर दिया। एग्जाम की छुट्टियों के बाद स्कूल में बस एक ही चर्चा थी । सुमित और ऋतु के बीच कुछ है। ये जो ‘कुछ’ था न उन दोनों के बीच , सुमित इसे ही प्यार समझता था। दसवीं के अंत तक दोनों स्कूल के स्टार कपल बन चुके थे ।बिल्कुल परफेक्ट वाले। घर से स्कूल साथ,स्कूल में साथ, स्कूल से घर साथ, फिर ट्यूशन भी साथ। और अगर आप इतना ज्यादा साथ रहते हैं  माने आपके बीच प्यार है।
 ‘कोटा, राजस्थान’।
 दसवीं की परीक्षा  में सुमित और रितु दोनों को अच्छे नंबर आए। इस कारण दोनों को इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए, कोटा की एक मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री में भेजा गया। जहां इंजीनियर्स मैन्युफैक्चर होते थे । कोटा में दोनों का प्यार अपने अगले लेवल पर गया ।दोनों के बीच की नजदीकियां बढी। सुमित इसे भी प्यार के उस अनिवार्य प्रारूप का एक चरण मानता था, जो उसने आज तक देखा था । इलेवंथ में क्योंकि दोनों पहली बार घर के बाहर अकेले थे ,इस कारण कभी-कभार दोनों का एक दूसरे के रूम पर रुक जाना अब आम बात हो गई थी ।
 इस घुमा फिरी में इलेवेंथ की पढ़ाई तो बिल्कुल चौपट हो चुकी थी। इसलिए बारहवीं में दोनों ने जेईई पर फोकस करने का मन बनाया । सारे टेस्ट्स डीपीपी सॉल्व किए, एलेवेंथ के मेन चैप्टर्स की क्लासेस फिर से किए। पर संडे को दोनों हमेशा ही मिलते थे। कोचिंग में भी सब इन्हें परफेक्ट कपल मानते थे ।सुमित इस बात से काफी खुश होता था।
 ‘हंसराज कॉलेज ,दिल्ली ‘।
कोटा में 2 साल की तैयारी के बाद , अप्रैल 2014 में जेईई के इंट्रेंस एग्जाम थे। एग्जाम रिजल्ट्स आए, रितु ने अच्छा स्कोर किया। पर सुमित से ना हो सका। पर सुमित इससे उदास नहीं था। बोर्ड रिजल्ट और डीयू इंट्रेंस के दम पर ,उसने डीयू के हंसराज कॉलेज में एडमिशन लिया। वही रितु एनआईटी इलाहाबाद में गई।
‘एक साल बाद ‘
सब कुछ नॉर्मल चल रहा था। पर सिर्फ तब तक, जब तक सुमित ने अपनी पुरानी डायरी   नहीं खोली थी ।डायरी में कुछ तस्वीरें थी ,कुछ जोक्स थे, फिर सबकुछ ऋतु के बारे में था । वो सब जो सुमित ऋतु के लिए सोचता था, लिखता था। पूरी रात उस डायरी को पढ़ने के बाद ,सुबह सुमित वहां आकर अटका , जहां अमूमन टुच्चे वाले आशिक ही पहुंचते हैं । मतलब बताता हूं । एक आशिक होते हैं, जो अपनी दाल गलाने में लगे होते हैं ,महबूबा किसी तरह मान जाए वो वाले । दूसरे होते हैं, वो जो रिलेशन में तो है , पर सिर्फ लड़ने के लिए । हर तीसरी बात पर झगड़ा ।और तीसरे वाले होते हैं वो , जिनकी लाइफ में सब पर्फेक्ट होता है। ना झगड़ा , न झंझट । यह जो सारी फिलोसफी है ना । इसे सोचने का ठेका, इन तीसरे वालों को हीं दिया गया है।सुमित भी इसी तीसरे टाइप में था।
एक कॉपी के सादे पेज पर , सुमित ने बोल्ड में ‘प्यार’ लिखा, और उसे अंडरलाइन कर दिया । थोड़ी देर ऐसे ही इस शब्द को देखते देखते । उसने फिर कलम उठाया, और प्यार के बगल में प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दिया । ‘?’ यह वाला ।
आंखें बंद करके वह सोचने लगा, कि यह प्यार क्या है? इसकी परिभाषा क्या है? कितने भेद हैं इसके? इसकी खोज में वह पहुंच गया 9वी के आखिरी तिमाही exam में ।
“मैंने रितु को प्रपोज किया ,उसने हां कहा”
 “ये हाँ ही प्यार था क्या?”
 “नहीं ये तो उसकी हामी थी, की हां वोभी मुझसे प्यार करती है”
“तो क्या अगर मैं प्रपोज नहीं करता, तो प्यार नहीं होता”
“प्रपोज किया तो प्यार हुआ, प्रपोज नहीं किया तो नहीं हुआ “
ये कैसा लोचा है ?
फिर सोचते सोचते वो कोटा पहुंच गया।
“तब जब उसने ऋतु को पहली बार किस किया था, उसके करीब आया था”
“क्या वो प्यार था?”
“नहीं, वो तो सेक्स था।”
“क्या सेक्स ही प्यार है?”
“नहीं नहीं, ये तो आसानी से जीबी रोड पर हजारों में मिल जाता है।”
यह इतना आसान नहीं हो सकता। यह प्यार नहीं हो सकता । ये तो शरीर की जरूरत है।
 और क्या है हमारे बीच जिसे प्यार कहा जाए?
“कुछ नहीं”
 अब सुमित परेशान हो चुका था।
 वह उस चिड़िया को खोज रहा था, जिसे सब प्यार कहते थे । और वह भी।
 पर असल में सुमित, इन परेशानियों से परेशान नहीं था, बल्कि वो इसलिए परेशान था। क्योंकि इन सारी परेशानियों से वो अकेला परेशान हो रहा था।
 ऋतु इस बारे में कुछ नहीं जानती थी। तो इसलिए सुमित अब यही सवाल ऋतु से करना चाहता था ।फेस टू फेस ।
अगले महीने की 13 तारीख को ऋतु का बर्थडे था ।अभी 22 दिन बाकी थे उसके बर्थडे में । सुमित अभी के अभी निकलना चाहता था इलाहाबाद के लिए। पर फिर सोचा की बर्थडे में जाना ही है तो उसी टाइम पूछ लूंगा। किसी तरह 20 दिन काटने के बाद अब सुमित से रहा नहीं जा रहा था। 12 नवंबर को ही वो ऋतु को बिना बताए, इलाहाबाद पहुंच गया। अपने एक दोस्त के रूम पर वह रुका था।
 अगले दिन की सेलिब्रेशन, रितु ने अपनी एक दोस्त  साक्षी के रूम पर रखा था। जो बाहर रुम लेकर रहती थी ।सुमित ने अपनी तरफ से भी तैयारियां की थी अगले दिन शाम को 7:00 बजे सुमित केक और एक ग्रीटिंग कार्ड लेकर पहुंचा।  दरअसल वह एक सरप्राइज पार्टी प्लान कर रहा था।
” रितु की फ्रेंड, साक्षी का रूम”
 सीढ़ियां चढ़ते हुए मैंने अपने फोन के फ्लैश लाइट को ऑन किया । काफी अंधेरा था वहां। मैंने दरवाजा खटखटाया ।
“साक्षी”,मैं सुमित दरवाजा तो खोलो।
साक्षी ने दरवाजा खोला । पर जैसे ही मैं रूम के अंदर आया। I was shocked.
 वहां 5 लोग और थे। दो लड़के और तीन लड़कियां ।जिन्हें मैं नहीं जानता था ।उनकी बातों से लग रहा था कि वो, ऋतु को अच्छे से जानते हैं। मैंने चुपके से साक्षी से पूछा कि ये लोग कौन है ?
उसने बताया कि ये ऋतु के फ्रेंड हैं, एनआईटी से ही हैं।
 मेरी उम्मीद से परे, रूम बिल्कुल सज चुका था ।
थोड़ी ही देर में रितु आई।
 अंदर आते ही उसने मुझे देखा। और एक दम से चीख पड़ी।
” woow, सुमित तुम यहां!!!”
“thanx 4 the surprise my love”
 उसने मुझे hug किया। मैंने भी किया। पर मेरी पकड़ उस ques के बाद पहले सी नहीं रही। पर मैं ऐसा कुछ रितु को फील नहीं होने देना चाहता था।
 सब बैठकर थोड़ी बहुत बातें कर रहे थे। मैं अकेला था।
 मैंने अपने फोन से रितु को एक मैसेज किया।
me: “luking awsm”
ritu:”thanx jaan, n thanx for giving me            the best gift, as u came here, luv u”
me: “anything 4 u sweety,luv u2”
me: “I have to talk to u any something,              meet me after the party”
ritu: “ok dear”
 कुछ ही देर में साक्षी ने सब को बुलाया , और केक काटने की तैयारी शुरू की । मैंने जो केक ऋतु के लिए लाया था वो उस केक का आधा भी नहीं था । मैंने अपना केक नहीं निकाला।
 पार्टी शुरु हुई । केक, स्नैक्स के बीच दो बोतलें बियर की भी थी। लड़कियों ने बिल्कुल थोड़ी सी ली । बाकी सारे लड़के गटक गए । फिर शुरू हुआ डांस। सब डांस कर रहे थे। पर मेरा मूड नहीं था । और मुझे डांस पसंद भी नहीं था। मैं बैठा बैठा सब का डांस देख रहा था।
 “अगली सुबह”
 मैं अपने दोस्त के रूम पर था। और रितु की कॉल का इंतजार कर रहा था । करीब 8:00 बजे रितु ने फोन किया ।
मैं :- हां हेलो ।
ऋतु:- good morning jaan, तुम चले क्यों गए थे             रात को इतनी जल्दी?
 मैं:-  ऐसे ही । कहां हो तुम?
ऋतु :- साक्षी के रूम पर। कल रात डांस के बाद सारे             बहुत थक गए, तो यहीं रुक गए थे।
मैं:-  क्या ? तुम लोग सब वही हो । और वो आदित्य              भी?
ऋतु :- हां । क्यों क्या हुआ?
 मैं:-  मुझे मिलना है ।
रितु :- ओके मैं रेडी हो कर पार्क आती हूं, 1 घंटे में।
 मैं:-  ओके बाय ।
“पार्क, 9:30 बजे सुबह”
 हम दोनों पार्क में घास पर ही बैठे हुए थे।
 रितु ने पूछा :- कल तुम अचानक पार्टी से वापस क्यों                         आ गए।
 मैं :- क्योंकि मुझे आदित्य का ऐसे तुम्हारे साथ डांस               करना अच्छा नहीं लग रहा था।
 रितु :- ohho, जलन , possessive । ,चलो मेरी भी            ख्वाहिश पूरी हुई। बहुत स्पेशल फील होता है                जान ,जब तुम ऐसे रिएक्ट करते हो ।
 मैं:-  मैं मजाक नहीं कर रहा हूं । मुझे गुस्सा आ रहा               था ।
ऋतु :- अरे बस फ्रेंड है यार।
 मैं :- ये कैसा फ्रेंड है जो रात में रुम पर भी रुक जाता             है । मेरे सामने यह सब हो रहा है , तो पता नहीं             मेरे पीठ पीछे क्या सब होता होगा
रितु गुस्से में :- क्या मतलब है तुम्हारा? क्या बोलना                          चाहते हो तुम? देखो सुमित , मेरी                              पर्सनल लाइफ बिल्कुल तुम्हारे साथ है।                        एक बहुत बड़ा हिस्सा हो तुम मेरी                              पर्सनल लाइफ का । पर मेरी सोशल                            लाइफ में मुझे क्या करना है। क्या नहीं।                      ये मुझे किसी से पूछने की जरुरत नहीं                        है ।मैं बस तुम से प्यार करती थी ,करती                      हूं ,और करती रहूंगी ।पता नहीं तुम्हें                            क्या हो गया है। जो ऐसे ख्याल तुम्हारे                          मन में  आ रहे हैं।
 मैं:-  कुछ नहीं हुआ है मुझे। बस ये  दूरियां रिश्तो पर            भारी पड़ रही हैं।
रितु:-  ऐसा कुछ नहीं है सुमित ।
मैं:-  एक सवाल था। पूछूं?
ऋतु :- हां पूछो।
मैं:-  हमारे बीच ऐसा क्या है , जिसे मैं प्यार समझूं?   ऋतु :- ये कैसा सवाल है?
मैं:-  पता नहीं बस मेरे मन में था। तो पूछ लिया।
” थोड़ी देर की खामोशी के बाद “
मैं:- कोई जवाब नहीं है ना । मुझे इसी की उम्मीद थी ।
मैं वापस दिल्ली आ गया।  पर अब सब कुछ वैसा नहीं था जैसा मैं छोड़ कर गया था। धीरे-धीरे बातें कम हुई, फिर फोन सेक्स खत्म हुआ , फिर नाइट चैट्स और फिर कॉल के दरमियान शब्द खत्म हो गए। बातों में शब्द नहीं खामोशियों ने डेरा डाल दिया था। दूरियां इतनी बढ़ गई थी कि कॉल नहीं करना ही अंतिम उपाय था ।बातें बंद हो गई। 6 महीने यूं ही बीत गए। दिल्ली वैसी ही रही, मैं बदल गया।
 ऋतु की कमी ने ,मुझे उसकी मौजूदगी की अहमियत का अंदाजा दिलाया । जो जवाब मैं रितु से चाह रहा था। असल में वो जवाब मुझे खुद से मिला।
 “प्यार क्या है ?”
“ये वो है जो उस शक का कारण था , जब मैंने रितु और आदित्य के बारे में उससे पूछा था ।”
“प्यार वो है जो ऋतु के सिवाय किसी और के बारे में मुझे सोचने नहीं देता”
” प्यार वो है जो हर शाम रात मुझे ऋतु की याद दिलाता है”
” प्यार तो उस भूख की तरह है जो बस लगती है , परिभाषित नहीं होती”
 मैं अब भी ऋतु से प्यार करता था। मुझे अब कोई जवाब नहीं चाहिए था । बस ऋतु चाहिए थी।
 मैंने रितु का नंबर लगाया। पर शायद उसने अपना नंबर बदल लिया था । मैंने साक्षी को फोन लगाया।
 मैं:- हां साक्षी ,मैं सुमित बोल रहा हूं साक्षी हां बोलो।
 मैं :- यार रितु से बात करनी थी । उसका नंबर ऑफ             आ रहा है ।कोई नया नंबर है तो दो।
साक्षी:-  सॉरी। मैं तुम्हें उसका नंबर नहीं दे सकती हूं।               और वैसे भी तुम अब उससे बात करके                       करोगे क्या? अब वह आदित्य के साथ                         रिलेशन में है ।
‘मैंने फोन रख दिया। और फिर वापस कभी रितु से बात करने की कोशिश नहीं की। मैंने अपना प्यार खोया था ।वो  प्यार जिसने मुझे जवाँ होते देखा था। जिसके साथ मैंने अपने अच्छे और बुरे टाइम स्पेंट किए थे। पर अब कुछ भी मेरे हाथ में नहीं था।’
 “नवंबर 2016” 2 साल बाद।
एक दिन बस यूं ही facebook चलाते वक्त पता नहीं मुझे क्या सूझा। मैंने आदित्य सिन्हा की प्रोफाइल सर्च की । असल में मैं ऋतु की फोटो देखना चाहता था ।मैंने सारी फोटोस देखी पर ऋतु की एक भी फोटो नहीं थी। फिर मैंने about में जाकर आदित्य की info check की।
 एक बार फिर से मेरे होठों पर हंसी थी । पर खुशी वाली नहीं, बल्कि हताशा वाली। मैं खुद पर हंस रहा था ।
आदित्य किसी कृतिका नाम की लड़की के साथ कमिटेड था। मैं सारा माजरा समझ गया।
 साक्षी ने मुझसे झूठ कहा था, की ऋतु आदित्य के साथ है ।
 पर मैं अब कुछ नहीं कर सकता था। 2 साल बीत गए। शायद अब तक मैं और ऋतु अजनबी बन चुके थे।
 मैंने उसी डायरी के उस पेज को निकाला जिस पर मैंने “प्यार?” लिखकर अंडरलाइन किया था।
मैंने “प्यार?” को काटा ।और उसके जगह नया शीर्षक लिखा।

 “इतना बड़ा चॉकलेट, खाने में मजेदार , दू रुपिया में खरदा, तीन रुपिया में बेचा।” (LOVE)

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