’‘तैयारी ड्राइ डे की ’’

Posted by Sunil Jain Rahi
February 20, 2017

Self-Published

शादी से पहले शादी की तैयारी। बारात से पहले बारात की तैयारी। विदेश यात्रा या मंत्री बनने से पहले ओव्हर कोट की तैयारी। यात्रा पर जाने से पहले यात्रा की तैयारी। पति बनने से पहले सहने की तैयारी। शादी के बाद झेलने की तैयारी। गर्लफ्रेंड बनाने के पहले उसकी फरमाइश पूरी करने की तैयारी। मर जाओ तो बाॅडी की तैयारी। जन्म से लेकर मृत्यु तक पहले तैयारी की जाती है।

इन सबसे पहले तैयारी की कोई बात ही नहीं करता। उसका न तो प्रचार होता है न प्रसार। सब कुछ गोपनीय फाइल की तरह चुपके-चुपके काम हो जाता है। यहां तक कि एक हाथ के अलावा दूसरे हाथ को भी मालूम नहीं पड़ता और तैयारी हो जाती हैै। इन सब तैयारियों से पहले होती है एक तैयारी, जिसकी चर्चा आम और खास दोनों लोग करते हैं। वह होती है किसी भी समारोह के पहले ड्राई डे वाली स्थिति न हो। शाम ढलते ही लोग ड्राई डे को मस्त डे बनाने के लिए जुट जाते हैं।

शादी हो या ब्याह। चुनाव हो या चुनाव की पार्टी, नेता जी आ रहे हो या नेता जी जा रहे हो। कोई भी उत्सव हो, महोत्सव हो या फिर व्यापार। प्यार में घाटा या मुनाफा होे। घाटा तो पूरा हो नहीं सकता, इस गम को गलत करने के लिए आप झम्मन को आवाज लगाते हैं- अरे जाओ अलमारी से काली बोतल निकाल लाओ, हां और साथ में दो गिलास भी। बात पीने की है। आपका कोई सा भी काम बिना पिये नहीं हो सकता है। या तो काम के पहले पीते या काम के बाद। जो काम आपके रिश्तेदार, नेता और रुपया नहीं करवा सकते, वह काम एक बोतल कर सकती है। गम गलत नहीं, बल्कि काम सही करने का यही एक आसान तरीका है।

भारत में कतार या लाईन का महत्व हमें शराब ने सिखाया। रेल या बस अथवा सिनेमा का टिकट हम लाईन तोड़कर लेना अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते हैं। दारू की लाईन में बड़े आराम से अपने नम्बर की प्रतीक्षा करते हैं। एक जवान गाड़ी में बैठा होता है, दूसरा लाईन में खड़ा होता है। ऐसा लगता है सेना की टुकड़ी बड़े ही अनुशासित ढंग से आगे बढ़ रही है। ऐसा अनुशासन कहीं देखने को नहीं मिलता। एक यही दुकान ऐसी है, जिसका कोई मौसम नहीं होता। इसका हर मौसम, मौसम होता है। बारह महीनों, सातों दिन इस पर भीड़ रहती है। नोट बंदी, चकबंदी या नसबंदी अथवा तालाबंदी  किसी का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

हमारे राष्ट्रीय त्योहार इसलिए याद किए जाते हैं, इस दिन सरकारी दुकानों पर शराब नहीं मिलती। वैसे सरकार एक ही तो काम अच्छा करती है, शराब बेचती है, यानी शराब का ठेका बेचती है, मुनाफा कमाती है और देश की बढ़ती हुई जनसंख्या को रोकने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करती है। अब देखो बिहार की जनसंख्या कुछ दिनों में फिर से बढ़ने लगी। वहां शराब नहीं बिक रही, यानी खुले तौर पर नहीं बिक रही, इसलिए कोई जहरीली शराब भी नहीं पी रहा।

खैर इन बातों में क्या रखा है। इस शराब के बारे में मधुशाला का अनुवाद करके लोग अमर हो गए। बात तो तब होती है जब शराब नहीं बिकती। खबर तो तब बनती है जब शराब नहीं बिकती। जब सरकार की ओर से नहीं बिकती तो उसे ड्राइ डे कहते हैं।

पांच राज्यों के चुनाव समाप्ति की ओर हैं। चुनाव परिणाम आने वाले है और उसमें जीतने वाला खुशी में पियेगा और हारने वाला गम में पियेगा। सभी इस जुगाड़ में लग गए हैं कि उस दिन ड्राई डे होगा। अब ड्राई डे से निपटने के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी है।

सरकारी ड्राई डे ही नहीं, बल्कि हर कार्यक्रम में ड्राई डे की तैयारी होती है। साहब की पार्टी है तो पार्टी के बाद पीए का कमरा, शादी में पंडाल के पीछे कोका कोला की बोतल में मिलाकर ड्राई डे को सार्थक किया जाता है। मौत के बाद घर के भीतरी कमरे मेें ड्राई डे मनाया जाता है। चुनाव जीतने पर खुल्लम-खुल्ला तो हारने के बाद बंद कमरे में ड्राई डे मनाया जाता है। लेकिन इस ड्राई डे की तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है। इसी तैयारी की वजह से चुनाव से पहले हजारों लीटर शराब पकड़ी जाती है।  चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष बनाने के लिए, सुरक्षा कड़ी करने के लिए, चाक चैबंद करने के लिए जिले की सीमा सील की जाती हैं। असामाजिक तत्व तो कभी भी आ जा सकते हैं, लेकिन ड्राई डे का सामान इस पार से उस पार न जा सके, उसके पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।

हर राज्य पंजाब की तरह सम्पन्न नहीं है, जहां ड्राई डे मनाने के दूसरे तरीके मौजूद हों। जो पार्टी ड्राई डे का इंतजाम कर लेती है, लगभग आधी सत्ता उसके हाथ में आ जाती है। नोटबंद और ड्राई डे दो ही तरीके है चुनाव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने के लिए। जनता में नोट और दारू बंटना हो जाए तो प्रजातांत्रिक देश के चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो जाएं। जातिवादी समीकरण को अगर कोई बदल सकता है, जातिवादी चुनाव परिणाम को कोई परिवर्तित कर सकता है तो वह ड्राई डे।

चुनाव प्रचार के आरम्भ होने से लेकर चुनाव समप्ति तक अगर ड्राई डे न हो तो इस देश के चुनाव के परिणाम स्वच्छ, निर्मल और जांत-पांत के प्रभाव से कोसों दूर रह सकते हैं।

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