….ताकि ढ़कोसला ना साबित हो लोकतंत्र !

Posted by niteesh kumar
February 27, 2017

Self-Published

उत्तर प्रदेश एक बार फिर विधानसभा चुनाव के दौर से गुजर रहा है. चार सौ तीन सीटों के साथ उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक विधानसभा सीटों वाला राज्य है. उत्तर प्रदेश में ही लोकसभा की भी सर्वाधिक 80 सीटें आती हैं. इस प्रकार से यह एक ऐसा राज्य है जहां पर होने वाले चुनाव देश भर में हलचल पैदा कर देते हैं.

सीटों की संख्या को ध्यान में रखकर, उत्तर प्रदेश के बारे में कहा जाता है कि दिल्ली (केंद्र) की सत्ता की चाभी यहां से होकर गुजरती है. इस बात का साक्षी इतिहास भी रहा है. उत्तर प्रदेश में बढ़िया प्रदर्शन करने वाली पार्टियों ने दिल्ली में झंडा गाड़ा ही है. पिछले ही लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अस्सी में से बहत्तर सीटें झटक ली थीं और पूर्ण बहुमत से दिल्ली की सत्ता संभाली थी.

कुछ ऐसी ही वजहें हैं कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा, समस्त राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देतीं है. हम वर्तमान का ही देख सकते हैं कि आखिर किस प्रकार से केंद्र में सत्ताधारी भाजपा ने लगभग अपना पूरा मंत्रीमंडल चुनाव प्रचार में लगा दिया है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिदिन तीन-चार चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं.

चुनावी समर से गुजर रहे उत्तर प्रदेश में एक बार फिर सभी पार्टियां जनता से विकास के तमाम वादे कर रही हैं. हांलाकि इनके द्वारा विकास का जो रुप पेश किया जा रहा है, वह भी विवादों के घेरे में है. आखिर कब्रिस्तान से ज्यादा श्मशान बना देना ही विकास है क्याॽ

अभी हाल ही में चुनाव आयोग ने एक रिपोर्ट पेश की है. इसके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों मे होने वाले विधानसभा चुनाव में से अब तक हुए पांच चरणों के मतदान तक, राज्य में अब तक कुल एक सौ सोलह करोड़ रुपये नकद पकड़े गये हैं. इसके अलावा विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ताओं से करीब अठ्टावन करोड़ रुपये की शराब व लगभग आठ करोड़ रुपये के मादक पदार्थ भी बरामद किये हैं.

चुनाव आयोग इसे अब तक के उत्तर प्रदेश के चुनावों में की गई जब्ती का रिकॉर्ड बता रहा है. जबकि अभी भी दो चरण के मतदान होने शेष हैं. यानि ये आंकड़े अभी और भी भयावह होने वाले हैं.

समझ में नहीं आता है कि ये राजनेता आखिर किस मुंह से जनता का विकास करने की बात करते हैं! जब जनता का मत हासिल करने के लिए, ये नेता धन देकर मतदाताओं का मत खरीदने की कवायद में लगे हुए हैं, सैकड़ो करोड़ रुपये की शराब व अन्य मादक पदार्थ जनता को पीला-खीला रहे हैं. ये क्या जनता का विकास करेंगे!

कहना ना होगा कि दिन-पर-दिन बढ़ती जा रही धन बल की इस प्रवृत्ति के लिए काफी हद तक हम मतदाता भी जिम्म्दार हैं. आखिरकार हम मतदातओं के द्वारा लिया जाने वाला यह चुनावी घूस ही तो नेताओं को इन सबके लिए उत्साहित करता है.

राज्य में बढ़ती साक्षरता के तमाम दावों के बावजूद, आखिर क्या वजहें हैं कि उत्तर प्रदेश का मतदाता धन व शराब के लोभ से निकल नहीं पा रहा हैॽ इस बात की निश्चित तौर पर समीझा होनी चाहिए. नहीं तो चुनावों में बढ़ता धन बल लोकतंत्र को ढ़कोसला साबित कर देगा.

 

 

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